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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले नाना साहब, उनके सैन्य कमांडर तात्या टोपे और मुख्य सलाहकार अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य रणनीतिकार तथा राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किया, जिन्होंने कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विद्रोह के समर्थन में प्रयास किए।
- 2. ब्रिटिश जनरल सर ह्यूरोज़ द्वारा कानपुर पर पुनः अधिकार करने के पश्चात तात्या टोपे कानपुर से निकलकर ग्वालियर पहुँचे, जहाँ उन्होंने ग्वालियर की सेना को अपने पक्ष में मिलाया और रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध एक दुर्जेय सैन्य अभियान का संचालन किया।
- 3. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के बाद हुई तथाकथित 'सती चौरा घाट हत्याकांड' (बिठूर नरसंहार) के पश्चात कैंपबेल की सेना ने कानपुर पर अधिकार किया, जिसके उपरांत नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए और उनका अंतिम उपरांत कभी पता नहीं चल सका।
- 4. तात्या टोपे को अंततः उनके एक विश्वासघाती जमींदार मित्र मान सिंह के धोखे के कारण अंग्रेजों द्वारा शिवपुरी में पकड़ लिया गया, जहाँ 18 अप्रैल 1859 को उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने नेतृत्व संभाला। उनके मुख्य सलाहकार अजीमुल्ला खां थे, जिन्होंने कूटनीतिक रूप से विद्रोह का समर्थन जुटाया। कानपुर में पराजय के बाद नाना साहब नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ उनका अंतिम जीवन अज्ञात रहा। तात्या टोपे ने बाद में रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर में संघर्ष किया, और अंततः नरवर के जागीरदार मान सिंह के विश्वासघात के कारण पकड़े जाने पर 18 अप्रैल 1859 को उन्हें शिवपुरी में फांसी दी गई। सती चौरा घाट की घटना के समय कैंपबेल नहीं बल्कि जनरल हैवलॉक और आउट्राम की सेनाओं ने कानपुर की तरफ अभियान चलाया था, जिससे कथन 2 में ह्यूरोज़ और कैंपबेल के संदर्भ की सूक्ष्म ऐतिहासिक त्रुटि है (ह्यूरोज़ का संबंध मुख्य रूप से झांसी और ग्वालियर क्षेत्र से था)। इस प्रकार कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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विजयनगर में स्थानीय प्रशासन की "आयगार व्यवस्था" (Ayagar System) का संबंध किससे था?
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मुगलकालीन केंद्रीय प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा प्रारंभ की गई 'दहशाला' (या जपती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके प्रचलित बाजार मूल्यों का आकलन कर भू-राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से मनसबदारों को अपने 'जात' पद को बढ़ाए बिना अधिक घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति दी गई।
3. शाहजहां के काल में स्थापत्य कला ने अपनी चरमोत्कर्ष अवस्था को प्राप्त किया, और उसके द्वारा सिजदा और पाइबॉस जैसी फारसी दरबारी परंपराओं को पुनः अनिवार्य कर दिया गया, जिन्हें अकबर ने समाप्त कर दिया था।
4. औरंगजेब के शासनकाल में साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार अपने चरम पर पहुँच गया था, और उसने अपने शासन के शुरुआती दौर में ही सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्राचीन परंपरा को बंद कर दिया तथा 'झरोखा दर्शन' व 'तुलादान' जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश तथा पल्लव एवं चालुक्य राजवंशों के संघर्ष और उनकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्द्धन ने कामरूप के राजा भास्करवर्मा के साथ राजनीतिक गठबंधन किया था और कन्नौज की धर्मसभा में महायान बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया था।
2. पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन के दक्षिण की ओर विस्तार को निर्णायक रूप से रोका था, जिसकी जानकारी हमें एहोल प्रशस्ति से मिलती है जिसकी रचना रविकीर्ति ने की थी।
3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी (बादामी) पर अधिकार कर लिया था और 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी, जबकि इसी राजवंश के राजा राजसिंह (नरिंसहवर्मन द्वितीय) ने महाबलीपुरम के प्रसिद्ध तटीय मंदिर (Shore Temple) का निर्माण करवाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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अकबर द्वारा निर्मित फतेहपुर सीकरी का "पंचमहल" किस धर्म की वास्तुकला की नकल माना जाता है?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी व्यवस्था—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) प्रणाली को लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया और भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया, जिससे कंपनी की आय तो निश्चित हो गई किंतु पारंपरिक रूप से भूमि जोतने वाले किसानों की स्थिति किराएदार जैसी होकर रह गई।
2. रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसिडेंसी में लागू की गई थी, जिसके प्रतिपादक थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड थे, और इस व्यवस्था के तहत सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था तथा भू-राजस्व का निर्धारण सीधे किसानों की व्यक्तिगत भूमि के आधार पर किया जाता था।
3. महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System) उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई थी, जिसके तहत भू-राजस्व के निर्धारण और भुगतान के लिए व्यक्तिगत किसान को उत्तरदायी न बनाकर पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' (गाँव या गाँवों के समूह) को इकाई माना जाता था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों में बंगाल के स्थाई बंदोबस्त के अंतर्गत किसानों पर ब्रिटिश सरकार का प्रत्यक्ष उत्पीड़न सबसे अधिक था, क्योंकि इसमें जमींदारों द्वारा वसूले जाने वाले लगान की अधिकतम सीमा ब्रिटिश संसद द्वारा तय की जाती थी और किसानों के पास अदालत में अपील करने का कोई अधिकार नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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