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General Science
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भौतिक राशियों की विमाओं और व्युत्पन्न मात्रकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant) का विमीय सूत्र $[M^{-1}L^3T^{-2}]$ होता है, और इसका एसआई (SI) मात्रक $ ext{N m}^2 ext{kg}^{-2}$ है।
- 2. पृष्ठ तनाव (Surface tension) का विमीय सूत्र बल और लंबाई के अनुपात से प्राप्त होता है, जो कि $[ML^0T^{-2}]$ के रूप में व्यक्त किया जाता है तथा इसका मात्रक $ ext{N m}^{-1}$ होता है।
- 3. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) का विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ होता है, और जब इसे मूल इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, तो यह $ ext{kg m}^{-1} ext{s}^{-1}$ के तुल्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन भौतिक राशियों के विमीय सूत्रों और मात्रकों के दृष्टिकोण से पूर्णतः सत्य हैं। प्रथम कथन के अनुसार, न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम $F = G rac{m_1 m_2}{r^2}$ से $G$ का विमीय सूत्र $[M^{-1}L^3T^{-2}]$ और मात्रक $ ext{N m}^2 ext{kg}^{-2}$ प्राप्त होता है। द्वितीय कथन में, पृष्ठ तनाव $T = rac{F}{l}$ होता है, जिसका विमीय सूत्र $[ML^0T^{-2}]$ और मात्रक $ ext{N m}^{-1}$ है। तृतीय कथन के अनुसार, श्यानता गुणांक स्टॉक के नियम या वेग प्रवणता के सूत्र से निकाला जाता है, जिसका विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ और एसआई मात्रक $ ext{kg m}^{-1} ext{s}^{-1}$ होता है। भौतिक राशियों के मापन और मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव तत्व की अर्ध-आयु (Half-life) उस समयाराश के बराबर होती है जिसमें परमाणु नाभिकों की प्रारंभिक संख्या घटकर अपनी मूल संख्या की आधी रह जाती है, और यह अर्ध-आयु काल उस तत्व के रेडियोएक्टिव क्षय नियतांक (Decay Constant) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
2. 'द्रव्यमान क्षति' (Mass Defect) किसी नाभिक के वास्तविक कुल द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत प्रोटॉनों व न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों के योग के बीच का अंतर है, और यही द्रव्यमान क्षति अल्बर्ट आइंस्टीन के संबंध $E=mc^2$ के अनुसार नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Nuclear Binding Energy) में परिवर्तित होती है।
3. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में यूरेनियम-235 पर जब एक धीमा न्यूट्रॉन आघात करता है, तो यह अस्थिर यूरेनियम-236 बनाता है जो लगभग समान आकार के दो छोटे नाभिकों में टूट जाता है, तथा इस प्रक्रिया में प्रति विखंडन औसत रूप से 2 से 3 तीव्र न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
4. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च तापमान और दाब पर चार हाइड्रोजन नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और इस संलयन प्रक्रिया के दौरान द्रव्यमान में होने वाली मामूली क्षति ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत परिपथों और किर्चॉफ के नियमों (Kirchhoff's Rules) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप (Closed loop) में कुल विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. जब एक ही मान के आंतरिक प्रतिरोध वाले कई सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में काफी कम हो जाता है, और यह संयोजन तब अत्यधिक उपयोगी होता है जब बाह्य प्रतिरोध का मान आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक होता है।
4. किसी Wheatstone Bridge के संतुलन की स्थिति में, गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, और यह विधि अज्ञात प्रतिरोध को अत्यधिक यथार्थता के साथ मापने के लिए उपयोग की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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तरलों के यांत्रिकी गुणों और उनके व्यवहार—विशेषकर पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) अणुओं के बीच प्रभावी संसंजक बलों (Cohesive forces) के कारण उत्पन्न होता है, और जब किसी द्रव में कोई अल्प विलेय अशुद्धि जैसे सर्फेक्टेंट मिलाई जाती है, तो यह पृष्ठ को आंशिक रूप से ढंककर द्रव के पृष्ठ तनाव को काफी हद तक कम कर देती है।
2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्रवों में आंतरिक घर्षण का माप है, और जहाँ गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है, वहीं द्रवों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है क्योंकि उच्च तापमान पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से संसंजक बल मजबूत हो जाते हैं।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र (Centre of gravity) पर कार्य करता है, न कि डूबे हुए भाग के द्रव्यमान केंद्र पर।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में विटामिन K की कमी के परिणामस्वरूप निम्नलिखित में से किस कारक पर सबसे सीधा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न सर्किटConfigurations के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों का तापमान बढ़ाने पर उनकी प्रतिरोधकता बढ़ती है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) के मामले में तापमान बढ़ाने पर प्रतिरोधकता घटती है।
2. जब विभिन्न प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से अधिक होता है, और प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर भिन्न-भिन्न होता है।
3. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) एक ऐसा विद्युत परिपथ है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत यथार्थता से मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
4. घरेलू विद्युत वायरिंग में सभी विद्युत उपकरणों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है, ताकि यदि एक उपकरण खराब हो जाए या बंद कर दिया जाए, तो अन्य उपकरणों के कार्य पर कोई प्रभाव न पड़े और सभी को समान कार्यशील वोल्टेज मिल सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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