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General Science
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'टिटनेस' (Tetanus), जिसे धनुषस्तंभ भी कहा जाता है, 'क्लोस्ट्रीडियम टिटानी' (Clostridium tetani) नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न एक्सोटॉक्सिन (टिटैनोस्पैस्मिन) के कारण होता है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके कंकाल पेशियों में लगातार दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है।
  2. 2. 'डिप्थीरिया' (Diphtheria) एक संक्रामक जीवाणु जनित रोग है जो 'कोर्неबैक्टीरियम डिप्थीरिया' (Corynebacterium diphtheriae) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन पथ को प्रभावित करता है तथा गले में एक विशिष्ट 'सफेद झूठी झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है।
  3. 3. 'परटूसिस' (Pertussis), जिसे काली खांसी भी कहा जाता है, 'बोरडेटा परटूसिस' (Bordetella pertussis) नामक जीवाणु के कारण होता है, जिसका संचरण वायु जनित बूंदों (Droplets) के माध्यम से होता है और यह मुख्य रूप से फेफड़ों तथा श्वासनली को प्रभावित करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। टिटनेस (Tetanus), डिप्थीरिया (Diphtheria) और परटूसिस (Kali Khasi) तीनों ही गंभीर जीवाणु जनित (Bacterial) संक्रमण हैं, जिनकी रोकथाम के लिए बच्चों को बचपन में DPT का टीका लगाया जाता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, टिटनेस का जीवाणु क्लोस्ट्रीडियम टिटानी मिट्टी, धूल या जंग लगे लोहे के माध्यम से शरीर के खुले घावों में प्रवेश करता है। डिप्थीरिया गले को प्रभावित करता है और स्यूडोमेम्ब्रेन बनाता है, जबकि पर्टुसिस में तीव्र और पुरानी खांसी आती है।
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण, कार्य और गति के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी बंद निकाय में सभी आंतरिक रूढ़िवादी (Conservative) बलों के अधीन गति करने पर कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) सदैव संरक्षित रहती है, भले ही निकाय पर बाहरी असंवयी (Non-conservative) बल कार्य कर रहे हों। 2. जब कोई पिंड किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर घर्षण बल के विरुद्ध गति करता है, तो घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है और यह कार्य यांत्रिक ऊर्जा को तापीय ऊर्जा में रूपांतरित कर देता है, जिससे कुल यांत्रिक ऊर्जा में ह्रास होता है। 3. 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी पिंड पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के ठीक बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है, असंवयी बलों के लिए नहीं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? धातुओं के निष्कर्षण, उनके अयस्क और रासायनिक परिष्करण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम के दौरान सल्फाइड अयस्कों को वायु की नियमित आपूर्ति के साथ उनके गलनांक से नीचे के तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे वे संगत ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और सल्फर डाइऑक्साइड गैस मुक्त होती है। 2. 'मोंड प्रक्रम' (Mond process) का उपयोग टाइटेनियम और जिरकोनियम जैसी अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातुओं के अति-शोधन के लिए किया जाता है, जिसमें इन्हें आयोडीन के साथ वाष्पशील यौगिक में बदला जाता है। 3. 'प्रगलनीकरण' (Smelting) की प्रक्रिया में सांद्रित अयस्क को उपयुक्त गालक (Flux) और कोक (क्रेता/अपचायक) के साथ उच्च ताप पर भट्टी में गलाया जाता है, जिससे अयस्क का अपचयन होकर धातु प्राप्त होती है और अशुद्धियाँ 'धातुमल' (Slag) के रूप में अलग हो जाती हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल श्वसन रोग है जो मुख्य रूप से ड्रॉपलेट इन्फेक्शन के माध्यम से फैलता है, और इसके उपचार के लिए 'ओसेल्टामिविर' (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवा का उपयोग किया जाता है। 2. जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis) एक विषाणुजनित मस्तिष्क ज्वर है जिसका संचरण मुख्य रूप से 'मानसनिया' या 'क्यूलैक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और यह सूअर तथा पक्षी जैसे कशेरुकी जीवों में प्रचुर मात्रा में पनपता है। 3. ट्रिकोफाइटन (Trichophyton) प्रजाति के कवक मानव में 'दाद' (Ringworm) रोग का कारण बनते हैं, जो त्वचा पर खुजलीदार चकत्ते उत्पन्न करते हैं, और इनके संक्रमण के निवारण के लिए फ्लूकोनाजोल या क्लोट्रिमजोल जैसी एंटीफंगल औषधियां दी जाती हैं। 4. रेबीज (Hydrophobia) एक जीवाणु जनित घातक रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, और इसका संक्रमण संक्रमित कुत्ते या बिल्ली के लारयुक्त काटने के घाտ के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (Nutrition and Vitamins) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. थायमिन (विटामिन $B_1$) का सक्रिय रूप 'थायमिन पाइरोफास्फेट' (TPP) है, जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान पाइरुवेट डीहाइड्रोजनेज और अल्फा-कीटोसुग्लेरेट डीहाइड्रोजनेज एंजाइमों के लिए एक आवश्यक सह-एंजाइम (Coenzyme) के रूप में कार्य करता है। 2. नियासिन (विटामिन $B_3$) का संश्लेषण मानव शरीर में ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल से भी हो सकता है, और इसके व्युत्पन्न 'निकोटिनएमाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड' (NAD⁺) तथा 'NADPH' ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण और अपचयी मार्गों में इलेक्ट्रॉन वाहक की भूमिका निभाते हैं। 3. टोकोफेरॉल (विटामिन $E$) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोशिका झिल्ली में मौजूद पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड को लिपिड पेराक्सिडेशन से बचाता है तथा एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। 4. विटामिन $K$ (फिलोक्विनोन) यकृत में प्रोथ्रोम्बिन और अन्य रक्त स्कंदन कारकों (Clotting factors II, VII, IX, X) के गामा-कार्बोक्सिलेशन के लिए एक आवश्यक को-फैक्टर है, जो रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया को सुगम बनाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? लाल ग्रह?
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