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General Science
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और प्लाज्मा प्रोटीन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्लाज्मा में पाई जाने वाली 'फाइब्रिनोजेन' (Fibrinogen) प्रोटीन यकृत द्वारा संश्लेषित होती है और यह रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेती है, जबकि 'एल्ब्यूमिन' (Albumin) रक्त के ऑस्मोटिक दाब (Colloidal osmotic pressure) को बनाए रखने का कार्य करती है।
- 2. जब किसी व्यक्ति को 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस' (Erythroblastosis fetalis) जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो यह विसंगति Rh-धनात्मक माता और Rh-ऋणात्मक पिता के गर्भधारण के समय उत्पन्न होती है, जिससे भ्रूण की लाल रक्त कणिकाएँ नष्ट होने लगती हैं।
- 3. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया के दौरान, सक्रिय 'थ्रोम्बिन' एंजाइम घुलनशील 'फाइब्रिनोजेन' को अघुलनशील 'फाइब्रिन' तंतुओं में परिवर्तित करता है, जो रक्त कोशिकाओं को फंसाकर थक्का बनाते हैं।
- 4. रक्त समूह 'O' (नेगेटिव) को 'सर्वदाता' (Universal donor) माना जाता है क्योंकि इसकी लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर A, B और Rh तीनों प्रकार के प्रतिजन (Antigens) पूर्ण रूप से अनुपस्थित होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि प्लाज्मा प्रोटीन जैसे एल्ब्यूमिन और फाइब्रिनोजेन यकृत द्वारा निर्मित होती हैं, जहाँ एल्ब्यूमिन परासरणी दाब नियंत्रित करती है। कथन 2 गलत है क्योंकि एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस की समस्या Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता के संयोग से होने वाली संतान में उत्पन्न होती है, न कि विपरीत स्थिति में। कथन 3 सही है क्योंकि थ्रोम्बिन फाइब्रिनोजेन को फाइब्रिन में बदलता है। कथन 4 गलत है क्योंकि रक्त समूह O- में केवल प्रतिजन नहीं होते, लेकिन यह परिभाषा RBC की सतह के आधार पर दी जाती है, तथापि एंटीबॉडी और अन्य कारकों की जटिलता के कारण केवल O- को ही पूर्ण सर्वदाता माना जाता है (विकल्प 2 के गलत होने से सही उत्तर 1 और 3 है)। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों, उनके सूक्ष्मजीवितीय कारकों तथा नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षय रोग (Tuberculosis) के निदान के लिए किया जाने वाला 'मोंटौक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण (Skin test) है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के विरुद्ध सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी की उपस्थिति को दर्शाता है, किंतु यह सक्रिय संक्रमण और पूर्व टीकाकरण या पुरानी ठीक हो चुकी संक्रमण के बीच भेद करने में विफल रहता है।
2. एड्स (AIDS) के संपुष्टि (Confirmatory) परीक्षण के रूप में 'वेस्टर्न ब्लॉट' (Western blot) विधि का उपयोग किया जाता है, जिसमें वायरल प्रोटीन्स को जेल वैद्युतकणसंचलन (Gel electrophoresis) द्वारा अलग करके रोगी के सीरम में मौजूद विशिष्ट एंटीबॉडीज़ की पहचान की जाती है,
3. एन्टामोएबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) एक परजीवी प्रोटोजोआ है जो मनुष्य की बड़ी आंत में संक्रमण फैलाकर 'अमीबायसिस' या अमीबी पेचिश उत्पन्न करता है, और इसके गंभीर मामलों में यह आंतों की दीवार को भेदकर यकृत (Liver) में गंभीर फोड़ा (Liver abscess) भी बना सकता है।
4. टाइफाइड बुखार के परीक्षण के लिए प्रयुक्त 'विडाल परीक्षण' (Widal test) एक प्रतिजन-प्रतिपिंड (Antigen-Antibody) प्रतिक्रिया पर आधारित एग्लूटीनेशन परीक्षण है, जो 'साल्मोनेला टाइफी' के 'O' और 'H' एंटीजेंस का पता लगाता है, और संक्रमण के पहले सप्ताह में इसकी संवेदनशीलता शत-प्रतिशत सटीक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, जो राउल्ट के नियम का एक अणुसंख्यक गुणधर्म है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए हमेशा एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से संघनित (Association) हो जाते हैं, क्योंकि अणुओं के जुड़ने से कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) के मान को बदल देते हैं।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके संरूपण और ईंधनों के दहन तथा ऑक्टेन गुणवत्ता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) के शाखित श्रृंखला (Branched-chain) वाले समवयस्क, सीधी श्रृंखला (Straight-chain) वाले समवयस्क की तुलना में कम ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि शाखित संरचनाओं में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता कम होती है।
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जैसे एल्कीन्स (Alkenes) में द्विबंध ($C=C$) की उपस्थिति के कारण ये इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षित होने वाले अभिक अभिकर्मकों के साथ आसानी से योगशील अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
3. 'एंटी-मार्कोनीकॉव नियम' (Anti-Markovnikov's rule) या परॉक्साइड प्रभाव केवल हाइड्रोजन ब्रोमाइड ($HBr$) के साथ ही लागू होता है, जबकि हाइड्रोजन क्लोराइड ($HCl$) और हाइड्रोजन आयोडाइड ($HI$) के साथ यह प्रभाव इसलिए नहीं देखा जाता क्योंकि $HCl$ का आबंध विदलन ऊर्जा बहुत अधिक होती है और $HI$ का बना मध्यवर्ती मुक्त मूलक अत्यधिक अस्थिर होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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लाल रक्त कण कहाँ बनते हैं?
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भौतिक राशियों की विमाओं (Dimensions) और उनके एसआई मात्रकों (SI Units) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सार्वत्रिक गैस स्थिरांक' (Universal Gas Constant, R) की विमा $[ML^2T^{-2}K^{-1}mol^{-1}]$ होती है, और इसका एसआई मात्रक जूल प्रति केल्विन प्रति मोल ($J\,K^{-1}\,mol^{-1}$) है।
2. 'प्लांक स्थिरांक' (Planck's Constant, h) की विमा वही होती है जो 'कोणीय संवेग' (Angular Momentum) की विमा होती है, अर्थात $[ML^2T^{-1}]$, और इसका मात्रक जूल-सेकंड ($J\cdot s$) है।
3. 'पृष्ठ तनाव' (Surface Tension) का एसआई मात्रक न्यूटन प्रति मीटर ($N/m$) है, किंतु इसकी विमीय सूत्र को व्यक्त करते समय समय की घात ($T$) धनात्मक रूप में $[T^2]$ होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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