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General Science
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
- 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण या परिवर्तन का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
- 3. किसी लंबी वायु-क्रोडित परिनालिका (Solenoid) का स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) उसकी लंबाई के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है और उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
- 4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) किसी चालक के भीतर परिवर्तित चुंबकीय फ्लक्स के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित चक्राकार धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत चुंबकीय ब्रेकिंग (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फैराडे के नियमानुसार प्रेरित ईएमएफ चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के समानुपाती होता है। कथन 2 सही है क्योंकि लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण का पालन करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि किसी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व $L = \mu_0 n^2 A l$ होता है, अर्थात यह अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के अनुक्रमानुपाती और लंबाई ($l$) के अनुक्रमानुपाती होता है (न कि व्युत्क्रमानुपाती)। कथन 4 सही है क्योंकि भंवर धाराएँ प्रेरण पर आधारित होती हैं और इनका उपयोग ब्रेकिंग व भट्टियों में होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोनों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइटा (Bryophyta) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि इनमें जल और स्थल दोनों की आवश्यकता होती है, और इनका मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद) होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रकाशसंश्लेषण करता है, जबकि स्पोरोफाइट आंशिक रूप से पोषण के लिए गेमेटोफाइट पर निर्भर रहता है।
2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें 'PEP कार्बोक्सिलेज' एंजाइम द्वारा प्राथमिक $CO_2$ स्थिरीकरण बंडल शीथ कोशिकाओं में होता है और रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम उच्च $CO_2$ सांद्रता वाले सूक्ष्म वातावरण में कार्य करता है।
3. ऑक्सिन (Auxin / IAA) त्रेप्तोफैन अमीनो अम्ल से संश्लेषित होने वाला हार्मोन है जो पौधे में 'शीर्ष प्रमुखता' (Apical dominance) को प्रेरित करता है, तथा पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को रोकता है, जबकि साइटोकाइनिन इस प्रभाव का विरोध करते हुए पार्श्व शाखाओं के विकास को उत्तेजित करता है।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) मुख्य रूप से आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्व संधियन (Internode elongation) को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाता है, तथा यह बीजों के अंकुरण के दौरान 'एल्यूरॉन परत' में अल्फा-एमाइलेज एंजाइम के संश्लेषण को उत्प्रेरित करके स्टार्च के अपघटन को प्रेरित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके संरूपण और ईंधनों के दहन तथा ऑक्टेन गुणवत्ता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) के शाखित श्रृंखला (Branched-chain) वाले समवयस्क, सीधी श्रृंखला (Straight-chain) वाले समवयस्क की तुलना में कम ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि शाखित संरचनाओं में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता कम होती है।
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जैसे एल्कीन्स (Alkenes) में द्विबंध ($C=C$) की उपस्थिति के कारण ये इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षित होने वाले अभिक अभिकर्मकों के साथ आसानी से योगशील अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
3. 'एंटी-मार्कोनीकॉव नियम' (Anti-Markovnikov's rule) या परॉक्साइड प्रभाव केवल हाइड्रोजन ब्रोमाइड ($HBr$) के साथ ही लागू होता है, जबकि हाइड्रोजन क्लोराइड ($HCl$) और हाइड्रोजन आयोडाइड ($HI$) के साथ यह प्रभाव इसलिए नहीं देखा जाता क्योंकि $HCl$ का आबंध विदलन ऊर्जा बहुत अधिक होती है और $HI$ का बना मध्यवर्ती मुक्त मूलक अत्यधिक अस्थिर होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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ग्रहों की गति का नियम?
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कोशिका के किस भाग को 'प्रोटीन फैक्ट्री' कहा जाता है?
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, 'बीटा-क्षय' (Beta decay) और 'इलेक्ट्रॉन कैप्चर' (Electron capture) प्रक्रियाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बीटा-ऋणात्मक ($eta^-$) क्षय के दौरान, नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो में परिवर्तित हो जाता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है।
2. इलेक्ट्रॉन कैप्चर की प्रक्रिया में, नाभिक के निकट की कक्षा (आमतौर पर K-शेल) का एक आंतरिक इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे एक प्रोटॉन न्यूट्रॉन में बदल जाता है और एक न्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है।
3. बीटा-धनात्मक ($eta^+$) क्षय और इलेक्ट्रॉन कैप्चर दोनों ही प्रक्रियाओं में मूल परमाणु का द्रव्यमान संख्या (Mass number) परिवर्तित हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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