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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की स्थाई व्यवस्था की तथा घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की प्रथा को कड़ाई से लागू किया, साथ ही उसने साम्राज्य में खाद्यान्न की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 'शहना-ए-मंडी' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
  2. 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी (दलताबाद) स्थानांतरित की और राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर तांबे और कांसे की 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) चलाई, जो अपने समय में पूर्ण रूप से सफल और अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध हुई।
  3. 3. फिरोजशाह तुगलक ने किसानों पर सिंचाई संकट को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया तथा शरियत के नियमों के विरुद्ध जाकर सभी प्रकार के अतिरिक्त करों को समाप्त करते हुए केवल कुरान द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, जकात, जजिया और खुम्स—को ही वैध करार दिया।
  4. 4. इltutmish (इल्तुतमिश) ने अपने शासनकाल में 'इकता प्रणाली' को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को नकद वेतन देने के स्थान पर राजस्व एकत्र करने के लिए भूमि के टुकड़े (इकता) प्रदान किए जाते थे, और शुरुआती दौर में ये इक्ता वंशानुगत नहीं होते थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को मजबूत करने के लिए नकद वेतन, घोड़ों को दागने, हुलिया प्रथा तथा बाजार नियंत्रण (शहना-ए-मंडी) की शुरुआत की थी। कथन 2 गलत है क्योंकि मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा चलाई गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) योजना प्रशासनिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह विफल साबित हुई थी, क्योंकि लोगों ने बड़े पैमाने पर तांबे के जाली सिक्के बनाने शुरू कर दिए थे। कथन 3 सही है, फिरोजशाह तुगलक ने नहरों का निर्माण कराया और केवल चार शरियत-स्वीकृत करों को वैध रखा। कथन 4 सही है, इल्तुतमिश ने इकता प्रणाली को संस्थागत रूप दिया जो आरंभ में गैर-वंशानुगत थी। दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों और उनके प्रशासन के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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