त्वरित लिंक्स
General Science
10 views
प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों और उनके अपवर्तनांक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति बदल जाती है और वह अभिसारी (Converging) के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
- 2. लेंस की क्षमता (Power of a Lens) उसकी फोकस दूरी के मीटर में व्यक्त मान का व्युत्क्रम होती है, और इसका मात्रक डायोप्टर (Diopter) होता है, जो कि एक धनात्मक या ऋणात्मक मान हो सकता है।
- 3. जब किसी लेंस को एक माध्यम से दूसरे माध्यम में ले जाया जाता है, तो माध्यम बदलने पर लेंस की फोकस दूरी और उसकी क्षमता दोनों अपरिवर्तित रहती हैं क्योंकि यह केवल लेंस की वक्रता त्रिज्या पर निर्भर करती है।
- 4. संपर्क में रखे दो पतلاف (thin) लेंसों की संयुक्त फोकस दूरी का व्युत्क्रम अलग-अलग लेंसों की फोकस दूरियों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है, यानी $rac{1}{F} = rac{1}{f_1} + rac{1}{f_2}$।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: लेंस निर्माता सूत्र के अनुसार, यदि लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाए जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ से अधिक हो, तो फोकल लंबाई का चिह्न बदल जाता है और अभिसारी लेंस अपसारी की तरह व्यवहार करता है। कथन 2 सही है: लेंस की क्षमता $P = 1/f$ (मीटर में) होती है और इसका मात्रक डायोप्टर है। कथन 3 गलत है क्योंकि लेंस की फोकस दूरी लेंस के पदार्थ और उसके चारों ओर के माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है, अतः माध्यम बदलने पर फोकस दूरी और क्षमता बदल जाती है। कथन 4 सही है: संपर्क में रखे दो पतले लेंसों की संयुक्त क्षमता या फोकस दूरी का सूत्र $rac{1}{F} = rac{1}{f_1} + rac{1}{f_2}$ होता है।
Related Questions
→
किसी वस्तु का भार सर्वाधिक कहाँ होता है?
→
कार्बनिक रसायन के अंतर्गत हाइड्रोकार्बन और ईंधनों के रासायनिक गुणों तथा उनके संरचनात्मक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) में सभी कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित होते हैं और ये मुक्त मूलक halogenation (हैलोजनीकरण) अभिक्रियाओं के प्रति उच्च प्रतिक्रियाशीलता दर्शाते हैं, जिसमें प्रकाश की उपस्थिति में श्रृंखला संचरण (Chain propagation) का चरण ऊष्माशोषी होता है।
2. जब एथाइन (एसिटलीन) गैस को लाल तप्त लोहे की नली में 873 K ताप पर प्रवाहित किया जाता है, तो यह चक्रीय बहुलीकरण (Cyclic polymerization) के माध्यम से बेन्जीन का निर्माण करती है, जो ऐरिफ़ेटिक से एरोमैटिक यौगिक में परिवर्तन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
3. डीजल इंजनों में ईंधन के स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) के कारण उत्पन्न होने वाली 'नॉक' या अपस्फोटन (Knocking) की प्रवृत्ति को मापने के लिए 'सीटेन संख्या' (Cetane Number) का उपयोग किया जाता है, जहाँ उच्च सीटेन संख्या बेहतर प्रज्वलन गुणवत्ता को दर्शाती है।
4. पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त होने वाले केरोसिन (मिट्टी का तेल) और गैसोलीन (पेट्रोल) में, गैसोलीन की ऑक्टेन संख्या कम होती है जिसके कारण यह डीजल की तुलना में संपीडन अनुपात (Compression ratio) को सहन करने की अत्यधिक क्षमता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) के संचरण तथा ध्वनि तरंगों के गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें होती हैं जो किसी माध्यम में संपीडन (Compressions) और विरलन (Rarefactions) के रूप में संचरित होती हैं, और लाप्लास के संशोधन के अनुसार माध्यम में ध्वनि का प्रसार एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, समतापीय नहीं।
2. किसी गैस में ध्वनि की चाल माध्यम के दाब पर निर्भर करती है, अतः यदि दाब को दोगुना कर दिया जाए तो ध्वनि की चाल भी दोगुनी हो जाती है, बशर्ते तापमान स्थिर रहे।
3. अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोस पदार्थों और द्रवों की सतह पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं क्योंकि गैसों में अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear elasticity) का अभाव होता है, जिसके कारण गैसों के भीतर अनुप्रस्थ तरंगों का संचरण संभव नहीं है।
4. जब कोई ध्वनि स्रोत श्रोता की ओर गति करता है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति का बढ़ जाना 'डॉप्लर प्रभाव' (Doppler effect) कहलाता है, और यह प्रभाव प्रकाश तरंगों के साथ-साथ ध्वनि तरंगों दोनों पर लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
→
तरंग की आवृत्ति (Frequency) का मात्रक क्या है?
→
यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले 'कोशिकांगों' (Cell Organelles) की संरचना, उनके विशिष्ट कार्यों और झिल्लीगत संगठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) में 'cis' (निर्माणकारी) चेहरा आमतौर पर अंतःद्रव्यी जालिका (ER) की ओर और 'trans' (परिपक्व होने वाला) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर स्थित होता है, जहाँ यह ग्लाइकोसिलेशन (Glycosylation) और ग्लाइकोलिपिड के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है।
2. लाइसोसोम (Lysosomes) एकल झिल्ली से घिरे ऐसे पुटिकाएँ होती हैं जिनमें अम्लीय पीएच (लगभग 4.5 से 5.0) पर सक्रिय हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे कार्बोहाइड्रेटेज, लाइपेस और प्रोटीएज) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो केवल बाह्य कोशिकीय पदार्थों का ही पाचन कर सकते हैं।
3. परॉक्सीसोम (Peroxisomes) अर्ध-स्वायत्त सूक्ष्मकाय हैं जिनमें 'कैटालेज' एंजाइम पाया जाता है जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड को जल और ऑक्सीजन में विघटित करता है, और ये पादप कोशिकाओं में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की प्रक्रिया से भी जुड़े होते हैं।
4. राइबोसोम झिल्लीहीन कोशिकांग हैं, जो केवल प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म में 70S प्रकार के पाए जाते हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिकाओं में ये केवल माइटोकॉन्ड्रिया और हरित लवक के भीतर ही मौजूद होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.