General Science
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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) की गैर-सह-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रिकाओं (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था के दौरान संपन्न होती है।
- 2. इस प्रक्रिया के लिए 'रेकॉम्बिनेस' (Recombinase) एंजाइम की सक्रियता अनिवार्य होती है, जो आनुवंशिक सामग्री के खंडों को काटने और पुनः जोड़ने (Cut and Paste) का कार्य करता है।
- 3. जीन विनिमय की आवृत्ति (Frequency) दो जीनों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है; अर्थात्, जितने पास जीन होंगे, जीन विनिमय की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
- 4. यह प्रक्रिया संततियों में नई जीन संयोजनों (Recombinations) को उत्पन्न करती है, जो जैविक विकास (Evolution) और प्राकृतिक चयन के लिए कच्चा माल प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन विनिमय (Crossing Over) अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के प्रोफ़ेज-I की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों की नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक खंडों का आदान-प्रदान है। यह प्रक्रिया 'रेकॉम्बिनेस' नामक एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है। जीन विनिमय की आवृत्ति दो जीनों के बीच की भौतिक दूरी के **समानुपाती** (Directly proportional) होती है—यानी जितनी अधिक दूरी होगी, क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी, न कि व्युत्क्रमानुपाती। यह प्रक्रिया जैव विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भिन्नताएँ उत्पन्न करती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिक्रमण अवधि पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल के ठीक बराबर होती है, और यह उपग्रह विषुवत वृत्त (Equator) के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर स्थापित किया जाता है।
3. जब कोई उपग्रह अपनी कक्षा से थोड़ा नीचे गिरता है (अर्थात उसकी ऊँचाई घटती है), तो वायुमंडलीय घर्षण के कारण उसकी कक्षीय चाल (Orbital speed) कम हो जाती है, जिससे वह अंततः पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाता है।
4. भारहीनता (Weightlessness) की स्थिति में उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करना बंद कर देता है, जिसके कारण वे केबिन के फर्श और छत पर तैरते रहते हैं।
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मानव शरीर के तंत्रों और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय में ऑक्सीनटिक (Parietal) कोशिकाओं द्वारा हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ-साथ 'कैसल का इंट्रिंसिक फैक्टर' (Castle's Intrinsic Factor) का स्रावण किया जाता है, जो छोटी आंत के इलियम (Ileum) भाग में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. मानव श्वसन तंत्र में, प्रसवान (Inspiration) के दौरान डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों (External Intercostal Muscles) के संकुचन से वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ जाता है और वक्षीय दबाव वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो जाता है, जिससे हवा फेफड़ों के भीतर प्रवेश करती है।
3. परिसंचरण तंत्र के अंतर्गत, 'हेस्स का बंडल' (Bundle of His) और 'पुर्किंजे तंतु' (Purkinje Fibres) हृदय के चालन तंत्र का हिस्सा हैं, जो विद्युत आवेगों को एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड से सीधे वेंट्रिकुलर मायोकार्डियम तक तेजी से प्रसारित करते हैं।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का नियंत्रण मुख्य रूप से प्रमस्तिष्क (Cerebrum) द्वारा किया जाता है, जो संवेदी न्यूरॉन्स से प्राप्त संकेतों का तुरंत विश्लेषण करके प्रेरक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
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ध्वनि तरंगों और तरंग गति (Wave Motion) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है, जबकि दाब में परिवर्तन का ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता बशर्ते तापमान स्थिर रहे।
2. अनुप्रस्थ तरंगें केवल उन्हीं माध्यमों में उत्पन्न की जा सकती हैं जिनमें अपरोपण प्रतिबल (Shear stress) को सहन करने की क्षमता हो, यही कारण है कि अनुप्रस्थ तरंगें गैसों और द्रवों के भीतर संचरित नहीं हो सकतीं (किंतु द्रवों के पृष्ठ पर संचरित हो सकती हैं)।
3. जब ध्वनि तरंगें एक माध्यम سے दूसरे माध्यम में जाती हैं, तो उनकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि माध्यम के बदलने के कारण उनके वेग में परिवर्तन हो जाता है।
4. अनुनाद (Resonance) की परिघटना तब घटित होती है जब किसी वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति (Natural frequency) बाह्य रूप से आरोपित आवर्त बल की आवृत्ति के बराबर हो जाती है, जिससे आयाम में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है।
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों (Circuits) के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों (Metallic conductors) का तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) और विद्युत अपघट्यों (Electrolytes) का तापमान बढ़ने पर उनका प्रतिरोध घट जाता है।
2. जब प्रतिरोधकों के एक समूह को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध समूह के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी कम होता है, और प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर का मान भिन्न-भिन्न होता है।
3. किरचॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
4. एक आदर्श वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत माना जाता है, यही कारण है कि इसे परिपथ में हमेशा उस घटक के साथ समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है जिसके सिरों का विभवांतर मापना होता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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