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General Science
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार वे होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
- 2. 'हार्ड एंड सॉफ्ट एसिड्स एंड बेसिस' (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल (Hard acids) छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश घनत्व और कम ध्रुवणीयता वाले होते हैं, और वे प्राथमिकता से मृदु क्षारों के साथ अत्यधिक स्थायी और सहसंयोजक यौगिक बनाते हैं।
- 3. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) हमेशा दुर्बल होता है, तथा जल की उपस्थिति में 'ऑर्गेनोसल्फोनिक एसिड' जैसे प्रबल अम्ल लगभग पूर्ण रूप से वियोजित हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: लुईस सिद्धांत के अनुसार, लुईस अम्ल इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही (Electron-pair acceptor) होते हैं और लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन-युग्म दाता (Electron-pair donor) होते हैं। कथन 2 गलत है: HSAB सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल प्राथमिकता से 'कठोर क्षारों' (Hard bases) के साथ और 'मृदु अम्ल' (Soft acids) प्राथमिकता से 'मृदु क्षारों' (Soft bases) के साथ स्थायी यौगिक बनाते हैं (कठोर-कठोर और मृदु-मृदु अन्योन্যक्रिया अधिक स्थायी होती है)। कथन 3 सही है: ब्रॉन्स्टेड-लोरी अवधारणा के तहत, एक प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यंत दुर्बल होता है क्योंकि वह आसानी से प्रोटॉन को पुनः ग्रहण नहीं करता है। इसके बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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शेर?
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तरंग गति और ध्वनि तरंगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि तरंगों का संचरण एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया होती है, क्योंकि संपीडन और विरलन की प्रक्रिया इतनी तीव्र होती है कि ऊष्मा का आदान-प्रदान (Heat exchange) संभव नहीं हो पाता है।
2. लाप्लास द्वारा किए गए संशोधन के अनुसार, न्यूटन के सूत्र में आयतन प्रत्यास्थता गुणांक के स्थान पर समतापीय प्रत्यास्थता गुणांक का उपयोग किया गया, जिससे सामान्य ताप पर हवा में ध्वनि की गति का प्रायोगिक मान (लगभग 332 m/s) सटीक रूप से प्राप्त हुआ।
3. जब कोई ध्वनि स्रोत किसी स्थिर श्रोता की ओर गति करता है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति का मान वास्तविक आवृत्ति से अधिक प्रतीत होता है, और यह परिघटना 'डॉप्लर प्रभाव' (Doppler Effect) कहलाती है।
4. अपश्रव्य तरंगों (Infrasonic waves) की आवृत्ति 20 Hz से कम होती है, जिन्हें मानव कान द्वारा नहीं सुना जा सकता, जबकि पराश्रव्य तरंगों (Ultrasonic waves) का उपयोग सोनार (SONAR) प्रणाली में समुद्र की गहराई मापने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु भौतिकी और नाभिकीय अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय नियतांक (Decay constant, $\lambda$) और उसकी अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) के बीच का संबंध $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिसका अर्थ है कि क्षय नियतांक जितना अधिक होगा, नाभिक की अर्ध-आयु उतनी ही कम होगी।
2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान 'द्रव्यमान क्षति' (Mass defect) ही ऊर्जा में रूपांतरित होती है, जिसे आइंस्टीन के समीकरण $E = \mc^2$ द्वारा समझाया जाता है, और यूरेनियम-235 के एक विखंडन से औसतन लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त होती है।
3. नियंत्रित नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रतिक्रियाओं को पृथ्वी पर संचालित करने के लिए 'टोकामक' (Tokamak) जैसी युक्तियों में अत्यधिक उच्च तापमान और चुंबकीय परिरक्षण (Magnetic confinement) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि संलयन के लिए आवश्यक कूलामी प्रतिकर्षक बल को पार करने हेतु उच्च गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
4. बीटा-क्षय (Beta decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले 'न्यूट्रिनो' और 'एंटी-न्यूट्रिनो' कणों का द्रव्यमान शून्य और आवेश इकाई धनात्मक होता है, जो दुर्बल नाभिकीय बल (Weak nuclear force) के अंतर्गत ऊर्जा और कोणीय संवेग के संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल श्वसन रोग है जो मुख्य रूप से ड्रॉपलेट इन्फेक्शन के माध्यम से फैलता है, और इसके उपचार के लिए 'ओसेल्टामिविर' (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवा का उपयोग किया जाता है।
2. जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis) एक विषाणुजनित मस्तिष्क ज्वर है जिसका संचरण मुख्य रूप से 'मानसनिया' या 'क्यूलैक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और यह सूअर तथा पक्षी जैसे कशेरुकी जीवों में प्रचुर मात्रा में पनपता है।
3. ट्रिकोफाइटन (Trichophyton) प्रजाति के कवक मानव में 'दाद' (Ringworm) रोग का कारण बनते हैं, जो त्वचा पर खुजलीदार चकत्ते उत्पन्न करते हैं, और इनके संक्रमण के निवारण के लिए फ्लूकोनाजोल या क्लोट्रिमजोल जैसी एंटीफंगल औषधियां दी जाती हैं।
4. रेबीज (Hydrophobia) एक जीवाणु जनित घातक रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, और इसका संक्रमण संक्रमित कुत्ते या बिल्ली के लारयुक्त काटने के घाտ के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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एथेन का सूत्र?
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