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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की आयु राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर स्वतः समाप्त हो जाती है, बशर्ते इस अवधि के भीतर विधानमंडल द्वारा उसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित न कर दिया गया हो, तथा राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपने स्वविवेक से बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के कर सकता है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार राज्यों के मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, किंतु यदि किसी छोटे राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या कम है, तो मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या बारह से कम नहीं होनी चाहिए (मिजोरम और सिक्किम जैसे राज्यों को छोड़कर)।
  3. 3. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और यदि राज्यपाल ऐसी अपेक्षा करे तो किसी ऐसे विषय को मंत्रिपरिषद के विचार के लिए प्रस्तुत करे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु वह इस शक्ति का प्रयोग केवल अपनी मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता से ही कर सकता है, न कि पूरी तरह से अपने स्वविवेक से (कुछ विशिष्ट मामलों को छोड़कर जहाँ राष्ट्रपति के निर्देश की आवश्यकता होती है)। इसके अलावा, अध्यादेश की अधिकतम अवधि छह सप्ताह होती है। कथन 2 सत्य है; 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के अनुसार राज्य मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 15% निर्धारित की गई है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में आदिवासी कल्याण मंत्री के लिए न्यूनतम संख्या 12 निश्चित की गई है। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के प्रशासनिक और विधायी दायित्वों को स्पष्ट करता है, जिसके तहत उन्हें राज्यपाल को सभी निर्णयों से अवगत कराना होता है। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए इस पोर्टल का संदर्भ लें।
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