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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक प्रयोग शुरू हो चुका था और इसे 'कृष्ण अयस' कहा जाता था, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे के ज्ञान के साथ कृषि अर्थव्यवस्था में स्थायित्व आया।
  2. 2. शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा वर्णित है, जो उत्तर वैदिक काल के दौरान आर्यों के पूर्व की ओर गंगा-यमुना दोआब और सदाानीरा (गंडक) नदी की घाटी तक विस्तार का प्रमाण देती है।
  3. 3. ऋग्वेद के दसवें मंडल में वर्णित 'पुरुष सूक्त' में पहली बार समाज के चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) की उत्पत्ति का उल्लेख मिलता है।
  4. 4. वैदिक कालीन नदियों में 'कुभा' (काबुल), 'क्रमु' (कुर्रम), 'गोमती' (गोमल) और 'सुवास्तु' (स्वाट) नदियाँ वर्तमान अफगानिस्तान के क्षेत्र में स्थित थीं, जिन्हें ऋग्वेद में महत्वपूर्ण नदियों के रूप में दर्शाया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि ऋग्वैदिक काल के लोगों को तांबे या कांसे (अयस) का ज्ञान था, लेकिन लोहे का ज्ञान नहीं था। लोहे का व्यापक प्रयोग उत्तर वैदिक काल में शुरू हुआ जहाँ इसे 'कृष्ण अयस' या 'श्याम अयस' कहा गया। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सही हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार गंडक नदी तक हुआ और पुरुष सूक्त समाज की वर्ण व्यवस्था का सबसे प्राचीन साक्ष्य है।
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