History of India
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, प्रमुख संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धअद्वैतवाद' (Pure Non-dualism) के दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जगत माया का परिणाम नहीं बल्कि स्वयं ब्रह्म का वास्तविक रूपांतरण है, तथा उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की 'पुष्टिमार्ग' (Grace-based devotion) के माध्यम से उपासना पर विशेष बल दिया।
- 2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'फिरदौसी सिलसिला' मुख्य रूप से बिहार क्षेत्र में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध एवं सम्मानित संत शेख बदरुद्दीन समरकंदी थे, जिन्होंने स्थानीय जनता के बीच आध्यात्मिक और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 3. मध्यकालीन संत मीराबाई ने राजसी सुखों का त्याग कर भगवान कृष्ण को अपना पति मानकर 'माधुर्य भाव' की भक्ति की, और उनके पद मुख्य रूप से मारवाड़ी और ब्रज भाषा में रचे गए हैं, जिन्हें राजस्थान और गुजरात के लोक-मानस में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
- 4. सूफी संतों में 'सुहरावर्दी सिलसिला' ने चिश्ती सिलसिले के ठीक विपरीत रुख अपनाते हुए शाही अनुदान, जागीरें और उच्च राजकीय पदों को सहर्ष स्वीकार किया, तथा उनके संतों का मानना था कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए राज्य का संरक्षण और धन का होना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 3 और 4 सही हैं, जबकि कथन 2 गलत है। कथन 2 इसलिए गलत है क्योंकि बिहार में फिरदौसी सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत शेख बदरुद्दीन समरकंदी नहीं बल्कि **शर्फुद्दीन अहमद याह्या मनेरी** (Shaikh Sharfuddin Yahya Maneri) थे, जिनकी खानकाह मनेर और बिहारशरीफ में स्थित थी। वल्लभाचार्य ने 'शुद्धअद्वैतवाद' और 'पुष्टिमार्ग' का प्रतिपादन किया था। सूफियों और संतों के विस्तृत इतिहास के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा…
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम…
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बंगाल विभाजन (1905) के निर्णय की घोषणा के पश्चात उपजे स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था, जिसके बाद सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने इस आंदोलन को पूरे देश में फैलाने का बीड़ा उठाया।
2. इस आंदोलन के दौरान रचनात्मक कार्यों (Constructive Swadeshi) के तहत बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई जिसके प्रथम प्रधानाचार्य अरविंद घोष बनाए गए, तथा राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) का गठन वर्ष 1906 में किया गया था।
3. स्वदेशी आंदोलन के समर्थन में आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर कई स्वदेशी उद्योगों, बुनकर समितियों और वित्तीय संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4. मुस्लिम बहुल आबादी वाले पूर्वी बंगाल में इस आंदोलन को अपार जनसमर्थन मिला, और यहाँ के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आंदोलन की हर सभा में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए ब्रिटिश विभाजनकारी नीतियों का खुलकर विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष, रणनीतियों तथा राष्ट्रीय आंदोलन के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक 'नरमपंथी' चरण (1885-1905) के नेताओं का मुख्य विश्वास 'ब्रिटिश न्यायप्रियता' में था, और वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए मुख्य रूप से प्रार्थना, याचिका, प्रतिनिधिमंडल और प्रेस के माध्यम से 'संवैधानिक आंदोलन' की नीति पर चलते थे जिसे गरम दल के नेताओं ने 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' (Political Mendicancy) कहा था।
2. वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में उपजे स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के दौरान गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल तथा अरविंद घोष) ने इस आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश में फैलाने तथा ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 'निष्क्रिय प्रतिरोध' (Passive Resistance) और स्वराज प्राप्ति का सीधा आह्वान किया था।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) को अपने लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, किंतु गरम दल और नरम दल के वैचारिक मतभेदों के कारण वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो गया और संगठन पर नरमपंथियों का नियंत्रण हो गया।
4. सूरत विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने गरम दल के नेताओं के विरुद्ध कठोर दमन चक्र चलाया, जिसके तहत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर 6 वर्ष के कारावास के लिए मांडले (बर्मा) भेज दिया गया, जबकि लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल को भी निर्वासित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास किसी एक केंद्रीय संगठन, सर्वमान्य अखिल भारतीय नेतृत्व तथा एकसमान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण का पूर्ण अभाव था, जिससे स्थानीय नेता अपने सीमित भू-भाग और हितों से बंधे रहे।
2. भारत के अधिकांश बड़े शासकों, रियासतों के राजाओं (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम) तथा आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से विरोध किया और ब्रिटिश शासन का समर्थन किया।
3. विद्रोही सैनिकों के पास हथियारों की भारी कमी, लचर सैन्य अनुशासन औरसटीक संचार साधनों का अभाव था, जबकि ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक तकनीक, रेलवे और टेलीग्राफ का सुदृढ़ लाभ था।
4. विद्रोहियों के पास दिल्ली को केंद्र बनाकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को नाममात्र का नेता तो बनाया गया, किंतु उनके पास अंग्रेजों के विरुद्ध दीर्घकालिक आर्थिक संसाधन और युद्ध की कोई सुनियोजित रणनीति नहीं थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापतियों को अपनी गुरिल्ला युद्ध शैली से कड़ी चुनौती दी।
3. लखनऊ की अंतिम रक्षा और ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित करने के दौरान सर कॉलिन कैंपबेल और सर जेम्स आउट्राम ने मुख्य भूमिका निभाई, तथा बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और पेंशन स्वीकार कर ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने अत्यधिक इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के राजा के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया तथा युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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