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General Science
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, 'बीटा-क्षय' (Beta decay) और 'इलेक्ट्रॉन कैप्चर' (Electron capture) प्रक्रियाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बीटा-ऋणात्मक ($eta^-$) क्षय के दौरान, नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो में परिवर्तित हो जाता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है।
- 2. इलेक्ट्रॉन कैप्चर की प्रक्रिया में, नाभिक के निकट की कक्षा (आमतौर पर K-शेल) का एक आंतरिक इलेक्ट्रॉन नाभिक द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जिससे एक प्रोटॉन न्यूट्रॉन में बदल जाता है और एक न्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है।
- 3. बीटा-धनात्मक ($eta^+$) क्षय और इलेक्ट्रॉन कैप्चर दोनों ही प्रक्रियाओं में मूल परमाणु का द्रव्यमान संख्या (Mass number) परिवर्तित हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बीटा-ऋणात्मक ($eta^-$) क्षय में, एक न्यूट्रॉन कमजोर अंतःक्रिया (Weak interaction) के माध्यम से एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन और एक इलेक्ट्रॉन एंटीन्यूट्रिनो में विघटित होता है, जिससे परमाणु संख्या (Atomic number) में 1 की वृद्धि होती है। कथन 2 सही है: इलेक्ट्रॉन कैप्चर (Electron capture) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें परमाणु का नाभिक अपनी आंतरिक कक्षा (सामान्यतः K-शेल) से एक इलेक्ट्रॉन को ग्रहण कर लेता है, जिससे नाभिकीय प्रोटॉन एक न्यूट्रॉन में बदल जाता है और एक न्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है। कथन 3 गलत है: बीटा-धनात्मक क्षय और इलेक्ट्रॉन कैप्चर दोनों ही प्रक्रियाओं में नाभिक के भीतर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या (न्यूक्लियॉन्सम) आपस में बदलती है, लेकिन परमाणु की **द्रव्यमान संख्या (Mass number)** अपरिवर्तित रहती है, क्योंकि कुल न्यूक्लिऑन संख्या समान बनी रहती है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Related Questions
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार का प्रतिरोध ($R$) उसकी लंबाई ($l$) के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता ($
ho$) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, उसके आयामों पर नहीं।
2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (लूप नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग लागू किए गए कुल विद्युत वाहक बल (EMF) के बराबर होता है।
4. श्रेणीक्रम (Series combination) में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है, और इस संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में 'कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स' (Oral Contraceptive Pills) में प्रयुक्त होने वाले सिंथेटिक प्रोजेस्टोजेन और एस्ट्रोजन के संयोजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये गोलियाँ मुख्य रूप से डिंबोत्सर्जन (Ovulation) को रोकती हैं और गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के बलगम (Mucus) को गाढ़ा कर देती हैं ताकि शुक्राणुओं का प्रवेश अवरुद्ध हो सके।
2. ये गोलियाँ गर्भाशय के एंडोमेट्रियम (Endometrium) को इस प्रकार परिवर्तित करती हैं कि वह निषेचित अंडाणु के रोपण (Implantation) के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ केवल वायु या निर्वात में ही मान्य होता है, और यदि दर्पण को पानी में डुबो दिया जाए तो उसके परावर्तन के नियमों के कारण उसकी वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी दोनों बदल जाती हैं।
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की घटना के लिए प्रकाश किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है, और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक होना चाहिए।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल सहसंयोजक बंध (Single covalent bonds) होते हैं, और सामान्यतः इन्हें 'पैराफिन' (Paraffins) कहा जाता है क्योंकि इनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता कम होती है।
2. एल्काइन्स (Alkynes) में कम से कम एक कार्बन-कार्बन त्रि-बंध (Triple bond) होता है, और असंतृप्तता के उच्च स्तर के कारण ये एल्केन्स और एल्कीन्स की तुलना में अत्यधिक अम्लीय प्रकृति दर्शाते हैं क्योंकि इनका कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित (Hybridized) होता है।
3. 'ऑक्टेन संख्या' (Octane number) पेट्रोल (गैसोलीन) की प्रज्वलन-रोधी गुणवत्ता का माप है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या यह दर्शाती है कि ईंधन में 'अपस्फोटन' (Knocking) की प्रवृत्ति कम होगी, और इसके मानक के रूप में अत्यधिक अपस्फोटन उत्पन्न करने वाले 'n-हेप्टेन' को शून्य तथा न्यूनतम अपस्फोटन वाले 'आइसो-ऑक्टेन' को 100 अंक दिया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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