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General Science
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मानव रक्त परिसंचरण और रुधिर प्लाज्मा प्रोटीन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रुधिर प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्रमुख प्रोटीनों में 'फाइब्रिनोजेन' रक्त का थक्का जमाने में मदद करता है, 'ग्लोबुलिन' मुख्य रूप से शरीर की रक्षा तंत्र (प्रतिरक्षा) के लिए उत्तरदायी होता है, और 'एल्ब्यूमिन' शरीर के परासरणी संतुलन (Osmotic balance) को बनाए रखता है।
- 2. वयस्कों में एरिथ्रोपोएसिस (लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण) मुख्य रूप से लाल अस्थिमज्जा में होता है, तथा वृद्धावस्था में नष्ट होने वाली आरबीसी का मुख्य विघटन स्थल 'प्लीहा' (Spleen) को माना जाता है, जिसे 'आरबीसी का कब्रिस्तान' भी कहा जाता है।
- 3. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) के दौरान सक्रिय 'थ्रॉम्बिन' एंजाइम घुलनशील फाइब्रिनोजेन प्रोटीन को अघुलनशील फाइब्रिन monomers में परिवर्तित करता है, जो आगे चलकर Ca$^{2+}$ आयनों और 'कारक XIII' की उपस्थिति में एक मजबूत, जाल जैसी संरचना बनाकर थक्का को स्थायी रूप देते हैं।
- 4. मानव हृदय का पेसमेकर 'सिनोएट्रियल नोड' (SAN) कहलाता है, जो दाहिने आलिंद के ऊपरी कोने पर स्थित होता है और यह स्वतः उत्तेजना (Autorhythmicity) उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जिससे हृदय की संकुचन दर नियंत्रित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। मानव रक्त परिसंचरण तंत्र में रुधिर प्लाज्मा, रुधिर कणिकाओं और हृदय की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण योगदान होता है। प्लाज्मा प्रोटीन्स (फाइब्रिनोजेन, ग्लोबुलिन और एल्ब्यूमिन) अपने विशिष्ट कार्यों जैसे स्कंदन, प्रतिरक्षा और परासरणी नियंत्रण को निभाते हैं। लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण और उनके विघटन (प्लीहा में) से जुड़ी प्रक्रियाएँ शरीर की जीवन प्रक्रियाओं का आधार हैं। स्कंदन पथ में थ्रॉम्बिन की भूमिका और साइनोएट्रियल नोड (SAN) द्वारा हृदय की धड़कन की शुरुआत जैविक नियंत्रण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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ऊष्मागतिकी के नियमों और तापमापी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह स्पष्ट करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी (Platinum Resistance Thermometer) विद्युत प्रतिरोध के तापमान के साथ रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका उपयोग बहुत कम तापमान (-200°C से नीचे) से लेकर उच्च तापमान (लगभग 1200°C) तक के सटीक मापन के लिए किया जाता है।
3. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water) वह विशिष्ट तापमान और दाब है जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में तापीय साम्य में होते हैं, और केल्विन पैमाने पर इसका मान 273.16 K और 0.0061 атмосфер (atm) होता है।
4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का विनिमय शून्य होता है, जिसके कारण यदि किसी गैस का अचानक संपीडन किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घट जाती है और ताप में गिरावट आती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन और अम्लीय-क्षारीय प्रणालियों (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी अवधारणा के अनुसार, अम्ल वे रासायनिक प्रजातियाँ हैं जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करने की प्रवृत्ति रखती हैं, तथा किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) हमेशा एक अत्यंत दुर्बल क्षार होता है।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकते हैं (इलेक्ट्रॉन-न्यून), जबकि लुईस क्षार वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करने की क्षमता रखते हैं, जैसे कि अमोनिया ($NH_3$)।
3. पॉलीप्रोटिक अम्लों (जैसे ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल $H_3PO_4$) के क्रमिक आयनन स्थिरांकों का मान घटता जाता है, अर्थात प्रथम वियोजन स्थिरांक ($K_{a1}$) का मान द्वितीय वियोजन स्थिरांक ($K_{a2}$) से अधिक होता है।
4. किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट) का जलीय विलयन जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का होता है, क्योंकि इसमें ऋणायन का जल-अपघटन होता है जिससे हाइड्रोजन आयन ($H^+$) मुक्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) में कार्बन परमाणु आपस में एकल बंध द्वारा जुड़े होते हैं और इनका सामान्य सूत्र $C_n{H_{2n+2}}$ होता है, जो प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं (Substitution reactions) में आसानी से भाग लेते हैं।
2. जब पेट्रोलियम का आंशिक आसवन (Fractional Distillation) किया जाता है, तो उच्च क्वथनांक वाले अंश सबसे पहले वाष्पित होकर ऊपर उठते हैं, जबकि निम्न क्वथनांक वाले भारी अंश (जैसे डामर या बिटुमिन) सबसे नीचे अवशेष के रूप में प्राप्त होते हैं।
3. ऐल्काइन्स (Alkynes) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें कम से कम एक त्रिक बंध (Triple bond) पाया जाता है, और इनका सामान्य सूत्र $C_n{H_{2n-2}}$ होता है, तथा ये योगात्मक (Addition) और अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित करते हैं।
4. गैसोलीन की गुणवत्ता का निर्धारण 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) द्वारा किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन रेटिंग के लिए 'n-हेप्टेन' को सर्वोत्तम मानक माना जाता है जबकि 'आइसो-ऑक्टेन' को निकृष्ट ईंधन माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ केवल तभी सटीक रूप से लागू होता है जब आपतित किरणें मुख्य अक्ष के अत्यधिक निकट हों (जिन्हें पैरेक्सियल किरणें या Paraxial rays कहा जाता है)।
3. जब प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों कम हो जाते हैं, किंतु उसकी आवृत्ति (Frequency) अपरिवर्तित रहती है क्योंकि आवृत्ति स्रोत की विशेषता है।
4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही हो तथा आपतन कोण का मान माध्यम युग्म के क्रांतिक कोण (Critical angle) से कम होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई वस्तु एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में ऊर्ध्वाधर तल पर गति करती है (जैसे एक धागे से बंधा हुआ पत्थर), तो वृत्त के निम्नतम बिंदु पर डोरी में तनाव अधिकतम होता है, और यह तनाव उच्चतम बिंदु के तनाव से ठीक $6mg$ अधिक होता है।
2. संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किसी बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है, और ऐसे बलों के अंतर्गत कण की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) हमेशा संरक्षित रहती है।
3. प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic collision) में संवेग के साथ-साथ गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, लेकिन यदि दो वस्तुओं का संघट्ट अपूर्ण रूप से प्रत्यास्थ (Inelastic) हो, तो संवेग संरक्षित रहता है जबकि गतिज ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा या ध्वनि के रूप में नष्ट हो जाता है।
4. अपकेन्द्र बल (Centrifugal force) एक वास्तविक बल है जो जड़त्वीय निर्देश फ्रेम (Inertial frame of reference) में गति करने वाली वस्तुओं पर वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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