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General Science
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चुम्बकीय पदार्थों के वर्गीकरण और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्रतिचुंबकीय पदार्थों (Diamagnetic substances) की चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) का मान ऋणात्मक और ताप पर निर्भर नहीं करता है, जबकि अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति क्यूरी के नियम (Curie's Law) का पालन करते हुए परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- 2. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है, तथा इसकी दिशा लेंस के नियम द्वारा निर्धारित होती है जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का कठोरता से अनुपालन करता है।
- 3. 'स्वप्रेरण गुणांक' (Coefficient of Self-Inductance) का SI मात्रक 'हेनरी' होता है, जो कि वेबर प्रति ऐम्पियर के तुल्य है, और यह किसी कुंडली की वह ज्यामितीय विशेषता है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। प्रतिचुंबकीय पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है और यह सामान्यतः ताप पर निर्भर नहीं करती है। अनुचुंबकीय पदार्थ क्यूरी के नियम का पालन करते हैं, जिसके अनुसार उनकी चुंबकीय प्रवृत्ति तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है। फैराडे का नियम और लेंस का नियम विद्युत चुंबकीय प्रेरण के मूल आधार हैं और ऊर्जा संरक्षण का पालन करते हैं। स्वप्रेरण गुणांक का मात्रक हेनरी (वेबर/ऐम्पियर) होता है जो धारा परिवर्तन का विरोध करता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब कैसा होता है?
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पदार्थ की अवस्थाओं और परमाणु संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्वांटम संख्याओं के निर्धारण में, दिगंशी क्वांटम संख्या (Azimuthal Quantum Number) उपकोश की आकृति (Shape) को दर्शाती है, जबकि चुंबकीय क्वांटम संख्या (Magnetic Quantum Number) अंतरिक्ष में कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को निर्धारित करती है।
2. प्लाज़्मा पदार्थ की एक ऐसी अवस्था है जिसमें गैस अत्यधिक आयनित अवस्था में होती है जिसमें उच्च ऊर्जावान मुक्त इलेक्ट्रॉन और धनात्मक आयन होते हैं, और यह ब्रह्मांड में प्राकृतिक रूप से सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली अवस्था है।
3. द्रव्यमान संख्या (Mass Number) हमेशा परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के ठीक दोगुनी होती है, क्योंकि किसी भी परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या सदैव प्रोटॉनों की संख्या के पूर्णतः बराबर होती है।
4. पावली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान कभी भी पूरी तरह समान नहीं हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में वृहत् पोषक तत्वों (Macronutrients) और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के उपापचय तथा जैव-रासायनिक कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन C) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन (Collagen) प्रोटीन के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए एक आवश्यक सह-एंजाइम के रूप में कार्य करता है, और इसकी कमी से संयोजी ऊतकों की कमजोरी तथा स्कर्वी रोग उत्पन्न होता है।
2. ट्रिप्टोफैन एक आवश्यक अमीनो अम्ल है, जिससे मानव शरीर में 'नियासिन' (विटामिन B3) और 'सेरोटोनिन' न्यूरोट्रांसमीटर का जैव-संश्леषण होता है, तथा इसकी पूर्ण कमी से 'पेलॅग्रा' (Pellagra) रोग हो सकता है।
3. वसा-विलेय विटामिन 'टोकॉफेरॉल' (विटामिन E) एक शक्तिशाली अंतःकोशिकी एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिका झिल्ली में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स को पेरोक्सीडेशन से बचाता है, और इसकी कमी से पुरुषों में बंध्यापन तथा महिलाओं में गर्भपात की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
4. कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान 'थायमिन' (विटामिन B1) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप यानी थायमिन पाइरोफॉस्फेट के रूप में पादप और जंतु कोशिकाओं में पाइरुवेट के एसिटाइल-कोएंजाइम-A में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में पोषण और उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B3 (नियासिन या निकोटिनिक अम्ल) का पूर्वगामी अमीनो अम्ल 'ट्रिप्टोफैन' है, जिसकी पर्याप्त मात्रा होने पर मानव यकृत में ट्रिप्टोफैन से नियासिन का संश्लेषण हो सकता है, और इसकी गंभीर कमी से 'पेलॅग्रा' (Pellagra) रोग होता है जिसे 'चार D' (डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया और डेथ) लक्षणों से पहचाना जाता है।
2. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें यकृत और पेशियों में संचित ग्लाइकोजन का जलअपघटन होकर ग्लूकोज-1-फास्फेट बनता है, जिसे प्रेरित करने का मुख्य कार्य इंसुलिन हॉर्मोन का होता है।
3. रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins), जैसे कि किरेटिन और कोलेजन, जल में अघुलनशील होते हैं और इनकी polypeptide श्रृंखलाएँ हाइड्रोजन बंध तथा डिस्ल्फ़ाइड बंधों द्वारा एक मजबूत तंतुवत संरचना बनाती हैं, जो शरीर में संरक्षणात्मक और संरचनात्मक भूमिका निभाती हैं।
4. विटामिन K (फाइलोक्विнон) एक वसा-विलेय विटामिन है जो यकृत में प्रोथ्रॉम्बिन और अन्य रक्त का थक्का जमाने वाले कारकों के संश्लेषण के लिए कार्बोक्सिलेशन प्रक्रिया में एक आवश्यक सह-कारक (Cofactor) के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र और हॉर्मोनल विनियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior Pituitary) द्वारा स्रावित प्रोलैक्टिन (Prolactin) हॉर्मोन का मुख्य कार्य दुग्ध उत्पादन को प्रेरित करना है, जबकि पश्च पीयूष ग्रंथि (Posterior Pituitary) स्वयं ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन का संश्लेषण करती है और उन्हें अपने तंत्रिकाक्षों (Axons) के माध्यम से रक्त में मुक्त करती है।
2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का मेडुला भाग कैटेकोलामाइन्स (एपिनीफ्राइन और नॉरएपिनीफ्राइन) का स्रावण करता है जो 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं, जबकि कॉर्टेक्स भाग ग्लूकोकोर्टिकोइड्स और मिनरโลकॉर्टिकोइड्स का उत्पादन करता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में स्थित अल्फा कोशिकाएँ इंसुलिन का स्रावण करती हैं जो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है, जबकि बीटा कोशिकाएँ ग्लुकागोन का स्रावण करती हैं जो ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ावा देता है।
4. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित थायरोक्सिन ($T_4$) और ट्राइडोथायरोनिन ($T_3$) हॉर्मोन शरीर की आधारीय चयापचय दर (BMR) को नियंत्रित करते हैं, और इनके संश्लेषण के लिए टायरोसिन अमीनो अम्ल तथा आयोडीन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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