History of India
Asked 2 months ago · Viewed 22 times
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रमुख संतों, उनकी दार्शनिक प्रवृत्तियों तथा उनके द्वारा प्रतिपादित पंथों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न होने के बावजूद ब्रह्म का ही अंश हैं, जबकि मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' का प्रतिपादन करते हुए जीव और ईश्वर को पूर्णतः भिन्न व स्वतंत्र माना।
- 2. सूफी सिलसिले में 'सुहरवर्दी संप्रदाय' ने भारत में चिश्ती संप्रदाय के विपरीत कठोर वैराग्य और भिक्षाटन का जीवन अपनाया, तथा उन्होंने राज्य की राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव रखते हुए किसी भी प्रकार के राजकीय अनुदान या जागीर को स्वीकार करने से सख्त इंकार कर दिया।
- 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत बंधनों और छुआछूत का कड़ा विरोध करते हुए समाज के सभी वर्गों—यहाँ तक कि शूद्रों और महिलाओं—को भी अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया, और उनके प्रमुख शिष्यों में कबीर, रैदास और धन्ना जैसे संत शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जो यह मानता है कि आत्मा और जगत ब्रह्म से जुड़े हुए हैं किंतु उससे भिन्न भी हैं। वहीं, मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' का प्रतिपादन किया जिसके अनुसार ईश्वर और जीव दो सर्वथा भिन्न और स्वतंत्र वास्तविकताएँ हैं। कथन 2 गलत है: सूफियों के 'सुहरवर्दी संप्रदाय' ने चिश्ती संप्रदाय के विपरीत राज्य की राजनीति से दूरी नहीं बनाई, बल्कि उन्होंने राजनीतिक सत्ता के साथ घनिष्ठ संबंध रखे और बड़े पैमाने पर जागीरें तथा राजकीय अनुदान स्वीकार किए। कठोर वैराग्य और भिक्षाटन का मार्ग चिश्ती संप्रदाय की विशेषता थी, न कि सुहरवर्दी की। कथन 3 सही है: रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया। उन्होंने जाति और वर्ण व्यवस्था की रूढ़ियों को नकारते हुए समाज के उपेक्षित वर्गों और महिलाओं को भी भक्ति का अधिकार दिया। उनके प्रसिद्ध शिष्यों में कबीर, रैदास (संत रविदास), पीपा और सेना शामिल थे। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के ऐतिहासिक…
← पिछला प्रश्न
वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा…
Related Questions
→
दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था जिसमें सैन्य अधिकारियों और नागरिकों दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने विद्रोह का औपचारिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, तथापि उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, व्यक्तिगत अनिच्छा और उनके निकटवर्ती शाही दरबारियों तथा राजकुमारों के मध्य आपसी समन्वय व दूरदर्शिता के अभाव के कारण वे विद्रोहियों को कोई प्रभावी या दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा प्रदान नहीं कर सके।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने बहादुर शाह जफर को लाल किले से गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें तुरंत अंडमान और निकोबार की सेलुलर जेल में आजीवन कारावास के लिए भेज दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की दार्शनिक प्रवृत्तियों, उनके संतों तथा उनकी साधना पद्धतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन के अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न होने के बावजूद ब्रह्म का ही अंश हैं, जबकि मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'द्वैतवाद' जीव, जगत और ईश्वर को पूर्णतः पृथक एवं स्वतंत्र मानता है।
2. सूफी संत शेख शहाबुद्दीन सुहरवर्दी द्वारा स्थापित 'सुहरवर्दी सिलसिले' ने भारत में चिश्ती संप्रदाय के विपरीत कठोर वैराग्य, उपवास और भिक्षाटन के जीवन को पूर्णतः अपनाया तथा राजकीय सत्ता से पूर्ण अलगाव रखते हुए किसी भी प्रकार के जागीर या सरकारी अनुदान को लेने से स्पष्ट मना कर दिया था।
3. निर्गुण भक्ति धारा के महान संत कबीर ने जहाँ जाति व्यवस्था, बाह्य आडंबरों और मूर्तिपूजा का कड़ा विरोध किया, वहीं सूफी संत मलिक मुहम्मद जायसी ने अपनी रचना 'पद्मावत' में प्रेमाभ्री (प्रेममार्गी) शाखा के अंतर्गत सूफी रहस्यावाद को लोकभाषा अवधी के माध्यम से प्रस्तुत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की वैचारिक मान्यताओं, उनकी दार्शनिक प्रवृत्तियों तथा सामाजिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाते हुए जाति व्यवस्था और रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया तथा स्थानीय जनभाषा (तमिल) को अपने उपदेशों का माध्यम बनाया, जिससे भक्ति आंदोलन की प्रारंभिक पृष्ठभूमि तैयार हुई।
2. सूफी सिलसिले में 'चिश्ती संप्रदाय' ने भारत में उदारवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थानीय भारतीय संगीत (समां) और योग क्रियाओं को अपनी साधना पद्धति में शामिल किया, जबकि 'सुहरवर्दी संप्रदाय' ने राज्य की राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव बनाए रखा और राजाओं से किसी भी प्रकार के जागीर या उपहार लेने से सख्त परहेज किया।
3. निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत कबीर ने बाह्य आडंबरों, मूर्तिपूजा और जातिगत भेदभाव का पुरजोर खंडन किया, जबकि सगुण भक्ति धारा के प्रवर्तक तुलसीदास ने रामभक्ति के माध्यम से वर्णाश्रम व्यवस्था और सामाजिक मर्यादाओं की पुनर्स्थापना पर बल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की सामाजिक-आर्थिक संरचना और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस सभ्यता के मुहरों (Seals) पर सबसे अधिक बार 'एकशृंगी पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है, जो यह दर्शाता है कि यह पशु इस सभ्यता के लोगों के लिए अत्यंत पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण रहा होगा।
2. लोथल और चान्हूदड़ो इस सभ्यता के प्रमुख शिल्प उत्पादन केंद्र थे, जहाँ मणियों के निर्माण (Bead-making), शंख की कटाई और धातु-शिल्प से जुड़ी वस्तुएं बड़े पैमाने पर बनाई जाती थीं।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों का मेसोपोटामिया और फारस की खाड़ी की सभ्यताओं के साथ सक्रिय व्यापारिक संबंध था, जिसकी पुष्टि मेसोपोटामिया के अभिलेखों में प्रयुक्त 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द से होती है, जिसका समीकरण आमतौर पर सिंधु क्षेत्र से किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
→
महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.