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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल की नीतियों, विचारधाराओं तथा राजनीतिक रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी और सुरेंद्रनाथ बनर्जी) का यह अटूट विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है, और वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए ब्रिटिश न्यायप्रियता पर भरोसा करते हुए 'प्रार्थना, याचिका और प्रतिनिधिमंडल' की संवैधानिक पद्धति का पालन करते थे।
  2. 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उदित 'स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन' को बंगाल तक ही सीमित रखने पर नरमपंथियों ने जोर दिया, जबकि गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल) ने इसे पूरे देश में फैलाने तथा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध 'निष्क्रिय प्रतिरोध' (Passive Resistance) का आह्वान किया था।
  3. 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) शब्द को अपने लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, जिसे लेकर नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच गंभीर वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो गए थे।
  4. 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर नरम दल और गरम दल के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद ब्रिटिश पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे कांग्रेस का संगठन आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया और अगले 9 वर्षों तक कांग्रेस का कोई अधिवेशन नहीं हुआ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि नरमपंथी नेताओं की राजनीति ब्रिटिश न्यायप्रियता पर आधारित थी, 1905 के स्वदेशी आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने को लेकर गरम दल और नरम दल में मतभेद था, तथा 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ था। कथन 4 गलत है क्योंकि सूरत अधिवेशन (1907) में वैचारिक मतभेदों और अध्यक्ष पद के विवाद के कारण कांग्रेस का विभाजन हुआ था, किंतु कांग्रेस का संगठन समाप्त नहीं हुआ था और इसके बाद भी कांग्रेस के अधिवेशन नियमित रूप से होते रहे थे। इस कालखंड के राजनीतिक घटनाक्रमों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह के दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली - जॉन निकलसन 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम 3. कानपुर - मेजर जनरल हैवलॉक 4. झांसी और ग्वालियर - ह्यूरोज उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झांसी के किले की घेराबंदी किए जाने के बाद रानी लक्ष्मीबाई ने अद्भुत वीरता का परिचय दिया और तात्या टोपे के नेतृत्व में आई राहत सेना के सहयोग से झांसी की रक्षा करते हुए अंग्रेजों को पीछे हटने के लिए विवश कर दिया था। 2. झांसी के पतन के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में प्रस्थान किया, जहाँ दोनों की संयुक्त सेनाओं ने ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज का कड़ा मुकाबला किया, किंतु कालपी के युद्ध में पराजित होने के बाद उन्होंने ग्वालियर की ओर कूच किया। 3. ग्वालियर के सिंधिया शासक ने अंग्रेजों का साथ देते हुए विद्रोहियों का कड़ा विरोध किया, किंतु तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर के सैनिकों और जनता के सहयोग से किले पर अधिकार कर लिया और नाना साहब को पेशवा घोषित करते हुए एक नई शासन व्यवस्था की नींव रखी। 4. ग्वालियर की अंतिम निर्णायक लड़ाई (कोटा-की-सराय का युद्ध) के दौरान रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे ने सफल पलायन कर नरवर के रास्ते राजस्थान के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध जारी रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के कठोर दमन चक्र के तहत गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना (Infantry) के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा के क्षेत्रों में स्थानीय सिपाहियों, अफीम गोदाम के कर्मचारियों और ब्रिटिश-विरोधी तत्वों ने अंग्रेजी संचार साधनों, नावों और सरकारी खजाने को निशाना बनाते हुए विद्रोह का झंडा बुलंद किया था। 4. छपरा में विद्रोहियों ने कमिश्नर विलियम टेलर को पराजित कर शहर पर पूर्ण अधिकार कर लिया था और वहां अंग्रेजों को खदेड़कर एक स्थायी समानांतर ब्रिटिश-विरोधी स्वतंत्र सरकार की औपचारिक स्थापना कर दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया था, जिसके कारण सरकार को भविष्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि से होने वाले वित्तीय लाभ का हिस्सा नहीं मिल पाया, जबकि जमींदारों की स्थिति अत्यधिक मजबूत हो गई। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari System) में ब्रिटिश सरकार और व्यक्तिगत किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें लगान सीधे किसानों से वसूला जाता था और भूमि का स्वामित्व किसानों के पास होता था, किंतु राजस्व की दरें अत्यधिक उच्च और अनम्य थीं। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान या जमींदार के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम समुदाय या महाल के स्तर पर किया जाता था, और राजस्व भुगतान के लिए पूरा ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता था। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर व्यवसायीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिससे गरीब किसानों को उनकी फसलों के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य का भारी लाभ मिला और ग्रामीण ऋणग्रस्तता पूरी तरह समाप्त हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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