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History of India
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वर्धन राजवंश तथा पल्लव एवं चालुक्य राजवंशों के संघर्ष और उनकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हर्षवर्द्धन ने कामरूप के राजा भास्करवर्मा के साथ राजनीतिक गठबंधन किया था और कन्नौज की धर्मसभा में महायान बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया था।
  2. 2. पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन के दक्षिण की ओर विस्तार को निर्णायक रूप से रोका था, जिसकी जानकारी हमें एहोल प्रशस्ति से मिलती है जिसकी रचना रविकीर्ति ने की थी।
  3. 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी (बादामी) पर अधिकार कर लिया था और 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी, जबकि इसी राजवंश के राजा राजसिंह (नरिंसहवर्मन द्वितीय) ने महाबलीपुरम के प्रसिद्ध तटीय मंदिर (Shore Temple) का निर्माण करवाया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

उपर्युक्त तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। हर्षवर्द्धन (पुष्यभूति वंश) ने कामरूप के राजा भास्करवर्मा के साथ मित्रता की थी और कन्नौज सभा में ह्वेनसांग ने भाग लिया था। चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था जिसका उल्लेख विकिपीडिया संदर्भ (एहोल शिलालेख) में मिलता है। पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को हराकर 'वातापिकोंड' की उपाधि ली थी और नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) ने महाबलीपुरम के तटीय मंदिर का निर्माण कराया था।
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