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History of India
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सैयद और लोदी काल में सुल्तानों का नियंत्रण किस क्षेत्र तक सीमित था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सल्तनत के अंतिम समय में सुल्तान दिल्ली तक सिमट गए थे।
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गयासुद्दीन तुगलक ने दक्षिण के किस राज्य का नाम बदलकर "सुल्तानपुर" रख दिया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत वीरता के साथ अंग्रेजों का सामना किया तथा तात्या टोपे के सैनिकों द्वारा सहायता समय पर न पहुँच पाने के कारण वे कालपी की ओर प्रस्थान करने के लिए विवश हुईं।
2. कालपी में पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया और वहाँ के सिंधिया शासक महाराजा जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहेब को पेशवा घोषित किया गया।
3. ग्वालियर के पतन के अंतिम युद्ध (मई-जून 1858) में अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से सुरक्षित निकलकर नेपाल की पहाड़ियों में चले गए जहाँ उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों की दार्शनिक प्रवृत्तियों तथा उनके विशिष्ट संप्रदायों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवर संतों ने व्यक्तिगत भक्ति (प्रपत्ति) और प्रेममार्गी दृष्टिकोण को लोकप्रिय बनाया, जबकि नयनार संतों ने भगवान शिव की उपासना पर बल दिया और दोनों ने समाज में जातिगत कठोरता का विरोध किया।
2. सूफी मत के चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध संत शेख निजामुद्दीन औलिया ने राज्य के संरक्षण और शाही दरबार के उच्च पदों को स्वीकार करने की नीति का कड़ा विरोध किया तथा सुल्तानों से मिलने से पूर्णतः परहेज किया।
3. उत्तर भारत में निर्गुण भक्ति धारा के महान संत कबीर दास ने बाहरी आडंबरों, मूर्तिपूजा और जाति व्यवस्था का कड़ा खंडन किया, और उनके दार्शनिक विचार 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित हैं।
4. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के संत ज्ञानेश्वर ने मराठी भाषा में भगवद्गीता पर 'भावार्थदीपिका' (ज्ञानेश्वरी) की टीका लिखकर भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया, और इस संप्रदाय के अनुयायी पंढरपुर की वार्षिक तीर्थयात्रा करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह के पास एक अखिल भारतीय स्तर पर स्वीकृत, दूरदर्शी और सुसंगठित केंद्रीय नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेता और राजा अपने-अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे तथा ब्रिटिश सत्ता के विकल्प के रूप में कोई सुसंगत राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे।
2. नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई जैसे विद्रोही नेताओं के पास अदम्य साहस और शौर्य की कोई कमी नहीं थी, परंतु आधुनिक सैन्य विज्ञान, तोपखाने, सुदृढ़ संचार साधनों और अनुशासित यूरोपीय सैन्य रणनीति के मुकाबले उनकी रणनीतिक सीमाएं स्पष्ट रूप से उजागर हुईं।
3. मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र को विद्रोह का प्रतीकात्मक प्रमुख घोषित किया जाना तात्कालिक रूप से सैनिकों और जनता को वैचारिक रूप से एकजुट करने में सहायक रहा, परंतु उनकी वृद्धावस्था, अनिच्छा और विद्रोही सैनिकों के मध्य आपसी समन्वय के अभाव के कारण यह नेतृत्व निर्णायक साबित नहीं हो सका।
4. शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े भूस्वामियों (ताल्लुकदारों को छोड़कर अधिकांश बड़े जमींदारों) और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया तथा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध इसे एक अखिल भारतीय आधुनिक जन-क्रांति में बदलने में मुख्य भूमिका निभाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे, सैन्य संगठन और राजनैतिक प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' मंडल का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) के पश्चात दूसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद 'मजूमदार' या 'अमात्य' का था जो राज्य की आय-व्यय (राजस्व विभाग) की देखरेख करता था।
2. मराठा सैन्य व्यवस्था में घुड़सवार सेना दो प्रमुख श्रेणियों में बंटी थी—'बरगीर' (जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और शस्त्र दिए जाते थे) और 'सिलहदार' (जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार सुसज्जित करते थे), तथा सेना में अनुशासन अत्यंत कड़ा था जिसके तहत सैनिकों को लूट का माल व्यक्तिगत रूप से अपने पास रखने की पूर्ण स्वतंत्रता थी।
3. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर की रयतवाड़ी व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश कराकर राज्य का हिस्सा कुल उपज का पहले 33% निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया तथा किसानों को तकावी ऋण और नकद भुगतान की सुविधा दी गई।
4. मराठा साम्राज्य की वित्तीय सुदृढ़ता के लिए पड़ोसी क्षेत्रों से वसूले जाने वाले 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (अतिरिक्त 10% कर) में, चौथ इस बात का प्रतिफल था कि मराठा सेना उस क्षेत्र पर आक्रमण नहीं करेगी, जबकि सरदेशमुखी शिवाजी द्वारा अपने आपको पूरे क्षेत्र का प्रधान वंशागत देशमुख (सरपंच) माने जाने के अधिकार के रूप में वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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