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General Science
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यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब कोई वस्तु एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में ऊर्ध्वाधर तल पर गति करती है (जैसे एक धागे से बंधा हुआ पत्थर), तो वृत्त के निम्नतम बिंदु पर डोरी में तनाव अधिकतम होता है, और यह तनाव उच्चतम बिंदु के तनाव से ठीक $6mg$ अधिक होता है।
  2. 2. संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किसी बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है, और ऐसे बलों के अंतर्गत कण की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) हमेशा संरक्षित रहती है।
  3. 3. प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic collision) में संवेग के साथ-साथ गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, लेकिन यदि दो वस्तुओं का संघट्ट अपूर्ण रूप से प्रत्यास्थ (Inelastic) हो, तो संवेग संरक्षित रहता है जबकि गतिज ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा या ध्वनि के रूप में नष्ट हो जाता है।
  4. 4. अपकेन्द्र बल (Centrifugal force) एक वास्तविक बल है जो जड़त्वीय निर्देश फ्रेम (Inertial frame of reference) में गति करने वाली वस्तुओं पर वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि ऊर्ध्वाधर वृत्त (Vertical circle) में गति करते समय निम्नतम बिंदु और उच्चतम बिंदु पर तनाव का अंतर $6mg$ नहीं, बल्कि $6mg$ होता है लेकिन सही अंतर $T_{lower} - T_{upper} = 6mg$ तब होता है जब स्ट्रिंग की लंबाई और वेग के समीकरण को सही से हल किया जाए (वास्तव में अंतर $6mg$ होता है, परंतु यहाँ कथन की सूक्ष्म तकनीकी यह है कि यह अंतर $6mg$ नहीं बल्कि $6mg$ के बराबर ही होता है; अधिक सटीक रूप से $T_1 - T_2 = 6mg$ सही है, लेकिन आइए इसके चौथे कथन को देखें)। कथन 4 पूरी तरह गलत है क्योंकि अपकेन्द्र बल (Centrifugal force) एक 'छद्म बल' या 'आभासी बल' (Pseudo force) है जो अजड़त्वीय निर्देश फ्रेम (Non-inertial frame of reference) में कार्य करता है, न कि जड़त्वीय फ्रेम में। इसके विपरीत, संरक्षी बलों के अंतर्गत यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण होता है और बंद पथ में कार्य शून्य होता है, तथा प्रत्यास्थ व अपूर्ण प्रत्यास्थ संघट्टों में संवेग हमेशा संरक्षित रहता है। यांत्रिकी के इन मूलभूत सिद्धांतों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। अत: केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
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