General Science
Asked 2 months ago · Viewed 20 times
विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative properties) और रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में होने वाला अपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह एक अणुसंख्यक गुणधर्म है जो विलेय के कणों की प्रकृति पर निर्भर करता है, न कि उनकी संख्या पर।
- 2. क्वथनांक में उन्नयन ($\Delta T_b$) और हिमांक में अवनमन ($\Delta T_f$) दोनों ही molal सांद्रता (मोललता) के सीधे आनुपातिक होते हैं, तथा इनके आनुपातिक स्थिरांक क्रमशः मोलल उन्नयन स्थिरांक ($K_b$) और मोलल अवनमन स्थिरांक ($K_f$) कहलाते हैं, जो केवल विलायक की प्रकृति पर निर्भर करते हैं।
- 3. समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारकों की भौतिक अवस्था (phase) समान होती है, जैसे सींबर प्रक्रिया में सल्फर डाइऑक्साइड का सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकरण, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न कलाओं में होते हैं।
- 4. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और प्रभावी होता है, तथा इसकी कार्यप्रणाली 'ताला-चाबी' मॉडल (Lock and key model) या प्रेरित फिट मॉडल पर आधारित होती है, जिसमें सक्रिय ऊर्जा (Activation energy) का मान उत्प्रेरक की उपस्थिति में बढ़ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative properties) विलेय के कणों की **संख्या** (मोलों की संख्या) पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी रासायनिक प्रकृति पर। कथन 2 सत्य है; क्वथनांक उन्नयन और हिमांक अवनमन मोललता के समानुपाती होते हैं तथा $K_b$ और $K_f$ विलायक के गुण हैं। कथन 3 सत्य है, समांगी उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक एक ही भौतिक अवस्था में होते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि उत्प्रेरक (एंजाइम सहित) रासायनिक अभिक्रिया की **सक्रिय ऊर्जा (Activation energy) को कम करते हैं**, बढ़ाते नहीं हैं। विकिपीडिया संदर्भ
अगला प्रश्न →
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स के संदर्भ…
← पिछला प्रश्न
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक…
Related Questions
→
मानव रोगों और उनके सूक्ष्मजीवतीय कारकों (Pathogens) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ट्यूबरकुलोसिस' (तपेदिक) एक जीवाणु जनित रोग है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) के कारण होता है, और इसके उपचार के लिए डॉट्स (DOTS) प्रणाली के अंतर्गत रिफैम्पिसिन और आइसोनियाज़िड जैसी औषधियां दी जाती हैं।
2. 'रेबीज' (Hydrophobia) एक विषाणु जनित तंत्रिका संबंधी घातक रोग है जो लाइساवायरस (Lyssavirus) के संक्रमण से होता है, और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
3. 'एड्स' (AIDS) उत्पन्न करने वाला ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) एक रेट्रोवायरस है जो शरीर की CD4+ T-लिम्फोसाइट्स कोशिकाओं को नष्ट कर प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करता है, और इसके संचरण का मुख्य माध्यम केवल दूषित जल और भोजन का सेवन है।
4. 'मलेरिया' प्लासमोडियम प्रजाति के परजीवी प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण मादा एनाफिलिस मच्छर द्वारा होता है, तथा इस परजीवी का जीवन चक्र मानव और मच्छर दोनों में पूर्ण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पदार्थ के सामान्य गुणों, विशेषकर पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface Tension) उसके अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बलों (Cohesive forces) के कारण होता है, और तापमान में वृद्धि होने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है, जबकि साबुन या डिटर्जेंट जैसे पृष्ठसक्रिय एजेंट (Surfactants) मिलाने पर भी जल का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों और गैसों का वह आंतरिक गुण है जो उनकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है; उच्च ताप पर द्रवों की श्यानता घट जाती है, जबकि गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि होने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूर्णतः या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर आभासी कमी का अनुभव करती है, और उत्प्लावन बल (Buoyant force) विस्थापित द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है।
4. केशिकत्व (Capillarity) की परिघटना का कारण केवल ससंजक बल है; जब कांच की एक केशिका नली को पारे में डुबोया जाता है, तो पारे का तल नली के भीतर बाहर के तल से ऊपर उठ जाता है क्योंकि पारा और कांच के बीच का संसंजक बल, पारे के अपने अणुओं के संसंजक बल से अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पदार्थ के सामान्य गुणों (पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज का सिद्धांत) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) किसी द्रव के पृष्ठ पर एकांक लंबाई पर लगने वाला बल है, और तापमान बढ़ने पर द्रवों का पृष्ठ तनाव सामान्यतः कम हो जाता है, जबकि किसी द्रव में विलेयशील अशुद्धियाँ मिलाने पर उसका पृष्ठ तनाव बढ़ या घट दोनों सकता है।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों और गैसों का वह गुण है जिसके कारण वे अपनी विभिन्न परतों के बीच होने वाली सापेक्ष गति का विरोध करते हैं; तापमान बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घटती है, जबकि गैसों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूरी या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर आभासी कमी का अनुभव करती है, और उत्प्लावन बल (Buoyant force) वस्तु के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है।
4. केशिकत्व (Capillarity) की परिघटना पृष्ठ तनाव का एक प्रत्यक्ष परिणाम है; जल में डुबोने पर कांच की केशिका नली में जल ऊपर चढ़ता है क्योंकि कांच और जल के बीच का संजन बल (Cohesive force), जल के अणुओं के बीच के संजन बल से अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, आरबीसी की सतह पर मौजूद एंटीजन (एग्लुटिनोजेन) के प्रकार के आधार पर रक्त समूह निर्धारित होते हैं, और रक्त समूह 'O' वाले व्यक्ति के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी (एग्लुटिनिन) उपस्थित होते हैं।
2. 'Rh कारक' (Rhesus factor) से जुड़ी 'गर्भभ्रूण रक्ताणुकोशाकता' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति केवल तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) पिता और Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता की संतान हो, और यह समस्या सामान्यतः पहले गर्भ के दौरान ही अत्यधिक गंभीर और घातक हो जाती है क्योंकि प्राथमिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तत्काल और प्रबल होती है।
3. मानव हृदय के चालन तंत्र (Conduction System) में, 'साइनोएट्रियल नोड' (SA Node) को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है, जिससे उत्पन्न होने वाला स्वतः प्रेरणा (authythmic) विद्युत आवेग सबसे पहले आलिंदों को संकुचित करता है और फिर एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (AV Node) से होते हुए निलय तक पहुँचਦਾ है।
4. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया (Blood Coagulation) में, प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन, कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) और विटामिन $K$ की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और थ्रॉम्बिन अंततः घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन में परिवर्तित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.