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History of India
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विजयनगर काल के दौरान "तेलुगु साहित्य का स्वर्ण युग" किसके शासनकाल को कहा जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कृष्णदेव राय के शासनकाल को तेलुगु साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है।
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अकबर की धार्मिक नीति का मूल मंत्र "सुलह-ए-कुल" था, इसका क्या अर्थ है?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ विद्रोही सेना और स्थानीय तालुकेदारों का नेतृत्व किया था, तथा अंत में पराजय के बाद वे नेपाल चली गईं जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद (अवर) से विद्रोह का नेतृत्व किया और चिनहट के युद्ध (इतिहास में 'इंचौली का युद्ध' भी कहा जाता है) में हेनरी लॉरेंस की ब्रिटिश सेना को बुरी तरह पराजित किया था।
3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की गतिविधियों से भयभीत होकर ब्रिटिश प्रशासन ने उन पर पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंत में पुवायाँ (रोहिलखंड) के राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
4. लखनऊ में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट और नेपाल के प्रधानमंत्री जंग बहादुर की सैन्य सहायता से रेजिडेंसी को मुक्त कराया था, किंतु बेगम हजरत महल ने कभी भी ब्रिटिश शर्तों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) तथा गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दांडी मार्च के माध्यम से नमक कानून तोड़ने के बाद, देश के विभिन्न हिस्सों में 'चौकीदारी कर' के भुगतान का बहिष्कार, वन कानूनों का उल्लंघन और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान द्वारा 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) के माध्यम से आंदोलन का सशक्त संचालन किया गया।
2. नवंबर 1930 से जनवरी 1931 के मध्य लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, क्योंकि सम्मेलन से ठीक पूर्व वायसराय लॉर्ड इरविन ने महात्मा गांधी की सभी ग्यारह सूत्रीय मांगों को बिना किसी शर्त के स्वीकार कर लिया था।
3. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार द्वारा राजनीतिक कैदियों (हिंसा में लिप्त व्यक्तियों को छोड़कर) की रिहाई पर सहमति व्यक्त की गई, तथा कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर आगामी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की स्वीकृति दी।
4. कराची अधिवेशन (मार्च 1931) में कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन करते हुए पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान स्वाधीनता संग्राम के दौरान बिहार के जगदीशपुर क्षेत्र में वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अप्रैल 1858 में वीर कुंवर सिंह ने अपनी कुशल रणनीति का परिचय देते हुए ब्रिटिश सेना को पराजित किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद आरा तथा जगदीशपुर के रास्ते अपनी रियासत में प्रवेश करने में सफल रहे, जहाँ विजयोत्सव के तुरंत बाद 26 अप्रैल 1858 को उनका निधन हो गया।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व संभाला और कैमूर की पहाड़ियों के जंगलों से ब्रिटिश सेना के खिलाफ लंबे समय तक छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का प्रभावी संचालन किया।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में कैमूर क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के समानांतर एक प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था संचालित की जा रही थी, जिसे स्थानीय जनता और किसानों से रसद एवं खुफिया सहायता का पूर्ण समर्थन प्राप्त था।
4. अंततः अंग्रेजों ने अमर सिंह को युद्ध के मैदान में जीवित अथवा मृत पकड़ लिया था और वर्ष 1859 के अंत में उन पर मुकदमा चलाकर कलकत्ता में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना और वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है और यह शाश्वत ब्रह्म या आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किए बिना संसार के संचालन की व्याख्या करता है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है जो यह बताता है कि प्रत्येक सत्य दृष्टिकोण विशेष के अनुसार आंशिक होता है।
2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा пятнадцать (15) वर्ष निर्धारित की गई थी, और संघ में किसी भी प्रकार के ऋणग्रस्त, चोर, दास, या राजकर्मचारी को प्रवेश की पूर्ण अनुमति थी ताकि सामाजिक समानता स्थापित की जा सके।
3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम हैं और उनके 19वें तीर्थंकर 'मल्लिनाथ' एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का पूर्ण खंडन करता है और यह मानता है कि मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्नता अनिवार्य है और स्त्री शरीर से मुक्ति संभव नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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