BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
10 views

कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता की स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) पृथ्वी की त्रिज्या ($R$) और गुरुत्वीय त्वरण ($g$) पर निर्भर करती है और यह उपग्रह के द्रव्यमान पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती है, जिसका अर्थ है कि भिन्न-भिन्न द्रव्यमान के उपग्रह भी यदि समान कक्षा में हों तो उनकी चाल समान होगी।
  2. 2. यदि पृथ्वी की सतह के बहुत समीप परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह की कक्षीय चाल को उसके वर्तमान मान से अचानक $\sqrt{2}$ गुना (या लगभग 41%) बढ़ा दिया जाए, तो वह उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर जाएगा और पलायन कर जाएगा।
  3. 3. पृथ्वी के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में परिक्रमा कर रहे उपग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, क्योंकि पृथ्वी द्वारा उपग्रह पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल एक केंद्रीय बल है जिसके कारण केंद्र के परितः बल आघूर्ण (Torque) शून्य होता है।
  4. 4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को 'भारहीनता' (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं, जिससे यात्री द्वारा फर्श पर लगने वाला अभिलंब बल शून्य हो जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। कृत्रिम उपग्रहों की गति और यांत्रिकी के अनुसार, उपग्रह की कक्षीय चाल $v_o = \sqrt{gR}$ होती है जो उसके अपने द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। जब कक्षीय चाल में $\sqrt{2}$ से गुणा किया जाता है, तो वह पलायन वेग (Escape Velocity) बन जाती है। केंद्रीय बल होने के कारण कोणीय संवेग हमेशा संरक्षित रहता है और मुक्त पतन के कारण भारहीनता महसूस होती है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रियाविधि और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये स्थल पर जीवित रह सकते हैं, किंतु लैंगिक जनन के लिए इन्हें जल की अनिवार्यता होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रकाश संश्लेषण करता है। 2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य होती है, जिसका प्रमुख कारण यह है कि इनमें प्राथमिक $ ext{CO}_2$ स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में PEP carboxylase द्वारा होता है, जो ऑक्सीजन के प्रति उच्च आत्मीयता रखता है और रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम को उच्च $ ext{CO}_2$ सांद्रता वाले बंडल शीथ कोशिकाओं में सुरक्षित रखता है। 3. 'एब्सिसिक एसिड' (Abscisic Acid - ABA) एक तनाव हार्मोन है जो पौधों में जल की कमी के समय रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है, तथा यह जिबरेलिन (Gibberellin) के विपरीत कार्य करते हुए बीज प्रसुप्तन (Seed dormancy) को बढ़ावा देता है और पत्तियों के विलगन (Abscission) को रोकता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनवन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम का पालन करने वाले आदर्श विलयनों के लिए विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है। 2. वांट हॉफ गुणांक ($i$) का मान उन विलयनों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय माध्यम में वियोजित (Dissociation) होते हैं, जबकि संघनन (Association) दर्शाने वाले विलेय के लिए इसका मान एक से कम होता है। 3. विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis) के 'अधिशोषण सिद्धांत' के अनुसार, अभिकारक अणु उत्प्रेरक की सतह पर आकर भौतिक या रासायनिक रूप से अधिशोषित होते हैं, जिससे उनकी सतह पर सक्रिय ऊर्जा (Activation energy) का मान बढ़ जाता है और अभिक्रिया की दर मंद हो जाती है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) प्रतिमान का पालन करता है, जिसमें उत्प्रेरक की विशिष्ट ज्यामितीय संरचना केवल विशिष्ट सबस्ट्रेट अणुओं को ही उनके सक्रिय स्थलों पर जुड़ने की अनुमति देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? आनुवंशिक कोड क्या है? ऊर्जा संरक्षण? तरलों के यांत्रिकी गुणों और उनके व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) अणुओं के बीच प्रभावी संसंजक बलों (Cohesive forces) के कारण उत्पन्न होता है, और जब किसी द्रव में कोई अल्प विलेय अशुद्धि मिलाई जाती है, तो सामान्यतः द्रव का पृष्ठ तनाव घट जाता है, जबकि तापमान क्रांतिक ताप (Critical temperature) तक पहुँचने पर शून्य हो जाता है। 2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्रवों में आंतरिक घर्षण का माप है, और गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है, जबकि द्रवों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है क्योंकि द्रवों में संसंजक बल तापमान बढ़ने पर कमजोर हो जाते हैं। 3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, उत्प्लावन बल (Buoyant force) का परिमाण विस्थापित तरल के भार के बराबर होता है, और यह बल हमेशा डूबे हुए भाग के द्रव्यमान केंद्र (Centre of mass) पर कार्य करता है, न कि विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र पर। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.