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General Science
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परमाणु भौतिकी और नाभिकीय अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय नियतांक (Decay constant, $\lambda$) और उसकी अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) के बीच का संबंध $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिसका अर्थ है कि क्षय नियतांक जितना अधिक होगा, नाभिक की अर्ध-आयु उतनी ही कम होगी।
  2. 2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान 'द्रव्यमान क्षति' (Mass defect) ही ऊर्जा में रूपांतरित होती है, जिसे आइंस्टीन के समीकरण $E = \mc^2$ द्वारा समझाया जाता है, और यूरेनियम-235 के एक विखंडन से औसतन लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त होती है।
  3. 3. नियंत्रित नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रतिक्रियाओं को पृथ्वी पर संचालित करने के लिए 'टोकामक' (Tokamak) जैसी युक्तियों में अत्यधिक उच्च तापमान और चुंबकीय परिरक्षण (Magnetic confinement) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि संलयन के लिए आवश्यक कूलामी प्रतिकर्षक बल को पार करने हेतु उच्च गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  4. 4. बीटा-क्षय (Beta decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले 'न्यूट्रिनो' और 'एंटी-न्यूट्रिनो' कणों का द्रव्यमान शून्य और आवेश इकाई धनात्मक होता है, जो दुर्बल नाभिकीय बल (Weak nuclear force) के अंतर्गत ऊर्जा और कोणीय संवेग के संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि रेडियोएक्टिव क्षय नियम के अनुसार अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) और क्षय नियतांक ($\lambda$) व्युत्क्रमानुपाती होते हैं ($T_{1/2} = 0.693 / \lambda$)। कथन 2 सही है; नाभिकीय विखंडन में उत्पादित नाभिकों का कुल द्रव्यमान प्रारंभिक नाभिक से कम होता है (द्रव्यमान क्षति) और आइंस्टीन के ऊर्जा-द्रव्यमान तुल्यता सिद्धांत (विकिपीडिया संदर्भ) के अनुसार लगभग 200 MeV ऊर्जा निकलती है। कथन 3 सही है, टोकामक चुंबकीय संपीड़न द्वारा प्लाज्मा को नियंत्रित करता है जो संलयन के लिए आवश्यक है। कथन 4 गलत है क्योंकि न्यूट्रिनो और एंटी-न्यूट्रिनो का विद्युत आवेश शून्य होता है, इकाई धनात्मक नहीं।
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