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General Science
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों और उत्प्रेरण (Catalysis) की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, जो कि राऊल्ट के नियम का सीधा अनुप्रयोग है।
- 2. 'वांट-हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के वियोजन की स्थिति में एक से अधिक ($i > 1$) होता है, जबकि संगुणन की स्थिति में इसका मान एक से कम ($i < 1$) होता है।
- 3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, और इस प्रक्रम का मुख्य चरण उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषक (Adsorption) होता है।
- 4. 'धनात्मक उत्प्रेरक' रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) के मान को बढ़ा देता है, जिससे अभिक्रिया की दर तीव्र हो जाती है और साम्यावस्था का मान भी बदल जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कथन 1 के अनुसार, राऊल्ट के नियमानुसार अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि वियोजन (Dissociation) पर कणों की संख्या बढ़ने से वांट-हॉफ गुणांक $i > 1$ होता है और संगुणन (Association) पर यह $i < 1$ होता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विषमांगी उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक अलग-अलग भौतिक अवस्थाओं में होते हैं तथा सतह पर अधिशोषण मुख्य क्रियाविधि है। कथन 4 असत्य है क्योंकि उत्प्रेरक (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) कभी भी साम्यावस्था के मान को नहीं बदलता है, बल्कि यह केवल सक्रियण ऊर्जा को घटाकर (धनात्मक उत्प्रेरक) या बढ़ाकर अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करता है। विकिपीडिया संदर्भ
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार सिद्धांतों (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस संकल्पना के अनुसार, वे सभी स्पीशीज जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) प्रदान करने की क्षमता रखती हैं, लुईस क्षार कहलाती हैं, और सभी ऋणावेशित आयन तथा अमोनिया ($NH_3$) इस श्रेणी के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार, किसी दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) हमेशा एक प्रबल क्षार होता है, जबकि प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल या उदासीन प्रवृत्ति का होता है।
3. जब किसी प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बने लवण (जैसे अमोनियम क्लोराइड - $NH_4Cl$) का जलीय अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति अम्लीय होती है और इसका pH मान 7 से कम होता है।
4. जल के आयनिक गुणनफल ($K_w$) का मान तापमान पर निर्भर करता है; तापमान बढ़ाने पर जल का स्व-आयनन (Self-ionization) बढ़ जाता है, जिसके कारण शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, किंतु जल अभी भी अम्लीय हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Chemical Bonding, Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार (Lewis base) इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
2. 'ब्रोन्स्टेड-लॉरी' (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, एक अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करता है, और जब कोई अम्ल अपना प्रोटॉन त्याग देता है, तो जो प्रजाति बनती है उसे उस अम्ल का 'संयुग्मी क्षार' (Conjugate base) कहा जाता है।
3. जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) तापमान पर निर्भर करता है, और जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होती है, शुद्ध जल का $pH$ मान 7 से बढ़कर अधिक हो जाता है जिससे जल क्षारीय प्रकृति का हो जाता है।
4. सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$) का जलीय विलयन जल-अपघटन (Hydrolysis) के कारण क्षारीय प्रकृति का होता है, क्योंकि इसमें दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार का लवण होने के कारण हाइड्रॉक्साइड आयनों ($OH^-$) की सांद्रता हाइड्रोजन आयनों से अधिक हो जाती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और प्रत्यावर्ती धारा परिपथों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जो स्वयं उसकी उत्पत्ति करता है।
3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का मात्रक 'हेनरी' है, और किसी लंबी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व उसके क्रॉस्सेक्शन क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती तथा उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है।
4. एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक और द्वितीयक कुंडली के बीच शक्ति का कोई क्षय नहीं होता है, तथा स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप निर्गत धारा का मान भी निवेशी धारा की तुलना में बढ़ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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