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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 15 times

वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक प्रयोग शुरू हो चुका था, जिसके कारण किसानों ने जंगलों को साफ करके उपजाऊ भूमि तैयार की और स्थायी कृषि बस्तियों का निर्माण किया।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में 'गोत्र' प्रथा की संस्थागत स्थापना हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ 'गोष्ठ' या वह स्थान है जहाँ पूरे कुल का मवेशी पाला जाता था, और इस काल में गोत्र के भीतर विवाह (सगोत्र विवाह) पूरी तरह वर्जित कर दिए गए।
  3. 3. ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म पर आधारित थी, जहाँ किसी भी व्यक्ति का वर्ण उसके जन्म के साथ ही तय हो जाता था और उसमें परिवर्तन करने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
  4. 4. वैदिक साहित्य में 'शतपथ ब्राह्मण' में कृषि की चारों क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो उत्तर वैदिक काल में कृषि अर्थव्यवस्था के महत्व को दर्शाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वैदिक सभ्यता भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण कालखंड है। कथन 1 असत्य है क्योंकि ऋग्वैदिक काल के लोग लोहे (कृष्ण अयस) से परिचित नहीं थे; लोहे का व्यापक प्रयोग उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व से आगे) में आरंभ हुआ। कथन 2 सत्य है, उत्तर वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था का उदय हुआ और सगोत्र विवाह वर्जित किए गए। कथन 3 असत्य है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर नहीं बल्कि कर्म (व्यवसाय) पर आधारित थी। कथन 4 सत्य है, 'शतपथ ब्राह्मण' में कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण मिलता है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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