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General Science
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गोलीय दर्पणों और लेंसों से संबंधित प्रकाशकीय परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण (Concave mirror) के वक्रता केंद्र (Centre of curvature) पर रखा जाता है, तो बनने वाली वास्तविक और उल्टे प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल बराबर होता है, और इस स्थिति में दर्पण की रेखीय आवर्धन क्षमता (Linear magnification) का मान -1 होता है।
  2. 2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब पानी (अपवर्तनांक = 1.33) में डुबोया जाता है, तो हवा की तुलना में इसका अपवर्तनांक कम हो जाने के कारण इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है और इसकी अभिसारी (Converging) क्षमता कमजोर हो जाती है।
  3. 3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है और आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए, जबकि अपवर्तन कोण हमेशा 90 डिग्री से अधिक होता है।
  4. 4. वाहनों में पश्च-दृश्य (Rear-view) दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह हमेशा वस्तु का सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे चालकों को पीछे के एक विस्तृत क्षेत्र का स्पष्ट दृश्य प्राप्त होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र पर रखा जाता है, तो उसका वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब वक्रता केंद्र पर ही बनता है, जिसका आकार वस्तु के ठीक बराबर होता है। इसके लिए रेखीय आवर्धन $m = -v/u = -1$ होता है। कथन 2 गलत है: जब किसी उत्तल लेंस को पानी में डुबोया जाता है, तो लेंस और उसके चारों ओर के माध्यम (पानी) के अपवर्तनांकों का अंतर कम हो जाता है, जिससे लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और इसकी अभिसारी क्षमता (क्षमता = 1/f) कम हो जाती है, किंतु यह पानी में भी उत्तल लेंस (अभिसारी) की तरह ही व्यवहार करता है (यह अवतल नहीं बनता)। कथन 3 गलत है क्योंकि पूर्ण आंतरिक परावर्तन के दौरान, जब आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होता है, तो किरण उसी माध्यम में परावर्तित हो जाती है और अपवर्तन कोण 90 डिग्री से अधिक नहीं होता बल्कि अपवर्तन होता ही नहीं है। कथन 4 सही है क्योंकि उत्तल दर्पण का उपयोग पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में किया जाता है क्योंकि इसका दृष्टि क्षेत्र विस्तृत होता है और यह हमेशा सीधा व छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
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