त्वरित लिंक्स
General Science
9 views
सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं के कोशिका विभाजन और कोशिका अंगकों की संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की 'एनाफेज़' (Anaphase) अवस्था के दौरान, सेंट्रोमेरे का विभाजन होता है और sister chromatids अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिसमें 'काइनेटोक्योर माइक्रोट्यूब्यूल्स' (Kinetochore microtubules) की लंबाई छोटी हो जाती है।
- 2. माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सीसोम' (F0-F1 कण) ATP संश्लेषण के लिए उत्तरदायी होते हैं, और माइटोकॉन्ड्रिया अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) अंगक हैं क्योंकि इनमें अपना स्वयं का द्विरज्जुकीय वृत्ताकार (Double-stranded circular) DNA और 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।
- 3. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) में 'सिस' (Cis) फेस जो कि उत्तल (Convex) और निर्माणकारी चेहरा होता है, endoplasmic reticulum की तरफ स्थित होता है, जबकि 'ट्रांस' (Trans) फेस अवतल (Concave) और परिपक्व चेहरा होता है जो प्लाज्मा झिल्ली की ओर उन्मुख होता है।
- 4. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की 'पैकाइटीन' (Pachytene) अवस्था के दौरान, समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-बहन क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है और यह 'साइनेप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स' के विघटन के बिना पूरा हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के सभी कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है: कथन 1 सही है क्योंकि एनाफेज़ अवस्था में सेंट्रोमेरे के विभाजित होने से सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होते हैं और काइनेटोक्योर तंतुओं के संकुचन से ध्रुवों की ओर बढ़ते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया में F0-F1 कण ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलेशन द्वारा ATP बनाते हैं और इनमें अपना 70S राइबोसोम व वृत्ताकार DNA होता है जिससे इन्हें अर्ध-स्वायत्त कहा जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि गॉल्जीकाय का सिस फेस (निर्माणात्मक/उत्तल) एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम की तरफ और ट्रांस फेस (परिपक्व/अवतल) प्लाज्मा झिल्ली की तरफ होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि पैकाइटीन अवस्था में क्रॉसिंग ओवर 'साइनेप्टोनेमल कॉम्प्लेक्स' के निर्माण के दौरान होता है, जबकि इसका विघटन (Dissolution) अगली अवस्था यानी 'डিপ्लोटीन' (Diplotene) में होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
मानव शरीर में होने वाले विभिन्न आनुवंशिक, संक्रामक तथा अपक्षयी (Degenerative) रोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'हंटिंगटन रोग' (Huntington's disease) एक ऑटोसोमल प्रभावी (Autosomal dominant) न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है, जो क्रोमोसोम 4 पर स्थित 'HTT' जीन में CAG ट्रिपलेट रिपीट के अत्यधिक विस्तार (Trinucleotide repeat expansion) के कारण होता है।
2. 'प्रियन रोग' (Prion diseases), जैसे क्रूउत्ज़feldt-जैकोब रोग (CJD), संक्रामक विकृत प्रोटीन कणों के कारण होने वाले घातक मस्तिष्क विकार हैं, जिनमें आनुवंशिक सामग्री (DNA या RNA) पूर्णतः अनुपस्थित होती है और ये ऊष्मा तथा सामान्य स्टरलाइज़ेशन विधियों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं।
3. 'फिनाइलकेटोन्यूरिया' (Phenylketonuria) एक एक्स-लिंक्ड अप्रभावी (X-linked recessive) आनुवंशिक विकार है, जो 'फिनाइलएलैनिन हाइड्रॉक्सिलेज़' एंजाइम की कमी के कारण होता है, जिससे फिनाइलएलैनिन का संचय मस्तिष्क में गंभीर मानसिक मंदता (Intellectual disability) का कारण बनता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
प्रकाशिकी (Optics) में गोलीय दर्पणों और अपवर्तन के परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तल दर्पण की फोकस दूरी (Focal length) धनात्मक होती है, जबकि अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है, और किसी भी वास्तविक वस्तु के लिए उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी, सीधा तथा वस्तु के आकार से छोटा होता है।
2. जब प्रकाश किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तब अपवर्तन कोण 90 डिग्री से अधिक हो जाता है और किरण वापस उसी माध्यम में लौट आती है जिसे प्रकाश का विकिपीडिया संदर्भ कहते हैं।
3. लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) के अनुसार, लेंस की फोकस दूरी लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करती है, तथा यदि किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाए जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ से अधिक हो, तो उसकी फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और लेंस की अभिसारी प्रकृति अपसारी में बदल जाती है।
4. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक (Objective) लेंस और नेत्रिका (Eyepiece) दोनों की फोकस दूरी बहुत अधिक होनी चाहिए ताकि अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर स्पष्ट बन सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
आदर्श गैस?
→
धातुकर्म (Metallurgy) और धातुओं के निष्कर्षण के प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रगलन (Smelting) एक ऐसी ताप-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर वायु की अधिकता में गर्म किया जाता है ताकि वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो सकें।
2. झाग उत्प्लवन विधि (Froth Flotation Method) मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए प्रयुक्त की जाती है, जिसमें पाइन तेल और चीड़ के तेल का उपयोग फेन (Froth) बनाने के लिए किया जाता है, और यह विधि गीले करने के गुणों (Wetting properties) के अंतर पर आधारित है।
3. बेसेमरीकरण (Bessemerisation) प्रक्रम का उपयोग कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) बनाने के लिए किया जाता है, जिसमें गलित धातु में गर्म वायु का झोंका प्रवाहित करके अवांछित कार्बन, सिलिकॉन और मैंगनीज का ऑक्सीकरण किया जाता है।
4. एल्युमीनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult Process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर उसका विद्युत अपघटन किया जाता है, जिससे क्रायोलाइट विलायक के गलनांक को कम करने और विद्युत चालकता बढ़ाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
चुम्बकीय पदार्थों के वर्गीकरण और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रतिचुंबकीय पदार्थों (Diamagnetic substances) की चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) का मान ऋणात्मक और ताप पर निर्भर नहीं करता है, जबकि अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति क्यूरी के नियम (Curie's Law) का पालन करते हुए परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
2. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है, तथा इसकी दिशा लेंस के नियम द्वारा निर्धारित होती है जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का कठोरता से अनुपालन करता है।
3. 'स्वप्रेरण गुणांक' (Coefficient of Self-Inductance) का SI मात्रक 'हेनरी' होता है, जो कि वेबर प्रति ऐम्पियर के तुल्य है, और यह किसी कुंडली की वह ज्यामितीय विशेषता है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.