त्वरित लिंक्स
General Science
3 views
रासायनिक बंधन और अम्लीय-क्षारीय प्रणालियों (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज (परमाणु, आयन या अणु) हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करने की क्षमता रखते हैं, जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं।
- 2. आर्हेनियस अवधारणा के अनुसार, वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन ($H^+$ या $H_3O^+$) उत्पन्न करते हैं, अम्ल कहलाते हैं, किंतु यह सिद्धांत अमोनिया ($NH_3$) जैसे गैर-जलीय विलायकों में क्षारीय व्यवहार की व्याख्या करने में असमर्थ है।
- 3. पॉलीप्रोटिक अम्लों (जैसे फॉस्फोरस अम्ल $H_3PO_3$) के विभिन्न आयनन चरणों के वियोजन स्थिरांकों का मान घटता जाता है, अर्थात प्रथम वियोजन स्थिरांक ($K_{a1}$) द्वितीय वियोजन स्थिरांक ($K_{a2}$) से अधिक होता है।
- 4. किसी लवण के जल-अपघटन (Hydrolysis) के दौरान, दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है क्योंकि इसमेंऋणायन का जल-अपघटन होता है, जिससे हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH^-$) मुक्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि लुईस अवधारणा के अनुसार, **लुईस अम्ल** वे स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करते हैं (इलेक्ट्रॉन न्यून), जबकि **लुईस क्षार** वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं (इलेक्ट्रॉन धनी)। कथन 2 सत्य है क्योंकि आर्हेनियस सिद्धांत जलीय माध्यम तक सीमित है और यह गैसीय अवस्था या गैर-जलीय विलायकों में अम्ल-क्षार व्यवहार को समझाने में विफल रहता है। कथन 3 सत्य है क्योंकि किसी बहु-प्रोटॉनी अम्ल से क्रमिक रूप से प्रोटॉनों को निष्कासित करना कठिन होता जाता है, जिसके कारण $K_{a1} > K_{a2}$ होता है। कथन 4 सत्य है; दुर्बल अम्ल (जैसे $CH_3COOH$) और प्रबल क्षार (जैसे $NaOH$) से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट) के जलीय विलयन में एसीटेट आयन का जल-अपघटन होता है जिससे $OH^-$ आयनों की अधिकता हो जाती है और विलयन क्षारीय हो जाता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिकांगों (Organelles) और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सिसोम' (F0-F1 कण) ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के दौरान एटीपी (ATP) के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं, और माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र से जुड़े एंजाइम प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं।
2. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का 'सिस्टर्नी' (Cisternae) नेटवर्क ध्रुवीय रूप से व्यवस्थित होता है, जिसमें 'सिस' (Cis) सिरा निर्माणकारी (Forming) या अभिमुखी सिरा होता है जो अंतःद्रव्य जालिका (ER) की ओर होता है, जबकि 'ट्रांस' (Trans) सिरा परिपक्व (Maturing) सिरा होता है।
3. लाइसोसोम में उपस्थित 'हाइड्रोलिटिक एंजाइम' (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज, कार्बोहाइड्रेज) अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अनुकूलित pH को बनाए रखने के लिए लाइसोसोम झिल्ली पर सक्रिय प्रोटॉन पंप ($H^+$ ATPase) कार्य करते हैं।
4. परऑक्सिसोम (Peroxisomes) एकहरे झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं जो पादपों और जंतुओं दोनों में पाए जाते हैं, और इनमें उपस्थित 'कैटालेज' एंजाइम हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($H_2O_2$) को जल और ऑक्सीजन में विघटित करके कोशिकाओं को विषैले प्रभावों से बचाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ऊष्मागतिकी और तापमापी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह स्थापित करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी (Platinum Resistance Thermometer) विद्युत प्रतिरोध के तापमान के साथ रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका उपयोग बहुत कम तापमान (-200°C) से लेकर उच्च तापमान (1200°C) तक के परास को मापने के लिए किया जाता है।
3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य ($Q = 0$) होता है, और यदि किसी आदर्श गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घटती है जिसके परिणामस्वरूप उसके तापमान में गिरावट आती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं के भीतर विभिन्न कोशिकांगों की संरचना और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (Inner membrane) पर 'ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण' की प्रक्रिया संपन्न होती है, जहाँ इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (ETC) के दौरान बनने वाले 'क्रिस्टा' (Cristae) झिल्ली के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाते हैं, और इसके मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र के सभी आवश्यक एंजाइम पाए जाते हैं, सिवाय 'सक्सीनेट डिहाइड्रोजनेज' के जो आंतरिक झिल्ली से जुड़ा होता है।
2. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus) का 'cis' (निर्माण) चेहरा आमतौर पर अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) की ओर और 'trans' (परिपक्व) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है, और यह मुख्य रूप से प्रोटीन के ग्लाइकोसिलेशन तथा लिपिड के ग्लाइकोजिनेशन जैसी रूपांतरण प्रक्रियाओं का प्रमुख स्थल है।
3. लिसोसॉउस (Lysosomes) एक एकल झिल्लीबद्ध कोशिकांग हैं जिनमें हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अम्लीय वातावरण को बनाए रखने के लिए साइटोप्लाज्म से प्रोटॉन ($H^+$) को सक्रिय रूप से पंप किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
भौतिक राशियों की विमाओं और व्युत्पन्न मात्रकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant) का विमीय सूत्र $[M^{-1}L^3T^{-2}]$ होता है, और इसका एसआई (SI) मात्रक $ ext{N m}^2 ext{kg}^{-2}$ है।
2. पृष्ठ तनाव (Surface tension) का विमीय सूत्र बल और लंबाई के अनुपात से प्राप्त होता है, जो कि $[ML^0T^{-2}]$ के रूप में व्यक्त किया जाता है तथा इसका मात्रक $ ext{N m}^{-1}$ होता है।
3. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) का विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ होता है, और जब इसे मूल इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, तो यह $ ext{kg m}^{-1} ext{s}^{-1}$ के तुल्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
ध्वनि तरंगें?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.