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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों (Circuits) के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी चालक का प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों (Metallic conductors) का तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) और विद्युत अपघट्यों (Electrolytes) का तापमान बढ़ने पर उनका प्रतिरोध घट जाता है।
  2. 2. जब प्रतिरोधकों के एक समूह को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध समूह के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम होता है, और प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर का मान भिन्न-भिन्न होता है।
  3. 3. किरचॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
  4. 4. एक आदर्श वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत माना जाता है, यही कारण है कि इसे परिपथ में हमेशा उस घटक के साथ समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है जिसके सिरों का विभवांतर मापना होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि तापमान में वृद्धि होने पर धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की टक्कर बढ़ जाती है जिससे उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों में ताप बढ़ने पर सहसंयोजक बंध टूटते हैं और आवेश वाहक बढ़ने से प्रतिरोध घटता है। कथन 2 गलत है क्योंकि समानांतर क्रम में जुड़े प्रतिरोधकों के प्रत्येक घटक के सिरों पर विभवांतर का मान समान (कांस्टेंट) होता है, भिन्न नहीं; हालांकि कुल प्रतिरोध न्यूनतम प्रतिरोध से भी कम होता है। कथन 3 सही है क्योंकि किरचॉफ का धारा नियम (KCL) आवेश संरक्षण (Conservation of Charge) के नियम पर आधारित है। कथन 4 सही है क्योंकि एक आदर्श वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत होता है ताकि वह परिपथ से कोई धारा न खींचे और सटीक विभवांतर माप सके, और इसे हमेशा समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है। विकिपीडिया संदर्भ
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