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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 21 times

दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था जिसमें सैन्य अधिकारियों और नागरिकों दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
  2. 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने विद्रोह का औपचारिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, तथापि उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, व्यक्तिगत अनिच्छा और उनके निकटवर्ती शाही दरबारियों तथा राजकुमारों के मध्य आपसी समन्वय व दूरदर्शिता के अभाव के कारण वे विद्रोहियों को कोई प्रभावी या दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा प्रदान नहीं कर सके।
  3. 3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने बहादुर शाह जफर को लाल किले से गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें तुरंत अंडमान और निकोबार की सेलुलर जेल में आजीवन कारावास के लिए भेज दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: दिल्ली के सिपाहियों द्वारा बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के उपरांत, प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) की स्थापना की गई थी, जिसमें सेना और नागरिक प्रशासन के सदस्य शामिल थे। कथन 2 सही है: जफर की वृद्धावस्था, उनकी अनिच्छा और दरबार के भीतर आपसी अंतर्कलह व दूरदर्शिता की कमी के कारण वे विद्रोहियों को कोई ठोस रणनीतिक नेतृत्व नहीं दे पाए। कथन 3 गलत है क्योंकि मेजर हडसन ने बहादुर शाह जफर को लाल किले से नहीं बल्कि हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार किया था और उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें अंडमान नहीं बल्कि रंगून (बर्मा) निर्वासित किया था जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हुई। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व संभाला था और अंत में अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल चली गई थीं। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित किया था और अंग्रेजों ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3. बेगम हजरत महल के विद्रोह का दमन करने के बाद ब्रिटिश कमांडर कैंपबेल ने लखनऊ पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को रुहेलखंड के एक स्थानीय राजा द्वारा विश्वासघात किए जाने के कारण अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को यह तय करने का अधिकार दिया गया था कि वे अपने-अपने प्रांतों का विभाजन चाहते हैं या नहीं, जिसके लिए मुस्लिम बहुसंख्यक और हिंदू बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। 2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के प्रावधानों के अंतर्गत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए, तथा दोनों नवगठित देशों के लिए गवर्नर-जनरल के पद पर लॉर्ड माउंटबेटन को ही संयुक्त रूप से नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। 3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा बिना किसी जनमत संग्रह (Referendum) के सीधे स्थानीय ब्रिटिश कमिश्नर के प्रशासनिक विवेक पर छोड़ दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रमुख संतों, उनकी दार्शनिक प्रवृत्तियों तथा उनके द्वारा प्रतिपादित पंथों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न होने के बावजूद ब्रह्म का ही अंश हैं, जबकि मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' का प्रतिपादन करते हुए जीव और ईश्वर को पूर्णतः भिन्न व स्वतंत्र माना। 2. सूफी सिलसिले में 'सुहरवर्दी संप्रदाय' ने भारत में चिश्ती संप्रदाय के विपरीत कठोर वैराग्य और भिक्षाटन का जीवन अपनाया, तथा उन्होंने राज्य की राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव रखते हुए किसी भी प्रकार के राजकीय अनुदान या जागीर को स्वीकार करने से सख्त इंकार कर दिया। 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत बंधनों और छुआछूत का कड़ा विरोध करते हुए समाज के सभी वर्गों—यहाँ तक कि शूद्रों और महिलाओं—को भी अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया, और उनके प्रमुख शिष्यों में कबीर, रैदास और धन्ना जैसे संत शामिल थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में 'समांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिसमें बलिया में चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में, ताम्रलिप्त (बंगाल) में 'जातीय सरकार' के तहत और सतारा में 'प्रती सरकार' (वाई.बी. चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समांतर सरकारों में प्रमुख थीं। 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में औपचारिक रूप से 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की और वे जापान के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद क्रमशः उनका नाम 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा। 3. जापानी सेना की सहायता से आगे बढ़ते हुए INA की 'गांधी ब्रिगेड', 'सुभाष ब्रिगेड' और महिलाओं की एक अलग टुकड़ी 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' ने इम्फाल और कोहिमा के मोर्चों पर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया, और इस पूरी सैन्य अभियान के दौरान जापानी सेना ने INA को रणनीतिक स्वायत्तता देते हुए कभी भी अपनी कमान के अधीन नहीं रखा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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