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General Science
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऊर्जा मुक्त होती है, जिसे प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) कहा जाता है, और आवर्त सारणी में हैलोजन परिवार (समूह 17) के तत्वों की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान उनके अपने आवर्त में सबसे अधिक होता है।
- 2. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के प्रभाव के कारण, 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग उनके ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान होती हैं।
- 3. पॉलिंग पैमाने के अनुसार फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक होती है, किंतु इसकी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान इसके छोटे आकार के कारण होने वाले अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic Repulsion) के कारण समूह के ही अगले तत्व क्लोरीन से कम होता है।
- 4. किसी परमाणु या आयन की आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन को नाभिक के आकर्षण बल के विरुद्ध बाहर निकालने के लिए ऊर्जा का अवशोषण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने और परमाणु आकार घटने के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती है, जिससे हैलोजन तत्वों की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी सर्वाधिक ऋणात्मक होती है। कथन 2 सही है क्योंकि 4f कक्षकों के दुर्बल आवरण प्रभाव (Shielding effect) के कारण लैंथेनाइड संकुचन उत्पन्न होता है, जिससे 5d तत्वों का आकार 4d तत्वों के लगभग बराबर हो जाता है। कथन 3 सही है; फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक (4.0) है, परंतु इसका छोटा आकार होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन पर प्रतिकर्षण अधिक लगता है, जिससे क्लोरीन की तुलना में इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान थोड़ा कम हो जाता है। कथन 4 गलत है क्योंकि आयनन एन्थैल्पी हमेशा **धनात्मक** (Endothermic) होती है, ऋणात्मक नहीं, क्योंकि इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus), जिसे धनुषस्तंभ भी कहा जाता है, 'क्लोस्ट्रीडियम टिटानी' (Clostridium tetani) नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न एक्सोटॉक्सिन (टिटैनोस्पैस्मिन) के कारण होता है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके कंकाल पेशियों में लगातार दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है।
2. 'डिप्थीरिया' (Diphtheria) एक संक्रामक जीवाणु जनित रोग है जो 'कोर्неबैक्टीरियम डिप्थीरिया' (Corynebacterium diphtheriae) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन पथ को प्रभावित करता है तथा गले में एक विशिष्ट 'सफेद झूठी झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है।
3. 'परटूसिस' (Pertussis), जिसे काली खांसी भी कहा जाता है, 'बोरडेटा परटूसिस' (Bordetella pertussis) नामक जीवाणु के कारण होता है, जिसका संचरण वायु जनित बूंदों (Droplets) के माध्यम से होता है और यह मुख्य रूप से फेफड़ों तथा श्वासनली को प्रभावित करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन और तंत्रिका तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की भित्ति में पाई जाने वाली पेप्टिक या मुख्य कोशिकाएँ (Chief cells) निष्क्रिय 'पेप्सिनोजेन' स्रावित करती हैं, जिसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) द्वारा सक्रिय पेप्सिन में बदला जाता है, और यह पेप्सिन प्रोटीन को प्रोटीज और पेप्टोन में जल-अपघटित करता है।
2. 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) के अनुसार, ऊतकों में उच्च कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता, कम pH और उच्च तापमान की स्थिति हीमोग्लोबिन के लिए ऑक्सीजन की आत्मीयता (Affinity) को बढ़ा देती है, जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन का विमोचन आसान हो जाता है।
3. 'सिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र' (Sympathetic nervous system) के सक्रिय होने पर हृदय की धड़कन बढ़ जाती है, पुतलियाँ फैल जाती हैं और पाचन नली की क्रमाकुंचन (Peristalsis) गति मंद पड़ जाती है, जो संकटकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए शरीर को तैयार करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मंगल?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuits) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का 'विशिष्ट प्रतिरोध' या प्रतिरोधकता (Resistivity) केवल पदार्थ की प्रकृति और उसके तापमान पर निर्भर करती है, चालक की लंबाई या उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर नहीं।
2. जब कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के योग से कम होता है।
3. 'किरचॉफ का धारा नियम' (KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे त्रिज्या?
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