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History of India
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19वीं शताब्दी में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, सत्यशोधक समाज, आत्मीय सभा और सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसाइटी के संस्थापकों तथा उनके उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' एक ऐसी प्रारंभिक संस्था थी जिसका मुख्य उद्देश्य वेदांत के एकेश्वरवादी विचारों का प्रचार करना और समाज में व्याप्त मूर्तिपूजा तथा जटिल धार्मिक अनुष्ठानों का विरोध करना था।
- 2. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य वैचारिक आधार ब्राह्मणवादी प्रभुत्व को चुनौती देना, शूद्रों और अतिशूद्रों को पुरोहिती शोषण से मुक्त कराना तथा उनकी सामाजिक व शैक्षणिक उन्नति के लिए कार्य करना था।
- 3. गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा वर्ष 1905 में स्थापित 'सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसाइटी' (भारत सेवक समाज) का मुख्य उद्देश्य देशसेवा के लिए समर्पित प्रचारकों को प्रशिक्षित करना और विभिन्न जातियों व वर्गों के बीच आपसी सद्भाव तथा शिक्षा का प्रसार करना था, जिसके पहले आजीवन सदस्य के रूप में महात्मा गांधी जुड़े थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राजा राममोहन राय ने 1815 में कलकत्ता में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक सुधारों के लिए विचार-विमर्श करना तथा एकेश्वरवाद का प्रचार करना था। कथन 2 सही है: ज्योतिराव फुले ने 24 सितंबर 1873 को 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जो शूद्रों और अस्पृश्य जातियों के अधिकारों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए समर्पित था। कथन 3 गलत है क्योंकि गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा स्थापित 'सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसाइटी' (1905) के पहले सदस्य या संस्थापक गोखले स्वयं थे, और महात्मा गांधी इसके सदस्य नहीं बल्कि इसके सिद्धांतों से प्रभावित थे (गांधीजी ने अपने राजनीतिक गुरु के रूप में गोखले का उल्लेख किया है)। भारतीय इतिहास के इन आंदोलनों के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिनमें से वज्जी और मल्ल संघ में राजतंत्रात्मक व्यवस्था के स्थान पर गणतांत्रिक (संघीय) शासन प्रणाली प्रचलित थी।
2. मगध के उत्कर्ष में उसके भौगोलिक लाभ—विशेष रूप से राजगृह की प्राकृतिक सुरक्षा (पाँच पहाड़ियों से घिरा होना), उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी तथा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध लौह अयस्क भंडारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने आक्रामक विजय की नीति के साथ-साथ वैवाहिक संबंधों (कौशल, मद्र और लिच्छवि राजवंशों से विवाह) की नीति अपनाकर अपने साम्राज्य को सुदृढ़ किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु ने वैशाली को मगध में मिलाने के लिए 'रथ-मूसल' और 'महाकंटकसंग्रह' जैसे नवीन हथियारों का प्रयोग किया।
4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने अवंती साम्राज्य को पराजित कर मगध साम्राज्य में मिला लिया था, और इसी काल में मगध की राजधानी को पाटलिपुत्र से हटाकर कुछ समय के लिए वैशाली स्थानांतरित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के प्रमुख अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली — जॉन निकलसन — विद्रोह का दमन करते हुए वीरगति को प्राप्त
2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल — हेनरी लॉरेंस और जेम्स आउट्राम के सहयोग से विद्रोह का दमन
3. झांसी और ग्वालियर — सर ह्यूरोज़ — रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के विरुद्ध सैन्य अभियान
4. कानपुर — कर्नल नील — नाना साहब के विरुद्ध क्रूरतापूर्ण दमनकारी कार्रवाई
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
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विजयनगर के किस शासक को "इमादि देवराय" या "गजवेटकर" कहा जाता था?
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