History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की सामाजिक-आर्थिक संरचना और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस सभ्यता के मुहरों (Seals) पर सबसे अधिक बार 'एकशृंगी पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है, जो यह दर्शाता है कि यह पशु इस सभ्यता के लोगों के लिए अत्यंत पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण रहा होगा।
- 2. लोथल और चान्हूदड़ो इस सभ्यता के प्रमुख शिल्प उत्पादन केंद्र थे, जहाँ मणियों के निर्माण (Bead-making), शंख की कटाई और धातु-शिल्प से जुड़ी वस्तुएं बड़े पैमाने पर बनाई जाती थीं।
- 3. सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों का मेसोपोटामिया और फारस की खाड़ी की सभ्यताओं के साथ सक्रिय व्यापारिक संबंध था, जिसकी पुष्टि मेसोपोटामिया के अभिलेखों में प्रयुक्त 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द से होती है, जिसका समीकरण आमतौर पर सिंधु क्षेत्र से किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) अपने उन्नत नगर नियोजन, विदेशी व्यापार और कुशल शिल्प कौशल के लिए विश्व प्रसिद्ध थी। हड़प्पा कालीन मुहरों पर एकशृंगी पशु (Unicorn) का चित्रण सबसे अधिक बार मिला है, जो इसकी धार्मिक महत्ता को रेखांकित करता है। चान्हूदड़ो और लोथल मनके बनाने के कारखानों (Bead-making factories) के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। इसके अलावा, सुमेरियन और मेसोपोटामिया के लेखों में वर्णित 'मेलुहा' (Meluhha) को सिंधु क्षेत्र का ही प्राचीन नाम माना जाता है, जिससे उनके बीच होने वाले समुद्री और स्थलीय व्यापार की पुष्टि होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की वैचारिक…
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था, विभिन्न…
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में 'समांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिसमें बलिया में चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में, ताम्रलिप्त (बंगाल) में 'जातीय सरकार' के तहत और सतारा में 'प्रती सरकार' (वाई.बी. चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समांतर सरकारों में प्रमुख थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में औपचारिक रूप से 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की और वे जापान के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद क्रमशः उनका नाम 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा।
3. जापानी सेना की सहायता से आगे बढ़ते हुए INA की 'गांधी ब्रिगेड', 'सुभाष ब्रिगेड' और महिलाओं की एक अलग टुकड़ी 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' ने इम्फाल और कोहिमा के मोर्चों पर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया, और इस पूरी सैन्य अभियान के दौरान जापानी सेना ने INA को रणनीतिक स्वायत्तता देते हुए कभी भी अपनी कमान के अधीन नहीं रखा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रमुख संतों, उनकी दार्शनिक प्रवृत्तियों तथा उनके द्वारा प्रतिपादित पंथों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न होने के बावजूद ब्रह्म का ही अंश हैं, जबकि मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' का प्रतिपादन करते हुए जीव और ईश्वर को पूर्णतः भिन्न व स्वतंत्र माना।
2. सूफी सिलसिले में 'सुहरवर्दी संप्रदाय' ने भारत में चिश्ती संप्रदाय के विपरीत कठोर वैराग्य और भिक्षाटन का जीवन अपनाया, तथा उन्होंने राज्य की राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव रखते हुए किसी भी प्रकार के राजकीय अनुदान या जागीर को स्वीकार करने से सख्त इंकार कर दिया।
3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत बंधनों और छुआछूत का कड़ा विरोध करते हुए समाज के सभी वर्गों—यहाँ तक कि शूद्रों और महिलाओं—को भी अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया, और उनके प्रमुख शिष्यों में कबीर, रैदास और धन्ना जैसे संत शामिल थे।
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश का विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन के साथ-साथ बंगाल और पंजाब की विधानसभाओं को अपनी-अपनी प्रांतीय विधानसभाओं के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग-अलग बैठकें आयोजित कर यह तय करने का अधिकार दिया गया था कि वे विभाजन चाहते हैं या नहीं।
2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के प्रावधानों के तहत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र प्रभुसत्ता संपन्न डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया गया तथा दोनों देशों के लिए एक साझा गवर्नर-जनरल के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन को ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया था।
3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए बिना किसी जनमत संग्रह (Referendum) के सीधे स्थानीय ब्रिटिश कमिश्नर के विवेक पर छोड़ दिया गया था।
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंश (चोल, पल्लव, चालुक्य) के राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज की महान सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग का सम्मान करना था, जबकि ह्वेनसांग ने अपने विवरण में चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय द्वारा नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की पराजय का विशेष उल्लेख किया है।
2. पल्लव राजवंश के शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मिक ( monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू हुआ था।
3. चोल साम्राज्य की केंद्रीय और स्थानीय स्वशासन व्यवस्था में 'उर' (सामान्य ग्राम सभा), 'सभा' (अग्रहार या ब्राह्मण गाँवों की सभा) और 'नगरम्' (व्यापारियों की संस्था) का अत्यंत सुव्यवस्थित विवरण हमें उत्तरमेरूर के प्रसिद्ध शिलालेखों (परांतक प्रथम के शासनकाल के) से प्राप्त होता है।
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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