BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
9 views

यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट (Collisions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किया गया कार्य मार्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस प्रकार के बल के अंतर्गत बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है।
  2. 2. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है, असंरक्षी बलों (जैसे घर्षण) के लिए लागू नहीं होती।
  3. 3. एकविमीय पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectriz inelastic collision) में गतिज ऊर्जा का पूर्ण संरक्षण होता है, किंतु संवेग का संरक्षण नहीं होता है, और संघट्ट के पश्चात दोनों वस्तुएं एक साथ मिलकर एक ही वेग से गति करती हैं।
  4. 4. यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण (External torque) शून्य हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग (Angular momentum) संरक्षित रहता है, जो कि कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत को दर्शाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संरक्षी बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता और बंद पथ में शून्य होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि कार्य-ऊर्जा प्रमेय संरक्षी और असंरक्षी दोनों प्रकार के बलों के लिए मान्य है। कथन 3 गलत है क्योंकि पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट में रैखिक संवेग संरक्षित रहता है लेकिन गतिज ऊर्जा का भारी ह्रास होता है, यह संरक्षित नहीं रहती है। कथन 4 सही है, बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में कोणीय संवेग संरक्षित रहता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और विटामिनों के जैव रासायनिक तथा चयापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'विटामिन B3' (नियासिन या निकोटिनिक एसिड) के सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'NAD+' (निकोटिनएमाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड) और 'NADP+' हैं, जो कई प्रकार की ऑक्सीकरण-अपचयन (Redox) अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन वाहक के रूप में कार्य करते हैं, और इसकी भीषण कमी से 'पेलग्रा' (Pellagra) रोग उत्पन्न होता है जिसमें चार 'D' (डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया और डेथ) लक्षण दिखाई देते हैं। 2. 'विटामिन C' (एस्कॉर्बिक एसिड) एक जल-सुलभ एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलेजन (Collagen) के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए आवश्यक 'प्रोलिन हाइड्रॉक्सिलेज़' एंजाइम के लिए फेरस आयनों ($Fe^{2+}$) को उनकी अपचयनित अवस्था में बनाए रखता है, और इसकी कमी से संयोजी ऊतकों की कमजोरी के कारण 'स्कर्वी' नामक रोग हो जाता है। 3. 'विटामिन A' (रेटिनॉल) का सक्रिय एल्डिहाइड रूप '11-सिस-रेटिनाल' आँखों की शलाका कोशिकाओं (Rhodopsin) में प्रकाश-संवेदी पिगमेंट का एक अनिवार्य घटक है, लेकिन इसकी कमी से होने वाली 'रतौंधी' (Night blindness) को रेटिनॉल के सेवन से पूरी तरह उलट (Reverse) नहीं किया जा सकता है। 4. वसा में घुलनशील 'विटामिन E' (टोकोफेरॉल) एक शक्तिशाली झिल्ली-बद्ध एंटीऑक्सीडेंट है जो सेलुलर झिल्लियों में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स को मुक्त मूलकों (Free radicals) द्वारा होने वाले लिपिड पेरोक्सीडेशन से बचाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की जैव-रासायनिक और प्रतिरक्षात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह प्रतिजन (Antigens) प्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जिनका संश्लेषण सीधे 'ABO' जीन द्वारा कूटबद्ध (coded) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से होता है, न कि ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों के माध्यम से। 2. 'बॉम्बे फिनोटाइप' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों में H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B के साथ-साथ एक विशेष 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह से रक्त लेने से रोकती है। 3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, यदि एक Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, तो प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनी IgG प्रकार की एंटी-Rh एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार कर सकती हैं और प्रथम शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। 4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक प्रणाली (Intrinsic pathway) की शुरुआत रक्त वाहिका की क्षति के बाद संपर्क कारकों (Contact factors जैसे Factor XII) के उपकला के नीचे स्थित कोलेजन या ऋणात्मक आवेशित सतहों के संपर्क में आने से होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर के विभिन्न जैविक तंत्रों की सूक्ष्म क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. छोटी आंत के ड्यूओडेनम (Graahani) भाग में स्रावित होने वाला 'सिक्रेटिन' (Secretin) हार्मोन मुख्य रूप से अग्न्याशय को उद्दीप्त कर सोडियम बाइकार्बोनेट युक्त क्षारीय रस के स्रावण को प्रेरित करता है, ताकि आमाशय से आने वाले अम्लीय काइम को उदासीन किया जा सके। 2. मानव हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, निलय संकुचन (Ventricular systole) के आरंभ में जब निलय का दबाव आलिंद के दबाव से अधिक हो जाता है, तब एट्रियोवेंट्रिकुलर कपाट (जैसे द्विवलनी और त्रिवलनी) रक्त के पश्च-प्रवाह को रोकने के लिए बंद हो जाते हैं, जिससे पहली हृदय ध्वनि ('लब') उत्पन्न होती है। 3. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में सिनाप्टिक संचरण के दौरान, प्री-सिनाप्टिक न्यूरॉन के अंतर्ग्रथनी पुटिकाओं (Synaptic vesicles) से न्यूरोट्रांसमीटर का मोचन कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) के अंतःप्रवाह (Influx) के कारण होता है। 4. मानव श्वसन तंत्र के नियमन में, हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) की स्थिति में महाधमनी चाप (Aortic arch) और कैरोटिड धमनी में स्थित केंद्रीय केमोरेसेप्टर्स (Central chemoreceptors) अत्यधिक सक्रिय होकर श्वसन दर को तीव्र करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिव क्षय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अल्फा ($\alpha$) क्षय के दौरान जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 से और द्रव्यमान संख्या 4 से घट जाती है, क्योंकि एक अल्फा कण वस्तुतः हीलियम नाभिक ($_2^4He^{2+}$) होता है, और इस प्रक्रिया में ऊर्जा का विमोचन संहति ह्रास (Mass defect) के कारण होता है। 2. बीटा-ऋणात्मक ($\beta^-$) क्षय में नाभिक के भीतर एक प्रोटॉन न्यूट्रॉन में परिवर्तित होता है, जिससे एक पॉजिट्रॉन और एक न्यूट्रिनो का उत्सर्जन होता है, जिसके फलस्वरूप परमाणु क्रमांक में 1 की वृद्धि हो जाती है किंतु द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है। 3. गामा ($\gamma$) विकिरणों का उत्सर्जन प्रायः अल्फा या बीटा क्षय के बाद उत्तेजित अवस्था में मौजूद नाभिक के निम्न ऊर्जा स्तर या मूल अवस्था में आने के कारण होता है, और गामा फोटॉन के निकलने से नाभिक की परमाणु संख्या या द्रव्यमान संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है। 4. किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्द्ध-आयु (Half-life) उसके क्षय नियतांक (Decay constant) के व्युत्क्रमानुपाती होती है तथा औसत आयु का मान अर्द्ध-आयु का लगभग 1.44 गुना होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अपवर्तन?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.