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General Science
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने यह सिद्ध किया कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और उसका धनात्मक आवेश उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में केंद्रित होता है, जिसे 'नाभिक' (Nucleus) कहा जाता है।
  2. 2. नील्स बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं विशिष्ट वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, अर्थात् $L = \frac{nh}{2\pi}$।
  3. 3. डी ब्रोग्ली की परिकल्पना के अनुसार, गतिमान इलेक्ट्रॉनों सहित सभी द्रव्य कण तरंग-कण द्वैतता (Wave-particle duality) प्रदर्शित करते हैं, और उनकी तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{mv}$ द्वारा दी जाती है।
  4. 4. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, एक ही समय में किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का यथार्थ निर्धारण किया जा सकता है, बशर्ते माप के उपकरण पूर्ण रूप से शून्य त्रुटि वाले हों।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग से यह ज्ञात हुआ कि परमाणु का केंद्र अत्यंत सघन और धनात्मक आवेशित है जिसे नाभिक कहा जाता है। कथन 2 सही है: बोर मॉडल के अनुसार, स्थिर कक्षाएं वे होती हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग $h/2\pi$ का पूर्ण गुणज होता है। कथन 3 सही है: डी ब्रोग्ली ने द्रव्य की द्वैत प्रकृति को प्रतिपादित किया था, जहाँ $\lambda = h/p$ होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि किसी कण की स्थिति और संवेग दोनों का एक साथ पूर्ण यथार्थता के साथ निर्धारण करना सैद्धांतिक रूप से असंभव है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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