त्वरित लिंक्स
History of India
6 views
वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 1857 के विद्रोह में संपूर्ण भारत या समाज के सभी वर्गों ने समान रूप से भाग नहीं लिया; अधिकांश बड़े देसी रियासतें (जैसे हैदराबाद, ग्वालियर, इंदौर और भोपाल के शासक) तथा शिक्षित मध्यम वर्ग व व्यापारी वर्ग या तो तटस्थ रहे या उन्होंने अंग्रेजों का सक्रिय रूप से समर्थन किया।
- 2. विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीयकृत उच्च कमान (Centralized High Command) था और न ही कोई सुनियोजित अखिल भारतीय राजनीतिक व सैन्य रणनीति; विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ताओं (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल, झाँसी की रानी) ने मुख्य रूप से अपने स्थानीय और क्षेत्रीय हितों व अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
- 3. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को यद्यपि विद्रोहियों द्वारा प्रतीकात्मक रूप से भारत का सम्राट घोषित किया गया था, किंतु उनके पास न तो कोई प्रभावी सैन्य अधिकार था और न ही वे देश भर में बिखरे हुए विद्रोही सैनिकों के बीच कोई प्रभावी समन्वय स्थापित कर पाने में सक्षम थे।
- 4. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ) और तीव्र रेल परिवहन का लाभ था, जबकि विद्रोहियों के पाससैनिक अनुशासन, आधुनिक हथियारों और गुप्त सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था का पूर्ण अभाव था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 का महान विद्रोह ब्रिटिश औपविक शासन के विरुद्ध एक बड़ा कदम था, किंतु इसकी असफलता के पीछे कई आंतरिक कमजोरियां और नेतृत्व की गंभीर कमियाँ थीं। इस विद्रोह में अखिल भारतीय दृष्टिकोण का अभाव था और यह मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत तक ही सीमित रहा। सिंधिया, होलकर और हैदराबाद जैसे अधिकांश देशी रियासतों के शासकों ने ब्रिटिश हुकूमत का साथ दिया। इसके अतिरिक्त, आधुनिक तकनीक, बेहतर हथियार, कुशल सैन्य संगठन और अनुशासित कमांड के बल पर अंग्रेजों ने इस विद्रोह को कुचल दिया। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में 'समांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना हुई, जिनमें बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (वाई बी चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकारें थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में कलकत्ता से ब्रिटिश नजरबंदी से चुपचाप निकलकर जर्मनी पहुँचे और वहाँ उन्होंने बर्लिन रेडियो से भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में प्रसारण किया तथा वहीं जर्मन सैन्य सहायता से 'इंडियन लीजन' (फ्री इंडिया सेंटर) की स्थापना की।
3. सिंगापुर के पतन के पश्चात रास बिहारी बोस ने जापान के सहयोग से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' का गठन किया, किंतु मोहन सिंह के साथ जापानी सैन्य अधिकारियों के मतभेदों के कारण आईएनए का पहला चरण असफल हो गया, जिसे बाद में पुनर्जीवित करने के लिए सुभाष चंद्र बोस को वर्ष 1943 में सिंगापुर आमंत्रित किया गया था।
4. आजाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजिमेंट' की कमान कैप्टन लक्ष्मी सहगल के हाथों में थी, और यह पूरी तरह से महिलाओं की एक समर्पित युद्धक रेजिमेंट थी, जिसने ब्रिटिश सेना के खिलाफ बर्मा और इम्फाल मोर्चे पर सक्रिय सैन्य कार्रवाई में भाग लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह के दमन और इसके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था, और उनके दमन के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील को भेजा गया था जिन्होंने अंततः इस क्षेत्र में विद्रोह को पूरी तरह कुचल दिया था।
2. बरेली में रोहिलखंड के पूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का नेतृत्व किया और अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी, किंतु ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने वर्ष 1858 की शुरुआत में इस विद्रोह को क्रूरता से दबा दिया और खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया।
3. इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने वहाँ स्थित ऐतिहासिक किले पर अधिकार कर लिया था, और जनरल नील ने अत्यधिक निर्ममता से इस विद्रोह का दमन करते हुए शहर में बड़े पैमाने पर फांसी की सजाएं दी थीं।
4. इन तीनों केंद्रों पर विद्रोह के दमन के उपरांत ब्रिटिश साम्राज्य ने स्थानीय जनता का विश्वास जीतने के लिए दमनकारी नीतियों को त्यागकर पूरी तरह से उदार और क्षमादान की नीति का पालन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विजयनगर काल के दौरान "तेलुगु साहित्य का स्वर्ण युग" किसके शासनकाल को कहा जाता है?
→
सैयद और लोदी काल में सुल्तानों का नियंत्रण किस क्षेत्र तक सीमित था?
→
टोडरमल किसके वित्त मंत्री थे?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.