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General Science
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके संरूपण और ईंधनों के दहन तथा ऑक्टेन गुणवत्ता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल्केन्स (Alkanes) के शाखित श्रृंखला (Branched-chain) वाले समवयस्क, सीधी श्रृंखला (Straight-chain) वाले समवयस्क की तुलना में कम ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि शाखित संरचनाओं में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता कम होती है।
- 2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जैसे एल्कीन्स (Alkenes) में द्विबंध ($C=C$) की उपस्थिति के कारण ये इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षित होने वाले अभिक अभिकर्मकों के साथ आसानी से योगशील अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
- 3. 'एंटी-मार्कोनीकॉव नियम' (Anti-Markovnikov's rule) या परॉक्साइड प्रभाव केवल हाइड्रोजन ब्रोमाइड ($HBr$) के साथ ही लागू होता है, जबकि हाइड्रोजन क्लोराइड ($HCl$) और हाइड्रोजन आयोडाइड ($HI$) के साथ यह प्रभाव इसलिए नहीं देखा जाता क्योंकि $HCl$ का आबंध विदलन ऊर्जा बहुत अधिक होती है और $HI$ का बना मध्यवर्ती मुक्त मूलक अत्यधिक अस्थिर होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि एल्केन्स के शाखित श्रृंखला वाले समवयस्क सीधी श्रृंखला वाले समवयस्क की तुलना में अधिक ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं। शाखित संरचनाओं में इंजन के अंदर स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता अधिक होती है, जिससे दहन सुचारू रूप से होता है (उदाहरण के लिए, आइसो-ऑक्टेन की ऑक्टेन संख्या 100 मानी जाती है)। कथन 2 सही है, क्योंकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन और एल्काइन) में पाई-बंध ($π$-bond) के ढीले इलेक्ट्रॉनों के कारण ये इलेक्ट्रॉनस्नेही योगशील अभिक्रियाएँ (Electrophilic addition reactions) आसानी से देते हैं। इसके विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। कथन 3 भी सही है; परॉक्साइड प्रभाव (खराश प्रभाव) केवल $HBr$ के योग में ही सफलतापूर्वक काम करता है, जबकि $HCl$ का आबंध टूटना ऊष्माक्षेपी नहीं होता और $HI$ के मामले में बना आयोडीन मुक्त मूलक आपस में मिलकर आयोडीन अणु बना लेता है, जिससे यह अभिक्रिया प्रतिवर्ती हो जाती है।
Related Questions
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनावृतबीजी (Gymnosperms) पौधों में बीज नग्न होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय (Ovary) का अभाव होता है, और इनका संवहन तंत्र आवृत्तबीजी पौधों की तुलना में अधिक विकसित होता है जिसमें सत्य वाहिकाएँ (Vessels) प्रमुख रूप से पाई जाती हैं।
2. C-3 पादपों (जैसे गेहूं और चावल) में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C-4 पादपों की तुलना में काफी अधिक होती है, क्योंकि RuBisCO एंजाइम कार्बोक्सीलेसन के साथ-साथ ऑक्सीजनैसन गतिविधि भी प्रदर्शित करता है, जिससे ऊर्जा का अपव्यय होता है।
3. 'ऑक्सिन' (Auxin) पादप हॉर्मोन का प्रमुख प्राकृतिक रूप इंडोल-3-एसिटिक एसिड (IAA) है, जो शीर्ष प्रमुखता (Apical dominance) के लिए उत्तरदायी है और पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को संदमित (Inhibit) करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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रेगिस्तानी ओक?
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शुद्ध सोना कितने कैरेट का होता है?
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तरलों के यांत्रिकी गुणों और उनके व्यवहार—विशेषकर पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) अणुओं के बीच प्रभावी संसंजक बलों (Cohesive forces) के कारण उत्पन्न होता है, और जब किसी द्रव में कोई अल्प विलेय अशुद्धि जैसे सर्फेक्टेंट मिलाई जाती है, तो यह पृष्ठ को आंशिक रूप से ढंककर द्रव के पृष्ठ तनाव को काफी हद तक कम कर देती है।
2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्रवों में आंतरिक घर्षण का माप है, और जहाँ गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है, वहीं द्रवों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है क्योंकि उच्च तापमान पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से संसंजक बल मजबूत हो जाते हैं।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र (Centre of gravity) पर कार्य करता है, न कि डूबे हुए भाग के द्रव्यमान केंद्र पर।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार का प्रतिरोध ($R$) उसकी लंबाई ($l$) के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता ($
ho$) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, उसके आयामों पर नहीं।
2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (लूप नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग लागू किए गए कुल विद्युत वाहक बल (EMF) के बराबर होता है।
4. श्रेणीक्रम (Series combination) में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है, और इस संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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