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History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 'भूमिगत गतिविधियों' (Underground Activities) के संचालन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के प्रारंभिक गठन व विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, अरुणा आसफ अली और उषा मेहता जैसे युवा नेताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में भूमिगत रहकर रेडियो प्रसारण और तोड़फोड़ की गतिविधियों के माध्यम से आंदोलन को जीवंत बनाए रखा।
- 2. बॉम्बे से गुप्त रूप से कांग्रेस रेडियो (Congress Radio) का संचालन करने वाली उषा मेहता ने नियमित रूप से भूमिगत प्रसारण के माध्यम से ब्रिटिश दमन नीतियों और आंदोलन के समाचारों को प्रसारित किया था।
- 3. 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) की स्थापना का विचार सबसे पहले मोहन सिंह के मन में आया था, जिन्होंने जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों को मिलाकर इस सेना के गठन की रूपरेखा तैयार की थी।
- 4. बैंकॉक सम्मेलन (जून 1942) के दौरान 'भारतीय स्वतंत्रता लीग' (Indian Independence League) का औपचारिक गठन किया गया और रास बिहारी बोस को इसका अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने आगे चलकर सिंगापुर में सेना की कमान औपचारिक रूप से सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सही हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया, तब जयप्रकाश नारायण, अरुणा आसफ अली, राम मनोहर लोहिया और उषा मेहता जैसे नेताओं ने भूमिगत (Underground) रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया। उषा मेहता ने बॉम्बे से 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन कर क्रांतिकारी संदेश प्रसारित किए थे। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्व एशिया में कैप्टन मोहन सिंह के प्रयासों से आज़ाद हिंद फौज (INA) की नींव पड़ी और बैंकॉक सम्मेलन के बाद रास बिहारी बोस के आमंत्रण पर सुभाष चंद्र बोस ने इसका नेतृत्व संभाला था। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं सैन्य उपलब्धियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्द्धन के शासनकाल में कन्नौज को 'महासंविधानिक' केंद्र के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई तथा चीनी यात्री ह्वेनसांग ने हर्ष द्वारा प्रयाग की महामोक्ष परिषद में दान दिए जाने और बौद्ध धर्म की महायान शाखा को विशेष संरक्षण प्रदान करने का विस्तृत वर्णन किया है।
2. पल्लव शासक महेन्द्रवर्मन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन मत का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया, और उसके शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मक (मोनोलिथिक) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य आरंभ हुआ था।
3. चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस विजय का विस्तृत तथा प्रामाणिक उल्लेख कवि रवि कीर्ति द्वारा रचित 'ऐहोले प्रशस्ति' में प्राप्त होता है।
4. चोल सम्राट राजेंद्र प्रथम ने अपनी शक्तिशाली नौसेना के माध्यम से श्रीविजय साम्राज्य (सुमात्रा, जावा और मलय प्रायद्वीप) पर सफल सैन्य अभियान चलाया था, तथा गंगा नदी की घाटी तक अपनी सेना भेजने के कारण 'गंगैकोंडचोल' की उपाधि धारण की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के मध्यम प्रतिपदा (अष्टांगिक मार्ग) और जैन धर्म के त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र) दोनों ही वेदों की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हुए यज्ञ और कर्मकांड के कठोर नियमों का खंडन करते हैं।
2. जैन धर्म में आत्मा (जीव) की स्वतंत्र सत्ता को पूर्णतः स्वीकार किया गया है तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए कायाक्लेश और संथारा (संलेखना) पद्धति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, जबकि बौद्ध धर्म 'अनआत्मा' (अनात्मवाद) के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है जिसके अनुसार किसी भी स्थायी या शाश्वत आत्मा का अस्तित्व नहीं है।
3. बौद्ध धर्म के प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में महाकस्सप की अध्यक्षता में अजातशत्रु के शासनकाल में हुआ था, जिसमें सुत्तपिटक और विनयपिटक का संकलन किया गया था।
4. जैन धर्म की प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसके दौरान जैन ग्रंथों के बिखरे हुए ज्ञान को संकलित करने के लिए 'अंगों' का निर्माण किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक नियंत्रण और सम्राट अशोक के धम्म तथा अभिलेखीय साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या अट्ठारह थी, तथा कृषि विभाग के प्रमुख को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था जो राजकीय भूमि (सीता भूमि) की कृषि व्यवस्था का संचालन करता था।
2. अशोक के लघु शिलालेखों और स्तंभ लेखों में प्रयुक्त प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि के अलावा, उत्तर-पश्चिम भारत के अभिलेखों में ग्रीक (यूनानी) और अरामई लिपि का भी प्रयोग मिलता है, तथा कंधार से प्राप्त द्विभाषिक (Greek-Aramaic) अभिलेख इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
3. अशोक के धम्म की नीति मुख्य रूप से बौद्ध धर्म का प्रचार करने और साम्राज्य के सभी नागरिकों को अनिवार्य रूप से बौद्ध धर्म में दीक्षित करने के लिए बनाई गई थी, जिसके तहत उसने आजीवकों और अन्य संप्रदायों को दिए जाने वाले सभी राजकीय संरक्षण व गुफाओं को तुरंत प्रभाव से जप्त कर लिया था।
4. मौर्य काल में नगर प्रशासन की देखरेख के लिए मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में छह समितियों (प्रत्येक में पाँच सदस्यों) का उल्लेख किया है, जो उद्योग-शिल्प, विदेशी यात्रियों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार-वाणिज्य और कर वसूली जैसी व्यवस्थाओं का संचालन करती थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मोहम्मद बिन तुगलक ने 1329-30 ई. में चांदी की कमी के कारण कौन सी मुद्रा चलाई थी?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के कालक्रम और उनके प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले 'दांडी मार्च' के दौरान महात्मा गांधी ने नमक कानून तोड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को प्रतिबंधित कर दिया और लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग लिया था।
2. मार्च 1931 में संपन्न 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने तथा समुद्र तट के पास के गांवों को नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी, जबकि कांग्रेस की ओर से सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करना स्वीकार किया गया था।
3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस की ओर से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जिन्होंने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की मांग का पुरजोर समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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