त्वरित लिंक्स
General Science
7 views
यांत्रिकी में कार्य, ऊर्जा और संवेग के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी वस्तु पर नियत बल द्वारा किया गया कार्य उस बल और बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के अदिश गुणनफल के बराबर होता है, और यह कार्य धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है, जो बल और विस्थापन के बीच के कोण पर निर्भर करता है।
- 2. गतिज ऊर्जा और रेखीय संवेग के बीच संबंध के अनुसार, यदि किसी वस्तु का रेखीय संवेग दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है, बशर्ते वस्तु का द्रव्यमान नियत रहे।
- 3. संरक्षी बलों (Conservative forces) द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर करता है, और एक बंद पथ के अनुदिश संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य हमेशा ऋणात्मक होता है।
- 4. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के ठीक बराबर होता है, चाहे वे बल संरक्षी हों या असंरक्षी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किया गया कार्य $W = \vec{F} \cdot \vec{s} = Fs \cos\theta$ होता है, जहाँ $\theta$ बल और विस्थापन के बीच का कोण है। यदि कोण न्यून है तो कार्य धनात्मक, अधिक कोण के लिए ऋणात्मक और $90^\circ$ होने पर शून्य होता है। कथन 2 सही है क्योंकि गतिज ऊर्जा $K = \frac{p^2}{2m}$ होती है; यदि संवेग $p$ दोगुना हो जाए, तो गतिज ऊर्जा $4$ गुनी हो जाती है। कथन 3 गलत है क्योंकि संरक्षी बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) द्वारा किया गया कार्य केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं, और एक बंद पथ में संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य **शून्य** होता है, ऋणात्मक नहीं। कथन 4 बिल्कुल सही है, यह कार्य-ऊर्जा प्रमेय का मानक कथन है। इस विषय के अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
मानव शरीर के विभिन्न तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव श्वसन तंत्र में, फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) की आंतरिक सतह पर टाइप-II न्यूमोसाइट्स कोशिकाओं द्वारा 'पल्मोनरी सर्फेक्टेंट' का स्रावण किया जाता है, जो सतही तनाव (Surface Tension) को कम करके अंतःश्वसन के दौरान कूपिकाओं को पिचकने से बचाता है।
2. पाचन तंत्र के अंतर्गत, आमाशय में HCl की उपस्थिति में निष्क्रिय 'पेप्सिनोजेन' सक्रिय 'पेप्सिन' में परिवर्तित होता है, जबकि छोटी आंत के अग्रभाग (ड्योडिनम) में अग्न्याशय द्वारा स्रावित 'ट्रिप्सिनोजेन' आंत की श्लेष्मला द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' एंजाइम द्वारा सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है।
3. हृदय के परिसंचरण चक्र में, 'प्रथम हृदय ध्वनि' (Lub) का उत्पन्न होना द्विवलनी (Mitral) और त्रिवलनी (Tricuspid) कपाटों के खुलने के कारण होता है, जबकि 'द्वितीय हृदय ध्वनि' (Dub) अर्धचंद्रकार कपाटों के बंद होने से संबंधित है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) के मार्ग में संवेदी न्यूरॉन से आने वाले विद्युत आवेग रीढ़ की हड्डी के धूसर द्रव्य (Grey matter) या श्वेत द्रव्य में से गुजरते हुए सीधे अंतर-न्यूरॉन के माध्यम से मोटर न्यूरॉन तक पहुँचते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हॉर्मोन्स (Plant Hormones) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) प्रथम ऐसे स्थलीय पौधे हैं जिनमें वास्तविक संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, लेकिन इनमें बीज का निर्माण नहीं होता है और इनका मुख्य पादप शरीर बीजाणुकोद्भिद (Sporophyte) होता है।
2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य या शून्य होती है, क्योंकि इनमें रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में स्थित होता है और यह सीधे वायुमंडलीय $CO_2$ का स्थिरीकरण करता है।
3. ऑक्सिन (Auxin), विशेष रूप से इंडोल-3-एसेटिक एसिड (IAA), तने और मूल के अग्रभाग पर संश्लेषित होता है और यह 'शिखाग्र प्रमुखता' (Apical Dominance) के लिए उत्तरदायी है, जहाँ शीर्षस्थ कलिकायें पार्श्व कलिकाओं के विकास को संदमित करती हैं।
4. प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश-निर्भर अभिक्रिया (Light-dependent reaction) के दौरान जल का प्रकाशीय अपघटन (Photolysis) फोटोसिस्टम-II (PS-II) से जुड़ा हुआ है, जिससे ऑक्सीजन, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
→
जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) की गैर-सह-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रिकाओं (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था के दौरान संपन्न होती है।
2. इस प्रक्रिया के लिए 'रेकॉम्बिनेस' (Recombinase) एंजाइम की सक्रियता अनिवार्य होती है, जो आनुवंशिक सामग्री के खंडों को काटने और पुनः जोड़ने (Cut and Paste) का कार्य करता है।
3. जीन विनिमय की आवृत्ति (Frequency) दो जीनों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है; अर्थात्, जितने पास जीन होंगे, जीन विनिमय की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
4. यह प्रक्रिया संततियों में नई जीन संयोजनों (Recombinations) को उत्पन्न करती है, जो जैविक विकास (Evolution) और प्राकृतिक चयन के लिए कच्चा माल प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
तरंग की ऊर्जा?
→
प्रकाशिकी (Optics) और प्रकाशीय उपकरणों के कार्यसिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी प्रकृति उलट जाती है और वह एक अपसारी लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
2. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) की फोकस दूरी बड़ी और नेत्रिका लेंस (Eyepiece) की फोकस दूरी छोटी होनी चाहिए, जबकि सूक्ष्मदर्शी (Microscope) के मामले में दोनों लेंसों की फोकस दूरी बहुत बड़ी और समान होनी चाहिए।
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है, तथा आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
4. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की अंतिम आवर्धन क्षमता अभिदृश्यक द्वारा उत्पन्न आवर्धन और नेत्रिका द्वारा उत्पन्न आवर्धन के गुणनफल के बराबर होती है, जिसमें अभिदृश्यक द्वारा बना अंतिम प्रतिबिंब वास्तविक, सीधा और अत्यधिक आवर्धित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.