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General Science
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न जनन-मूत्र मार्ग (Urogenital) या संक्रामक रोगों और उनके कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'सिफिलिस' (Syphilis) एक जीवाणु जनित यौन संचारित संक्रमण (STI) है जो 'ट्रिपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) नामक सर्पिलाकार जीवाणु (Spirochete) के कारण होता है, और इसके प्राथमिक चरण में जननांगों पर दर्द रहित अल्सर या 'चांक्र' (Chancre) बनता है।
  2. 2. 'गोनोरिया' (Gonorrhea) एक विषाणु जनित संक्रमण है जो 'नाइसेरिया गोनोरिया' (Neisseria gonorrhoeae) नामक वायरस के कारण होता है, जो मूत्र मार्ग में तीव्र जलन और स्राव उत्पन्न करता है।
  3. 3. 'ह्यूमन पैपिलोमा वायरस' (HPV) एक डीएनए विषाणु है जिसके कुछ उच्च-जोखिम वाले प्रभेद (जैसे HPV-16 और HPV-18) महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (Cervical cancer) के मुख्य कारणों में से एक माने जाते हैं।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सिफिलिस (Syphilis) एक जीवाणु जनित यौन संचारित संक्रमण है जो 'ट्रिपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) नामक स्पिरोचेट जीवाणु के कारण होता है, और इसके शुरुआती चरण में 'चांक्र' (Chancre) नामक घाव बनता है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'गोनोरिया' (Gonorrhea) कोई विषाणु जनित रोग नहीं है, बल्कि यह 'नाइसेरिया गोनोरिया' (Neisseria gonorrhoeae) नामक **जीवाणु (Bacterium)** के कारण होता है। कथन 3 सही है क्योंकि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कुछ ऑन्कोजेनिक प्रभेद गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (Cervical cancer) के विकास में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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तरलों के यांत्रिकी गुणों और उनके व्यवहार—विशेषकर पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) अणुओं के बीच प्रभावी संसंजक बलों (Cohesive forces) के कारण उत्पन्न होता है, और जब किसी द्रव में कोई अल्प विलेय अशुद्धि जैसे सर्फेक्टेंट मिलाई जाती है, तो यह पृष्ठ को आंशिक रूप से ढंककर द्रव के पृष्ठ तनाव को काफी हद तक कम कर देती है। 2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्रवों में आंतरिक घर्षण का माप है, और जहाँ गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है, वहीं द्रवों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है क्योंकि उच्च तापमान पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से संसंजक बल मजबूत हो जाते हैं। 3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र (Centre of gravity) पर कार्य करता है, न कि डूबे हुए भाग के द्रव्यमान केंद्र पर। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों की रासायनिक प्रकृति, निष्कर्षण तथा उनके विशिष्ट गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्युमिनियम का निष्कर्षण 'हॉल-हरोल्ट प्रक्रम' द्वारा किया जाता है, जिसमें शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर विद्युत अपघटन किया जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करता है। 2. 'एक्वा रेजिया' (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का $3:1$ के आयतन अनुपात में ताजा तैयार किया गया मिश्रण होता है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट (Noble) धातुओं को घोलने में सक्षम है क्योंकि यह मिश्रण 'नेसेंट क्लोरीन' उत्पन्न करता है। 3. सफेद फॉस्फोरस, जो चार अलग-अलग मुख्य रूपों में पाया जाने वाला एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अधातु है, पानी में अघुलनशील होने के कारण पानी के भीतर संग्रहीत किया जाता है, और यह अंधेरे में चमकने का गुण यानी स्फुरदीप्ति (Phosphorescence) प्रदर्शित करता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों, लेंस निर्माताओं के सूत्र (Lens Maker's Formula) और अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लेंस निर्माताओं के सूत्र के अनुसार, किसी पतले लेंस की फोकस दूरी लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और माध्यम के अपवर्तनांक के अनुपात पर निर्भर करती है, तथा यदि किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाए जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक हो, तो उसकी प्रकृति अभिसारी (Converging) से बदलकर अपसारी (Diverging) हो जाती है। 2. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही हो तथा आपतन कोण का मान उस माध्यम युग्म के लिए क्रांतिक कोण (Critical Angle) से कम होना चाहिए। 3. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) की फोकस दूरी बड़ी तथा नेत्रिका लेंस (Eyepiece) की फोकस दूरी छोटी होनी चाहिए। 4. किसी गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $f = R/2$ केवल तभी सटीक होता है जब आपतन कोण बहुत छोटे हों (अर्थात परिक्षेपण सीमा के अंतर्गत), जिससे सीमांत किरणें (Marginal rays) मुख्य अक्ष के बहुत निकट रहती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है? कैपेसिटर (Capacitor) क्या स्टोर करता है?
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