BaalVikas
Menu
History of India
Asked 2 months ago · Viewed 14 times

1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व संभाला था और अंत में अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल चली गई थीं।
  2. 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित किया था और अंग्रेजों ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
  3. 3. बेगम हजरत महल के विद्रोह का दमन करने के बाद ब्रिटिश कमांडर कैंपबेल ने लखनऊ पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को रुहेलखंड के एक स्थानीय राजा द्वारा विश्वासघात किए जाने के कारण अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अवध और लखनऊ क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अत्यंत साहसी और निर्णायक भूमिका निभाई थी। बेगम हजरत महल ने अपने पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का मोर्चा संभाला और पराजय के पश्चात नेपाल चली गईं। वहीं, मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने जिन्हें 'डंका शाह' भी कहा जाता था, चिनहट के युद्ध (30 जून 1857) में ब्रिटिश सेना को मात दी थी और अंग्रेजों ने उन पर 50,000 रुपये का इनाम रखा था। अंततः रुहेलखंड के पववाई के राजा के विश्वासघात के कारण वे अंग्रेजों द्वारा मारे गए। इस ऐतिहासिक संदर्भ की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में माउंटबेटन योजना (3 जून 1947)… ← पिछला प्रश्न मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी…

Related Questions

→ छठी शताब्दी ईसा पूर्व में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और तదుपरांत 'मगध साम्राज्य' के सर्वोत्कृष्ट उत्थान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें वज्जी और मल्ला जैसे महाजनपद राजतंत्रात्मक व्यवस्था के स्थान पर 'गणसंघ' (oligarchic republics) के रूप में संगठित थे। 2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में रणनीतिक एवं व्यापारिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण होने के कारण इसे पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया गया था। 3. मगध के उत्थान में उसकी भौगोलिक स्थिति की कोई विशेष भूमिका नहीं थी, बल्कि हरवंश वंश के शासक बिम्बिसार और उसके पुत्र अजातशत्रु द्वारा अपनाई गई केवल आक्रामक सैन्य विजयों (विस्तारवादी नीतियों) ने ही मगध को सर्वोच्च शक्तिशाली महाजनपद बनाया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा शुरू की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं और ब्राह्मणों को कर-मुक्त भूमि प्रदान करना था, जिससे आगे चलकर सामंती व्यवस्था (Feudalism) की पृष्ठभूमि तैयार हुई। 2. गुप्त काल में सोने के सिक्के (दीनार) बड़ी संख्या में जारी किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि इस काल में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपनी चरमोत्कर्ष पर था और व्यापारिक संतुलन पूरी तरह से भारत के पक्ष में था। 3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' वे भूमियाँ थीं जो सामान्यतः ब्राह्मणों को दान में दी जाती थीं और इन भूमियों पर राज्य द्वारा किसी भी प्रकार का भू-राजस्व नहीं वसूला जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था जिसमें सैन्य अधिकारियों और नागरिकों दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे। 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने विद्रोह का औपचारिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, तथापि उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, व्यक्तिगत अनिच्छा और उनके निकटवर्ती शाही दरबारियों तथा राजकुमारों के मध्य आपसी समन्वय व दूरदर्शिता के अभाव के कारण वे विद्रोहियों को कोई प्रभावी या दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा प्रदान नहीं कर सके। 3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने बहादुर शाह जफर को लाल किले से गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें तुरंत अंडमान और निकोबार की सेलुलर जेल में आजीवन कारावास के लिए भेज दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी अभियान के उपलक्ष्य में उसने महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) के प्रसिद्ध एकाश्मक (monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। 2. चोल साम्राज्य की केंद्रीय और स्थानीय स्वायत्तता व्यवस्था के अंतर्गत 'उर' (सामान्य ग्राम सभा), 'सभा' (अग्रहार या ब्राह्मण बहुल गाँवों की स्वायत्त सभा) और 'नगरम्' (व्यापारियों और दुकानदारों की संस्था) का अत्यंत सुव्यवस्थित विवरण हमें उत्तरमेरूर के प्रसिद्ध शिलालेखों (प्रांतक प्रथम के शासनकाल के) से प्राप्त होता है। 3. हर्षवर्धन के शासनकाल में आयोजित 'कन्नौज की महाधर्म परिषद' का मुख्य उद्देश्य केवल हीनयान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग का सार्वजनिक रूप से अपमान करना था, क्योंकि ह्वेनसांग ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय के हाथों हुई पराजय का कोई उल्लेख नहीं किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.