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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 19 times

1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विद्रोहियों के पास किसी एक केंद्रीय संगठन, सर्वमान्य अखिल भारतीय नेतृत्व तथा एकसमान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण का पूर्ण अभाव था, जिससे स्थानीय नेता अपने सीमित भू-भाग और हितों से बंधे रहे।
  2. 2. भारत के अधिकांश बड़े शासकों, रियासतों के राजाओं (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम) तथा आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से विरोध किया और ब्रिटिश शासन का समर्थन किया।
  3. 3. विद्रोही सैनिकों के पास हथियारों की भारी कमी, लचर सैन्य अनुशासन औरसटीक संचार साधनों का अभाव था, जबकि ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक तकनीक, रेलवे और टेलीग्राफ का सुदृढ़ लाभ था।
  4. 4. विद्रोहियों के पास दिल्ली को केंद्र बनाकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को नाममात्र का नेता तो बनाया गया, किंतु उनके पास अंग्रेजों के विरुद्ध दीर्घकालिक आर्थिक संसाधन और युद्ध की कोई सुनियोजित रणनीति नहीं थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

1857 का विद्रोह भारत का पहला व्यापक स्वतंत्रता संग्राम था, किंतु इसके असफल होने के कई आंतरिक और बाह्य कारण थे। इसमें नेतृत्व की कमी, एकसमान राजनीतिक दृष्टिकोण का अभाव, भारतीय राजाओं द्वारा अंग्रेजों का साथ देना तथा आधुनिक संसाधनों की कमी मुख्य रूप से उत्तरदायी थे। इस ऐतिहासिक घटना के विस्तृत विश्लेषण के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, प्रमुख संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धअद्वैतवाद' (Pure Non-dualism) के दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जगत माया का परिणाम नहीं बल्कि स्वयं ब्रह्म का वास्तविक रूपांतरण है, तथा उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की 'पुष्टिमार्ग' (Grace-based devotion) के माध्यम से उपासना पर विशेष बल दिया। 2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'फिरदौसी सिलसिला' मुख्य रूप से बिहार क्षेत्र में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध एवं सम्मानित संत शेख बदरुद्दीन समरकंदी थे, जिन्होंने स्थानीय जनता के बीच आध्यात्मिक और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3. मध्यकालीन संत मीराबाई ने राजसी सुखों का त्याग कर भगवान कृष्ण को अपना पति मानकर 'माधुर्य भाव' की भक्ति की, और उनके पद मुख्य रूप से मारवाड़ी और ब्रज भाषा में रचे गए हैं, जिन्हें राजस्थान और गुजरात के लोक-मानस में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। 4. सूफी संतों में 'सुहरावर्दी सिलसिला' ने चिश्ती सिलसिले के ठीक विपरीत रुख अपनाते हुए शाही अनुदान, जागीरें और उच्च राजकीय पदों को सहर्ष स्वीकार किया, तथा उनके संतों का मानना था कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए राज्य का संरक्षण और धन का होना आवश्यक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के कठोर दमन चक्र के तहत गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना (Infantry) के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा के क्षेत्रों में यूरोपीय अधिकारियों तथा अफीम एजेंटों के विरुद्ध स्थानीय सिपाहियों, अफीम गोदाम के कर्मचारियों और भूमिहीनों ने अंग्रेजों के संचार साधनों को बाधित करते हुए विद्रोह का झंडा बुलंद किया था। 4. छपरा में विद्रोहियों ने कमिश्नर विलियम टेलर को पराजित कर शहर पर पूर्ण अधिकार कर लिया था और वहां एक समानांतर ब्रिटिश-विरोधी सरकार की औपचारिक स्थापना की घोषणा कर दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की स्थाई व्यवस्था की तथा घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की प्रथा को कड़ाई से लागू किया, साथ ही उसने साम्राज्य में खाद्यान्न की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 'शहना-ए-मंडी' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की थी। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी (दलताबाद) स्थानांतरित की और राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर तांबे और कांसे की 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) चलाई, जो अपने समय में पूर्ण रूप से सफल और अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध हुई। 3. फिरोजशाह तुगलक ने किसानों पर सिंचाई संकट को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया तथा शरियत के नियमों के विरुद्ध जाकर सभी प्रकार के अतिरिक्त करों को समाप्त करते हुए केवल कुरान द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, जकात, जजिया और खुम्स—को ही वैध करार दिया। 4. इltutmish (इल्तुतमिश) ने अपने शासनकाल में 'इकता प्रणाली' को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को नकद वेतन देने के स्थान पर राजस्व एकत्र करने के लिए भूमि के टुकड़े (इकता) प्रदान किए जाते थे, और शुरुआती दौर में ये इक्ता वंशानुगत नहीं होते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के लिए स्थाई और नगद वेतन प्रणाली की शुरुआत की तथा सैनिकों के घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की प्रथा को कड़ाई से लागू किया, ताकि भ्रष्टाचार को रोका जा सके। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरीज (दलताबाद) स्थानांतरित की, जिसका मुख्य उद्देश्य साम्राज्य के केंद्रीय भाग से दक्षिण भारत पर बेहतर नियंत्रण स्थापित करना था, और इस दौरान उसने तांबे और कांसे के 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) का प्रचलन शुरू किया जो पूर्णतः सफल साबित हुआ। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार किसानों के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया और हक्क-ए-शर्ब (सिंचाई कर) नामक कर वसूल किया, साथ ही उसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया। 4. इल्तुतमिश ने अपने शासनकाल में 'इकता प्रणाली' को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को नगद वेतन देने के बजाय राजस्व एकत्र करने के लिए भूमि के टुकड़े (इकता) प्रदान किए जाते थे, और यह वंशानुगत नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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