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प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision) और ऊर्जा-संवेग संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. द्विविमीय या एकविमीय पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट में न केवल निकाय का कुल रैखिक संवेग संरक्षित रहता है, बल्कि संघट्ट के दौरान और उसके पश्चात कुल गतिज ऊर्जा (Total Kinetic Energy) भी पूर्ण रूप से संरक्षित रहती है, और इस प्रक्रिया में यांत्रिक ऊर्जा का क्षय ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण के रूप में नहीं होता है।
- 2. जब समान द्रव्यमान का एक गतिशील पिंड किसी अन्य स्थिर पिंड के साथ आमने-सामने का पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट करता है, तो संघट्ट के पश्चात पहला पिंड अपनी गति पूरी तरह से खो देता है और रुक जाता है, जबकि दूसरा पिंड पहले पिंड के प्रारंभिक वेग से आगे बढ़ने लगता है (अर्थात वेगों का पूर्ण आदान-प्रदान होता है)।
- 3. यदि संघट्ट करने वाले दोनों पिंडों के द्रव्यमान असमान हैं और उनमें से एक अत्यधिक भारी तथा दूसरा अत्यंत हल्का है, तो भारी पिंड के साथ संघट्ट के पश्चात हल्के पिंड की अंतिम चाल भारी पिंड की प्रारंभिक चाल की लगभग आधी हो जाती है, चाहे संघट्ट की प्रकृति कुछ भी हो।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision) में संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों ही पूरी तरह संरक्षित रहते हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि जब समान द्रव्यमान के दो पिंडों के बीच आमने-सामने का प्रत्यास्थ संघट्ट होता है, तो वे अपने वेगों का पूर्ण रूप से आदान-प्रदान (exchange) कर लेते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि अत्यधिक भारी और हल्के पिंड के बीच प्रत्यास्थ संघट्ट में हल्के पिंड की अंतिम चाल भारी पिंड की प्रारंभिक चाल की लगभग दोगुनी हो जाती है, आधी नहीं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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नाभिकीय भौतिकी और कण त्वरकों (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'साइक्लोट्रॉन' (Cyclotron) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग आवेशित कणों जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन को उच्च गति तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र कणों को वृत्ताकार मार्ग पर घुमाता है और एक परिवर्ती विद्युत क्षेत्र कणों को प्रत्येक चक्कर में ऊर्जा प्रदान करता है।
2. 'आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सिद्धांत' ($E=mc^2$) के अनुसार, जब किसी भारी परमाणु के नाभिक का विखंडन या हल्के नाभिकों का संलयन होता है, तो द्रव्यमान में होने वाली सूक्ष्म क्षति (Mass defect) ही अपार ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है।
3. नाभिकीय रिएक्टरों में 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जो श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए विखंडन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले अतिरिक्त प्रोटॉनों का पूर्णतः अवशोषण करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में पाए जाने वाले 'अंतःप्रद्रव्यी जालिका' (Endoplasmic Reticulum - ER) और 'गॉल्जी काय' (Golgi Apparatus) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (RER) की सतह पर राइबोसोम जुड़े होते हैं, जिसके कारण यह मुख्य रूप से प्रोटीन संश्लेषण और उनके अंतर-कोशिकीय परिवहन में सक्रिय रूप से भाग लेती है।
2. चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (SER) लिपिड, फॉस्फोलिपिड और स्टेरॉयड हॉर्मोन्स के संश्लेषण का प्रमुख स्थल है, और यकृत कोशिकाओं में यह विषाक्त पदार्थों और औषधियों के विषहरण (Detoxification) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
3. गॉल्जी काय का 'cis' (निर्माण) चेहरा आमतौर पर अंतःप्रद्रव्यी जालिका की ओर होता है, जबकि 'trans' (परिपक्व) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है, जहाँ से संशोधित प्रोटीन और लिपिड पुटिकाओं (Vesicles) के रूप में बाहर निकलते हैं।
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सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) करने वाले किसी कण की कुल यांत्रिक ऊर्जा (Total Mechanical Energy) और उसके विस्थापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सरल आवर्त गति कर रहे कण की कुल यांत्रिक ऊर्जा उसके आयाम (Amplitude) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है, और यह ऊर्जा समय के साथ स्थिर रहती है, बशर्ते प्रणाली पर कोई मंदक बल (Damping force) कार्य न कर रहा हो।
2. गति के दौरान जब कण अपनी माध्य स्थिति (Mean position) से गुजरता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है और गतिज ऊर्जा शून्य होती है।
3. जब कण अपने किसी एक चरम बिंदु (Extreme position) पर पहुँचता है, तो उसका त्वरण अपने अधिकतम मान पर होता है, जबकि उसका वेग शून्य हो जाता है।
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल सहसंयोजक बंध (Sigma bonds) होते हैं, और इन्हें 'पैराफिन' (Paraffins) भी कहा जाता है क्योंकि इनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता सामान्य परिस्थितियों में बहुत कम होती है।
2. 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) पेट्रोल (गैसोलीन) की प्रस्फोटन-रोधी (Anti-knocking) क्षमता का माप है, जिसमें अत्यधिक प्रस्फोटन उत्पन्न करने वाले 'n-हेप्टेन' को शून्य (0) और उच्च प्रस्फोटन-रोधी गुण वाले 'आइसो-ऑक्टेन' को 100 अंक दिए जाते हैं।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और इसे cylinders में गंधहीन रूप में भरा जाता है, जिससे सुरक्षा कारणों से रिसाव का पता लगाने के लिए इसमें एथिल मर्कैप्टेन मिलाया जाता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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