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General Science
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों, उनके सूक्ष्मजीवितीय कारकों तथा नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्षय रोग (Tuberculosis) के निदान के लिए किया जाने वाला 'मोंटौक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण (Skin test) है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के विरुद्ध सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी की उपस्थिति को दर्शाता है, किंतु यह सक्रिय संक्रमण और पूर्व टीकाकरण या पुरानी ठीक हो चुकी संक्रमण के बीच भेद करने में विफल रहता है।
- 2. एड्स (AIDS) के संपुष्टि (Confirmatory) परीक्षण के रूप में 'वेस्टर्न ब्लॉट' (Western blot) विधि का उपयोग किया जाता है, जिसमें वायरल प्रोटीन्स को जेल वैद्युतकणसंचलन (Gel electrophoresis) द्वारा अलग करके रोगी के सीरम में मौजूद विशिष्ट एंटीबॉडीज़ की पहचान की जाती है,
- 3. एन्टामोएबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) एक परजीवी प्रोटोजोआ है जो मनुष्य की बड़ी आंत में संक्रमण फैलाकर 'अमीबायसिस' या अमीबी पेचिश उत्पन्न करता है, और इसके गंभीर मामलों में यह आंतों की दीवार को भेदकर यकृत (Liver) में गंभीर फोड़ा (Liver abscess) भी बना सकता है।
- 4. टाइफाइड बुखार के परीक्षण के लिए प्रयुक्त 'विडाल परीक्षण' (Widal test) एक प्रतिजन-प्रतिपिंड (Antigen-Antibody) प्रतिक्रिया पर आधारित एग्लूटीनेशन परीक्षण है, जो 'साल्मोनेला टाइफी' के 'O' और 'H' एंटीजेंस का पता लगाता है, और संक्रमण के पहले सप्ताह में इसकी संवेदनशीलता शत-प्रतिशत सटीक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव रोगों और उनके निदान के संदर्भ में कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है। विडाल परीक्षण (Widal test) टाइफाइड के निदान के लिए किया जाता है, किंतु संक्रमण के पहले सप्ताह में इसकी संवेदनशीलता (Sensitivity) कम होती है और यह अक्सर गलत सकारात्मक (False positive) परिणाम भी दे सकता है क्योंकि यह अन्य साल्मोनेला प्रजातियों या टीकाकरण के साथ क्रॉस-रिएक्शन कर सकता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी जीवाणु के कारण होता है।
Related Questions
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परावर्तन?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि प्रत्येक स्थिति में इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर ऊर्जा का निष्कासन होता है।
2. आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी के मान में सामान्यतः कमी आती है, किंतु 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी उनके ठीक ऊपर की 4d श्रेणी के तत्वों की तुलना में अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण 'लैंथेनाइड संकुचन' है।
3. पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक (4.0) होती है, लेकिन इसकी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में कम होता है।
4. किसी तत्व की धात्विक प्रकृति आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश घट जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत परिपथों और चालकों के विद्युत गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धात्विक चालक का विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है और तापमान में वृद्धि होने पर धात्विक चालकों का प्रतिरोध बढ़ जाता है क्योंकि मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत विश्राम काल (Relaxation time) घट जाता है।
2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (पाश नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप में कुल विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग उस लूप के विभिन्न भागों में उत्पन्न विभवांतरों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
3. जब कई प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से कम होता है, और परिपथ की कुल धारा व्यक्तिगत धाराओं के योग के बराबर होती है।
4. एक आदर्श अमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत होना चाहिए ताकि वह जिस श्रेणीक्रम में जोड़ा जाए, उससे अधिकतम धारा प्रवाहित हो सके और वह धारा का यथार्थ मापन कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके रासायनिक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, हालांकि ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है क्योंकि नाइट्रोजन में अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व पाया जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी तत्वों के लिए हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन ही होता है, चाहे उस परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास या आकार कुछ भी हो।
3. हैलोजन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में अधिक (अधिक ऋणात्मक) होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है जिसके कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक बल का मान कम हो जाता है।
4. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid contraction) के कारण $5d$ श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम, $Hf$) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित $4d$ श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, $Zr$) के लगभग बराबर हो जाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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दृष्टि दोष मायोपिया को ठीक करने के लिए कौन सा लेंस उपयोग होता है?
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