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General Science
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आवर्त सारणी के तत्वों के गुणों, आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) बढ़ने के कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान में सामान्यतः वृद्धि होती है, हालांकि बेरिलियम ($Be$) और बोरॉन ($B$) तथा नाइट्रोजन ($N$) और ऑक्सीजन ($O$) के बीच इस सामान्य प्रवृत्ति में अपवाद देखे जाते हैं।
- 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऊर्जा का हमेशा उत्सर्जन ही होता है, चाहे परमाणु का आकार कुछ भी हो।
- 3. हैलोजन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($C l$) की तुलना में अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरीन के छोटे आकार के कारण होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) बल है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार कम होने और नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन को निकालना कठिन हो जाता है, जिससे आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है। इसके अलावा, $Be$ (पूर्ण भरे $2s$ कक्षक) की आयनन ऊर्जा $B$ से तथा $N$ (अर्ध-पूरित $2p$ कक्षक) की आयनन ऊर्जा $O$ से अधिक होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि कुछ तत्वों (जैसे उत्कृष्ट गैसों या बेरीमियम/नाइट्रोजन) के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर ऊर्जा का अवशोषण होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान धनात्मक हो जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि क्लोरीन ($Cl$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान फ्लोरीन ($F$) की तुलना में अधिक (अधिक ऊष्माक्षेपी) होता है, न कि फ्लोरीन का क्लोरीन से अधिक। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट (Collisions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किया गया कार्य मार्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस प्रकार के बल के अंतर्गत बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है।
2. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है, असंरक्षी बलों (जैसे घर्षण) के लिए लागू नहीं होती।
3. एकविमीय पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectriz inelastic collision) में गतिज ऊर्जा का पूर्ण संरक्षण होता है, किंतु संवेग का संरक्षण नहीं होता है, और संघट्ट के पश्चात दोनों वस्तुएं एक साथ मिलकर एक ही वेग से गति करती हैं।
4. यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण (External torque) शून्य हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग (Angular momentum) संरक्षित रहता है, जो कि कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की अवधारणाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक बंध (Ionic bond) का निर्माण दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की पूर्ण स्थानांतरण प्रक्रिया द्वारा होता है, और जालक एंथैल्पी (Lattice enthalpy) का उच्च मान आयनिक यौगिक के स्थायित्व को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, जबकि ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार अम्ल वे पदार्थ हैं जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
3. जब किसी प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बने लवण (जैसे अमोनियम क्लोराइड - $NH_4Cl$) का जल अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है और इसका pH मान 7 से अधिक होता है।
4. जल का स्व-आयनन (Self-ionization) एक ऊष्माशोषी प्रक्रम है, जिसके कारण तापमान में वृद्धि होने पर जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) बढ़ जाता है, किंतु शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाने के बावजूद वह उदासीन ही रहता है क्योंकि उसमें $[H^+]$ और $[OH^-]$ की सांद्रता समान होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूयूकैरियोटिक कोशिका के कोशिकांगों (Cell organelles) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूत्रकणिका (Mitochondria) और हरित लवक (Chloroplast) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं, क्योंकि इनमें स्वयं का वृत्ताकार डीएनए, आरएनए और 70S प्रकार के राइबोसोम उपस्थित होते हैं, जिससे ये अपनी कुछ प्रोटीन का संश्लेषण स्वयं कर सकते हैं।
2. सूत्री विभाजन (Mitosis) की 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था के दौरान गुणसूत्र कोशिका के मध्य रेखा पर व्यवस्थित हो जाते हैं और इस चरण में गुणसूत्रों की आकृति और आकार का सबसे स्पष्ट अध्ययन किया जाता है।
3. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के पैकीटीन (Pachytene) चरण में 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing over) की प्रक्रिया संपन्न होती है, जो समझात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ अर्धगुणसूत्रों (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री के विनिमय को सुगम बनाती है और यह रिकॉम्बिनेस (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
4. लाइसोसोम (Lysosome) एक एकल झिल्ली से घिरा कोशिकांग है जिसमें हाइड्रोलिटिक एंजाइम (जैसे कार्बोहाइड्रेटेस, प्रोटीएज और लाइपेस) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो क्षारीय माध्यम में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं और इसी कारण इसे कोशिका की 'आत्मघाती थैली' कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन और अम्लीय-क्षारीय प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखती हैं (अर्थात इलेक्ट्रॉन-न्यून), जबकि लुईस क्षार वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकती हैं।
2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश और कम ध्रुवणनीयता वाले होते हैं, जो प्राथमिकता से कठोर क्षारों के साथ मजबूत और स्थिर यौगिक बनाते हैं।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) का उसके प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ उदासीनीकरण होता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण क्षारीय प्रकृति का होता है, क्योंकि इसमें ऋणायन का जल-अपघटन होता है जिससे हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH^-$) मुक्त होते हैं।
4. बफर विलयन (Buffer Solution) वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का उदाहरण अमोनियम क्लोराइड एवं अमोनियम हाइड्रोक्साइड का मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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