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History of India
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मोहम्मद बिन तुगलक ने 1329-30 ई. में चांदी की कमी के कारण कौन सी मुद्रा चलाई थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उसने चांदी के स्थान पर सांकेतिक मुद्रा शुरू की।
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और उसकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मनसबदारी व्यवस्था को औपचारिक रूप से अकबर द्वारा वर्ष 1595-96 में शुरू किया गया था, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को 'जात' और 'सवार' पद प्रदान किए जाते थे जहाँ 'जात' उसके व्यक्तिगत दर्जे और वेतन को इंगित करता था तथा 'सवार' उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या को निर्धारित करता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी प्रणाली के अंतर्गत 'दो-अस्पा और सिह-अस्पा' (Do-aspa and Sih-aspa) की नवीन व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत चयनित मनसबदारों को बिना अपने 'जात' पद को बढ़ाए अतिरिक्त घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति दी जाती थी।
3. शाहजहां के शासनकाल के दौरान मनसबदारी प्रणाली में 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत यदि जागीर से प्राप्त होने वाला राजस्व पूरे बारह महीने के खर्च के बराबर होता था, तो उसे 'बारहमाहा' कहा जाता था, और आय घटने पर आनुपातिक रूप से वेतन घटा दिया जाता था।
4. औरंगजेब के शासनकाल में मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण 'जागीर संकट' (Crisis of Jagirs) उत्पन्न हो गया, क्योंकि उपलब्ध खाली जागीरें (पाइवली भूमि) मनसबदारों की तुलना में बहुत कम थीं, जिसके कारण सम्राट ने 'मशरूत' (सशर्त) पदों की व्यवस्था समाप्त कर दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल से बाहर इस आंदोलन के प्रसार, प्रमुख नेताओं की भूमिका तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने बॉम्बे और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में तथा अजीत सिंह और सैयद حیدر رضا ने उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का सफल नेतृत्व किया था।
2. मद्रास प्रेसीडेंसी में स्वदेशी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने और दक्षिण भारत में इसका मुखर प्रसार करने में वी. चिदंबरम पिलर (VO Chidambaram Pillai) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिन्होंने स्वदेशी नेविगेशन कंपनी की स्थापना कर ब्रिटिश शिपिंग कंपनी को कड़ी चुनौती दी थी।
3. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया था, किंतु गरमपंथी नेता बंगाल से बाहर इस आंदोलन के विस्तार और इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने को लेकर नरमपंथियों के साथ पूर्णतः सहमत नहीं थे।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की माँग को बल देते हुए कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना अगस्त 1906 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा का प्रसार करना था जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र नाथ बोस बने थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन के नियंत्रण में चला गया, तथा 'भारत के गवर्नर-जनरल' पद को समाप्त कर उसे सीधे ब्रिटिश कैबिनेट के प्रति उत्तरदायी 'भारत के वायसराय' के रूप में रूपांतरित कर दिया गया, और लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) में देशी रियासतों के विलय की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त करने की घोषणा की गई और भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार न करने तथा भारतीय राजाओं के गोद लेने के अधिकार को मान्यता दी गई।
3. घोषणा पत्र में यह स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों के धार्मिक और सामाजिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा नस्ल, जन्म या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सभी को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा।
4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की संस्तुतियों को लागू किया गया, जिसके तहत सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा तोपखाने जैसे संवेदनशील सैन्य विभागों पर पूर्णतः ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों के नेतृत्व, सैन्य गतिविधियों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सैनिकों द्वारा दिल्ली पहुँचने के बाद, वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस अखिल भारतीय विद्रोह का औपचारिक प्रतीक और सर्वोच्च कमांडर घोषित किया गया था।
2. दिल्ली में विद्रोहियों का वास्तविक सैन्य नेतृत्व जनरल बख्त खान के हाथों में था, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और जिन्हें सम्राट द्वारा 'साहिब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि प्रदान की गई थी।
3. दिल्ली के पतन के उपरांत ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन द्वारा कश्मीरी गेट पर अधिकार कर लिया गया, जिसके बाद बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया गया और उनके पुत्रों को सरेआम गोली मार दी गई।
4. अंग्रेजों द्वारा मुकदमा चलाए जाने के पश्चात बहादुर शाह जफर को राजद्रोह के आरोप में बरी कर दिया गया और उन्हें गरिमापूर्ण तरीके से दिल्ली में ही नजरबंद रहने की अनुमति दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसके मूल्यांकन के संदर्भ में विभिन्न इतिहासकारों एवं समकालीन विचारकों के कथनों पर विचार कीजिए:
1. इतिहासकार एस.एन. सेन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'एटीन फिफ्टी सेवन' (1857) में यह निष्कर्ष निकाला था कि 'यह विद्रोह अपनी शुरुआत में धर्म के संघर्ष के रूप में शुरू हुआ था और इसका अंत स्वतंत्रता संग्राम के रूप में हुआ।'
2. प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने 1857 के विद्रोह को 'एक पूर्णतः देशभक्तिपूर्ण और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम' की संज्ञा दी थी, जिसमें जनता और सैनिकों ने विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए संगठित प्रयास किया था।
3. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में यह स्वीकार किया था कि 1857 की घटना केवल एक सैनिक विद्रोह (Sepoy Mutiny) मात्र नहीं थी, बल्कि यह अंग्रेजों के विरुद्ध एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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