त्वरित लिंक्स
General Science
3 views
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिक व जैव रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा की गई थी, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर पाए जाने वाले विशिष्ट ग्लाइकोप्रोटीन एंटीजन (A और B) तथा रक्त प्लाज्मा में उपस्थित प्राकृतिक एंटीबॉडी (Anti-A और Anti-B) के बीच होने वाली प्रति-प्रतिक्रिया (Agglutination) रक्त आधान की सुरक्षा को निर्धारित करती है।
- 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group) सबसे पहले वर्ष 1952 में मुंबई में खोजा गया था, जिसमें व्यक्ति के लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H एंटीजन' की पूर्ण अनुपस्थिति होती है, जिसके कारण ऐसे दुर्लभ व्यक्ति किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान तो कर सकते हैं, किंतु केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
- 3. Rh कारक (Rhesus factor) एक अन्य महत्वपूर्ण प्रोटीन है जो RBC की सतह पर उपस्थित होता है; यदि किसी Rh-धनात्मक (Rh+) व्यक्ति का रक्त किसी Rh-ऋणात्मक (Rh-) व्यक्ति को आधान (Transfusion) किया जाए, तो पहली बार में ही तीव्र रक्त का थक्का जमने (Hemolysis) जैसी घातक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न हो जाती है क्योंकि शरीर में पहले से ही इसके विरुद्ध पर्याप्त एंटीबॉडीज मौजूद होती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज कार्ल लैंडस्टीनर ने की थी, जिसमें आरबीसी की सतह पर एंटीजन और प्लाज्मा में एंटीबॉडी होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि बॉम्बे फेनोटाइप (hh) वाले व्यक्तियों में H एंटीजन अनुपस्थित होता है, जिससे वे सार्वभौमिक दाताओं के रूप में कार्य कर सकते हैं लेकिन केवल इसी समूह से रक्त ले सकते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि Rh-धनात्मक रक्त पहली बार Rh-ऋणात्मक व्यक्ति को देने पर तुरंत गंभीर प्रतिक्रिया नहीं होती, क्योंकि प्राथमिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया धीमी होती है और एंटीबॉडी बनने में समय लगता है; यह समस्या आमतौर पर दूसरी गर्भावस्था या पुनरावृत्ति में होती है (एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस)। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के जैव-रासायनिक तथा प्रतिरक्षावैज्ञानिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा खोजी गई थी, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर पाए जाने वाले विशिष्ट एंटीजन (एग्लूटिनोजन) के प्रकार के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है, जबकि रक्त प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एंटीबॉडी (एग्लूटिनिन) 'एन्टी-A' और 'एन्टी-B' होते हैं।
2. 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H' एंटीजन अनुपस्थित होता है, क्योंकि उनके पास FUT1 जीन का क्रियाशील रूप नहीं होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (जैसे A, B, AB, O) के व्यक्ति से रक्त प्राप्त नहीं कर सकते और उन्हें केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले रक्त की ही आवश्यकता होती है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis fetalis), जिसे गर्भक्ता रक्तकता भी कहते हैं, तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) माता और एक Rh-ऋणात्मक (Rh-) पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, और यह प्रथम गर्भावस्था के दौरान ही प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
4. रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में 'थ्रोम्बोप्लास्टिन' (कारक III) क्षतिग्रस्त ऊतकों और रक्त प्लेटलेट्स द्वारा मुक्त किया जाता है, जो कैल्सियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रोम्बिन में बदलने के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
नाभिकीय भौतिकरी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान किसी भारी नाभिक का दो या दो से अधिक मध्यम आकार के नाभिकों में टूटना द्रव्यमान क्षति (Mass defect) पर आधारित है, जहाँ आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण $E = mc^2$ के अनुसार मुक्त हुई ऊर्जा नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Binding energy per nucleon) में वृद्धि के कारण होती है।
2. सूर्य और अन्य तारों पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और यह प्रक्रिया केवल अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया के रूप में ही संभव है।
3. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' वास्तव में उच्च आवृत्ति की विद्युत चुंबकीय तरंगें होती हैं, जो नाभिक के ऊर्जा स्तरों में संक्रमण के कारण उत्पन्न होती हैं और इनके उत्सर्जन से न तो परमाणु क्रमांक बदलता है और न ही द्रव्यमान संख्या।
4. किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्ध-आयु (Half-life) उसके प्रारंभिक द्रव्यमान और उस पर बाहरी दाब या तापमान की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जबकि उसका क्षय नियतांक (Decay constant) केवल उस विशिष्ट आइसोटोप की आंतरिक प्रकृति पर निर्भर करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पदार्थ के सामान्य गुणों, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का मुख्य कारण अणुओं के बीच लगने वाला ससंजक बल (Cohesive force) है, और तापमान में वृद्धि होने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है, क्योंकि उच्च तापमान पर अणुओं की तापीय ऊर्जा उनके बीच के अंतरआणविक आकर्षण को कमजोर कर देती है।
2. द्रवों में 'श्यानता' (Viscosity) आंतरिक घर्षण के कारण उत्पन्न होती है जो विभिन्न परतों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करती है, और गैसों की श्यानता तापमान बढ़ने पर घट जाती है जबकि द्रवों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, और यदि वस्तु का घनत्व द्रव के घनत्व से अधिक है, तो वस्तु द्रव में डूब जाएगी।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
पर्यावरण शिक्षण में बच्चों को 'प्राथमिक स्तर' पर कैसे सिखाना चाहिए?
→
ध्वनि वेग?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.