History of India
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महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद गांधीजी ने गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर एक वर्ष तक ब्रिटिश भारत का भ्रमण किया और राजनीति से तटस्थ रहे, जिसके बाद उन्होंने वर्ष 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में चंपारण के किसानों की समस्याओं से अवगत होकर भाग लिया था।
- 2. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर बिहार गए गांधीजी के साथ राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी, महादेव देसाई और अनसूया साराभाई जैसे प्रमुख नेता भी उनके साथ जुड़े थे, जिन्होंने तिनकठिया प्रथा के विरुद्ध जाँच में सहयोग किया था।
- 3. खेड़ा सत्याग्रह (1918) के दौरान फसलें बर्बाद होने और 'संहिता नियमों' (Revenue Code) के तहत लगान माफी का हक होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली न रोकने पर, गांधीजी ने किसानों से 'लगान न अदायगी' (No-Tax Campaign) का सफल आह्वान किया था।
- 4. असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान चौरी-चौरा (गोरखपुर) में हुई हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने बारदोली में कांग्रेस की बैठक बुलाकर इस आंदोलन को अचानक स्थगित करने की घोषणा की थी, जिससे देश के कई प्रमुख नेताओं जैसे चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने इस निर्णय का स्वागत किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से लौटने के पश्चात गांधीजी ने गोखले के परामर्श पर पूरे एक वर्ष तक देश का भ्रमण किया और 1916 के लखनऊ अधिवेशन में राजकुमार शुक्ल के संपर्क में आए। कथन 2 गलत है क्योंकि अनसूया साराभाई अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) से जुड़ी थीं, न कि चंपारण सत्याग्रह से (चंपारण में ब्रजकिशोर प्रसाद, महादेव देसाई, नरहरि पारिख, राजेंद्र प्रसाद आदि शामिल थे)। कथन 3 सही है क्योंकि खेड़ा सत्याग्रह में फसल नष्ट होने पर लगान माफी के नियमों के तहत गांधीजी और सरदार पटेल ने नो-टैक्स कैंपेन का नेतृत्व किया था। कथन 4 गलत है क्योंकि चौरी-चौरा घटना के बाद आंदोलन स्थगन से सीआर दास और मोतीलाल नेहरू जैसे नेता अत्यधिक क्षुब्ध थे और उन्होंने स्वराज पार्टी का गठन कर लिया था, वे इस निर्णय के समर्थक नहीं थे। विकिपीडिया संदर्भ
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड…
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों…
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार तथा राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने कानपुर की सैन्य कमान संभालते हुए ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यूरोज की संयुक्त सेनाओं को शुरुआती मुठभेड़ों में करारी शिकस्त दी, जिसके बाद अंग्रेजों ने कानपुर पर कभी अधिकार नहीं किया।
3. सती चौरा घाट की दुखद घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल के नेतृत्व में कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया गया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए और उनका अंतिम जीवन रहस्यमय बना रहा।
4. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर मध्य भारत और कालपी के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध सैन्य अभियानों का समन्वय किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह के दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम
3. कानपुर - मेजर जनरल हैवलॉक
4. झांसी और ग्वालियर - ह्यूरोज
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया था, जिसके कारण सरकार को भविष्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि से होने वाले वित्तीय लाभ का हिस्सा नहीं मिल पाया, जबकि जमींदारों की स्थिति अत्यधिक मजबूत हो गई।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari System) में ब्रिटिश सरकार और व्यक्तिगत किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें लगान सीधे किसानों से वसूला जाता था और भूमि का स्वामित्व किसानों के पास होता था, किंतु राजस्व की दरें अत्यधिक उच्च और अनम्य थीं।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान या जमींदार के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम समुदाय या महाल के स्तर पर किया जाता था, और राजस्व भुगतान के लिए पूरा ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर व्यवसायीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिससे गरीब किसानों को उनकी फसलों के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य का भारी लाभ मिला और ग्रामीण ऋणग्रस्तता पूरी तरह समाप्त हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक प्रयोग शुरू हो चुका था, जिसके कारण किसानों ने जंगलों को साफ करके उपजाऊ भूमि तैयार की और स्थायी कृषि बस्तियों का निर्माण किया।
2. उत्तर वैदिक काल में 'गोत्र' प्रथा की संस्थागत स्थापना हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ 'गोष्ठ' या वह स्थान है जहाँ पूरे कुल का मवेशी पाला जाता था, और इस काल में गोत्र के भीतर विवाह (सगोत्र विवाह) पूरी तरह वर्जित कर दिए गए।
3. ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म पर आधारित थी, जहाँ किसी भी व्यक्ति का वर्ण उसके जन्म के साथ ही तय हो जाता था और उसमें परिवर्तन करने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
4. वैदिक साहित्य में 'शतपथ ब्राह्मण' में कृषि की चारों क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो उत्तर वैदिक काल में कृषि अर्थव्यवस्था के महत्व को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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