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Indian Polity
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भारतीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अधिकारिता, शक्तियों और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि इस परामर्श के तहत कोई ऐसा विवाद या प्रश्न जो किसी पूर्व-संविधान संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार की लिखत से उत्पन्न हुआ है, उच्चतम न्यायालय को भेजा जाता है, तो न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) होता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किसी वाद या मामले में दिए गए किसी भी निर्णय, डिक्री, निर्धारण, दंडादेश या आदेश की अपील के लिए विशेष लीव (Special Leave to Appeal) प्रदान करने की विवेकाधीन शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का विस्तार सैन्य न्यायालयों (Military Tribunals or Courts Martial) के निर्णयों पर भी होता है।
- 3. अनुच्छेद 145 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के अधीन, राष्ट्रपति के अनुमोदन से, न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें मामलों की सुनवाई के लिए न्यूनतम न्यायाधीशों की संख्या (Constitutional Bench) निर्धारित करना भी शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 143(2) के अनुसार, यदि कोई ऐसा विवाद जो किसी पूर्व-संविधान संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार की लिखत से उत्पन्न हुआ है, राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय को परामर्श के लिए भेजा जाता है, तो न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य (Mandatory) होता है। (जबकि अनुच्छेद 143(1) के तहत सामान्य मामलों में राय देना न्यायालय के लिए विवेकाधीन है)।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत उच्चतम न्यायालय की विशेष लीव अपील (SLP) की शक्ति अत्यंत व्यापक है और इसमें देश के अधिकांश न्यायालयों और अधिकरणों के निर्णय शामिल हैं, किंतु इसके दायरे से सैन्य न्यायालयों (Armed Forces Tribunals/Courts Martial) के निर्णयों या आदेशों को स्पष्ट रूप से अपवर्जित (Excluded) किया गया है।
कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 145 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति के अनुमोदन से, न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के विनियमन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत उच्चतम न्यायालय की विशेष लीव अपील (SLP) की शक्ति अत्यंत व्यापक है और इसमें देश के अधिकांश न्यायालयों और अधिकरणों के निर्णय शामिल हैं, किंतु इसके दायरे से सैन्य न्यायालयों (Armed Forces Tribunals/Courts Martial) के निर्णयों या आदेशों को स्पष्ट रूप से अपवर्जित (Excluded) किया गया है।
कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 145 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति के अनुमोदन से, न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के विनियमन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, उनके क्षेत्राधिकार तथा न्यायपालिका के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction), उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक व्यापक है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य विधिक उद्देश्य (Other Purpose) के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, किंतु न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात ही की जाती है।
3. अनुच्छेद 235 के माध्यम से राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों (जिनमें जिला न्यायालय और उनके नीचे के अन्य न्यायालय शामिल हैं) पर नियंत्रण, जिसमें उनकी पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी का अनुदान शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित किया गया है, हालांकि जिला न्यायाधीशों की बर्खास्तगी या डिमोशन से संबंधित अनुशासनात्मक कार्रवाई का अंतिम आदेश राज्य सरकार द्वारा ही पारित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किसी विधेयक को 'धन विधेयक' (Money Bill) घोषित करने की शक्ति किसे प्राप्त है?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की आयु राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर स्वतः समाप्त हो जाती है, बशर्ते इस अवधि के भीतर विधानमंडल द्वारा उसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित न कर दिया गया हो, तथा राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपने स्वविवेक से बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार राज्यों के मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, किंतु यदि किसी छोटे राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या कम है, तो मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या बारह से कम नहीं होनी चाहिए (मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों को छोड़कर)।
3. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल ऐसी अपेक्षा करे तो किसी ऐसे विषय को मंत्रिपरिषद के विचार के लिए प्रस्तुत करे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में कुल 296 सीटें आवंटित की गई थीं।
2. संविधान सभा में रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों का चयन संबंधित रियासतों के शासकों द्वारा नामांकित किया जाना था, किंतु रियासतों के प्रतिनिधियों ने संविधान सभा की प्रारंभिक बैठकों में भाग नहीं लिया क्योंकि वे प्रारंभ में इस सभा से अलग रहना चाहते थे।
3. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से 93 सीटें भारतीय रियाਸतों के लिए थीं, तथा ब्रिटिश प्रांतों के लिए निर्धारित 296 सीटों में से 4 सीटें मुख्य आयुक्तों के क्षेत्रों (Chief Commissioners' Provinces) से संबंधित थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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106वें तत्व (सीबॉर्गियम) की खोज किसने की थी?
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